एयरलिफ्ट फिल्म समीक्षा

#एयरलिफ्ट_फिल्म . अगर इंसान सिर्फ अपने लिये पैदा हुआ और मर गया तो फिर शायद वो एक जीव से बढ़ कर कुछ नही | इंसान इंसान तभी कहलाने का अधिकार है...

#एयरलिफ्ट_फिल्म
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अगर इंसान सिर्फ अपने लिये पैदा हुआ और मर गया तो फिर शायद वो एक जीव से बढ़ कर कुछ नही | इंसान इंसान तभी कहलाने का अधिकार है जब वो अपनी इंसानियत को दिखाये औरों की मदद में | हर किसी को इंसान बनने के मौके नही नसीब होते | जिन्हे होते हैं उनका नाम हमेशा उनके दिलों में ज़िंदा रहता है जिनके वो कभी काम आये | फिल्म एयरलिफ्ट ऐसे ही एक इंसान रंजीत कटयाल ( अक्षय कुमार )  की कहानी है | ये उन सभी भारतवासियों के देखने लायक फिल्म है जो खुद को एन आर आई का टैग देकर ये भूल चुके हैं की वो भले ही नॉन रेसिडंट इंडियन भले ही हों पर उनकी रगों में खून भारत का ही दौड़ता है | उनकी पहचान हमेशा एक भारतीय के रूप में ही जानी जायेगी | फिल्म की कहानी खत्म होते होते इस संदेश के साथ और कितने इंसानियत के संदेश छोड़ जाती है | सरकारी नौकरों की असली पावर का इस्तेमाल शायद इस से बेहतर आज तक कभी नही हुआ | एक इंसान के चाहने से उसकी मेहनत उसकी हिम्मत से सवा लाख हिन्दुस्तानी अपने वतन अपने लोगों के पास लौट आते हैं | बूढ़े खड़ूस जोज़फ को दिया गया निमरित कौर का जवाब फिल्म में उनकी अहम भूमिका को और अहम बना गया | और अक्षय कुमार का अभिनय हर बार की तरह काबिल ए तारीफ रहा | पहले संजय कटियाल का वो अभिनय जिसमें वो खुद को भारतीय ना मान कर कुवैती मानते हैं कहते हैं भारत ने हमारे लिये किया ही क्या है बाद में माहौल के हिसाब से जैसे वो खुद सबको हिन्दुस्तानी होने का पाठ पढ़ाने लगते हैं और बाकी हिन्दुस्तानीयों की मदद करते हैं वाकई में बता देता है की वो मंझे हुये कलाकार हैं | फिल्म ने कई जगहों पर भावुक कर दिया और समाप्त होते होते एक बार ऐसा महसूस करा दिया के खुशी से दिल बोल उठा गर्व से कहो हम हिन्दुस्तानी हैं | पहला जहाज़ उड़के ही खुशी ऐसी थी की जैसे कोई अपना आज इतनी मुश्किलें झेल कर वतन लौट रहा हो | इस घटना के असल हीरो मि. मुथ्थैनी मैथ्यूज़ और मि. बेदी थे | रंजीत कटयाल उर्फ अक्षय कुमार ने फिल्म में मि. बेदी की भूमिका निभाई है | सलाम है उन बहादुरों को जिन्होंने दिन रात एक कर के अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डाल कर लाखों भारतवासियों को अपने वतन भारत सही सलामत पहुंचाया | और सलाम उन सरकारी कर्मचारियों को भी जिनकी कोशिशों से ये संभव हो पाया | बधाई और धन्यवाद फिल्म की पूरी टीम का जिन्होंने इस अहम घटना को इतनी खूबसूरती से पर्दे पर उतारा | वैसे मैं फिल्म समिक्षा नही करता पर ये फिस्म वाकई बहुत पसन्द आई मुझे इसलिये सिर्फ अपने निजी विचार रखे हैं फिल्म को ले कर बाकी आप देखें और अपना विचार खुद बनायें |
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धीरज झा...



धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : एयरलिफ्ट फिल्म समीक्षा
एयरलिफ्ट फिल्म समीक्षा
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