पापा को चिट्ठी

मदर्स डे पर माँ की सबसे बड़ी खुशी को उस जहान में एक ख़त । प्रणाम पा !  कैसे हैं आप ? हम कैसे हैं ये तो आपको पता ही होगा ! अंतर्यामी तो आप पहल...

मदर्स डे पर माँ की सबसे बड़ी खुशी को उस जहान में एक ख़त ।
प्रणाम पा ! 
कैसे हैं आप ? हम कैसे हैं ये तो आपको पता ही होगा ! अंतर्यामी तो आप पहले से ही थे अब तो और छुप छुप कर देखने का लाईसेंस मिल गया । बाकी थोड़ी।परेशानियाँ हैं पर वो मायने नही रखतीं , हाँ उन परेशानियों में आपका साथ ना होपा और आपकी सलाह न मिल पाना बहुत खलता है । माँ हमेशा हँसती है पर उसकी हँसी किस हद तक सच है ये तो दिख ही जाता है । आपको बहुत याद करती है , हर बात में आपको खोज लेती है । अब उसके खाने में कोई नुक्स नही निकालता हम सब समझदार से हो गए हैं । अब कोई खाने की फरमाईशें नही करता । है तो उसे आराम मगर उसके चेहरे से झलकता है की वो इस आराम से काफी ज़्यादा सुकून उसे आप से परेशान होने में आता था । सबसे ज़्यादा बेचैन करता है उसका सूना सूना रहना न सिंदूर न बिंदी न वो अच्छी वाली साड़ियाँ । सजने का शौख़ तो उसे पहले भी नही था पर जितना था वो सब आपके साथ चला गया ।
सबसे छोटा वैसे का वैसा ही है , पगलेट सा । पर उसका यही अंदाज़ तो माँ का दिल भी।लगाए रखता है । हर बात के बीच में से कुछ उल्टा बोल देने का बच्चपना गया नही उसका । सारा दिन उल्टी पुल्टी बातें करता रहता है । बहुत याद करता है आपको पर हमेंशा की तरह छुपा लेता है अपनी उदासी ठहाकों के पीछे । शायद अभी इतना बड़ा नही हुआ की जान पाए याद कैसे किया जाता है । पर मैं तो चाहता हूँ ऐसा ही रहे वो । आप भी।तो कितना चिल्लाते थे उसकी हरकतों पर लेकिन आपको भी।वो ऐसे ही पसन्द था ना ।
और छोटे की।तो पूछिए ही मत । छोटा हमेशा की तरह सबसे बड़ा है । हर ज़िम्मेदारी को उठाए चल रहा है । हाँ पर परेशान बहुत रहता है हो भी कैसे ना सब कुछ उसी को जो देखना पड़ता है । और वो आपको कितना याद करता है ये मुझे आपको बताने की ज़रूरत लगती नही आप अच्छे से जानते होंगे वो किस हद तक अन्दर ही अन्दर घुट कर याद करता है आपको ।

मैं ? मैं हमेशा की तरह , वही नालायक बेटा आपका । किसी काम का नही , सिर्फ सपनों की फसल  बोने लायक । आज भी वही कर रहा हूँ पता नही कटेगी कब पर ये यकीन है कटेगी ज़रूर कटेगी । मैं आपको याद नही करता बिल्कुल भी नही , हाँ बस जलता हूँ उन सब से जो कहते हैं मेरे पापा ऐसे मेरे पापा वैसे , तब तब अंदर से रो देता हूँ । जब कोई।मेरे सामने अपने पिता को फोन कर के अपना हाल बताता है प्रणाम करता है डाँट खाता है तब तब मेरे अंदर का बेटा चिल्लाता है आपने पिता के लिए । खैर ये सब तो लगा ही रहेगा । आज मदर्स डे है तो सोचा माँ को सबसे ज़्यादा खुशी आपको चिट्ठी लिखने से ही।मिलेगी। बाकी सब ठीक है बस आप वहाँ अपना ख़्याल रखना और अगर आस पास ही हों तो कभी कभार सपनों में आजाया करिए ।
आपका बेटा
धीरज झा

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