जादूगर बेटियाँ

जादूगर बेटियाँ नीलम पिता जी का सर सहला रही थी । तेल से सर की मालिश कर रही थी । पिता जी चुप चाप अपने किसी।ख़्याल में खोए हुए थे । नीलम पिछले ...

जादूगर बेटियाँ

नीलम पिता जी का सर सहला रही थी । तेल से सर की मालिश कर रही थी । पिता जी चुप चाप अपने किसी।ख़्याल में खोए हुए थे । नीलम पिछले कई महीनों से देख रही थी पिता जी चुप चुप हैं पहले की तरह हँसते नही बोलते नही प्यार से दो बात भी नही करते । पूछने पर कहते हैं सब ठीक है । पर नीलम जान रही थी की सब ठीक नही कुछ तो है जो पिता जी को अंदर ही अंदर कचोट रहा है । आखिर बेटियों से ज़्यादा एक पिता को कौन समझेगा । बच्चपन से दिन रात उनकी हर हरकत हर आदत को चुपचाप बारीकी से जो देखा और समझा है । पता है के पिता जी को क्या खाना पसन्द है कैसे पानी से नहाना पसन्द है पिता जी नाश्ते में क्या खाऐंगे आज खाना एक रोटी कम क्यों खाई पिता जी को कौन सी बात ज़्यादा पसन्द है और कौन सी बात पर गुस्से से लाल हो जाऐंगे । ये सब बातें बेटियाँ बहुत अच्छे से जानती हैं । बच्चपन में माँ और बढ़ती उम्र में बेटियाँ ही तो पालती हैं पिता को । उन से बेहतर भला एक पिता को कौन समझेगा ।
ऐसे ही नीलम भी समझ रही थी की कुछ गड़बड़ है । उसने सर सहलाते हुए कहा " पापा आपको याद है नाईंथ क्लास में थे तो हम एक बार बहुत गुमसुम हो गए थे । पर चहते किसी से नही थे सब काम पहले की तरह ही करते थे पर अकेले में मुँह लटका कर बैठ जाते थे । आपको याद वो सब ?
" हाँ बेटी याद है और ये भी याद है के आप साईकिल लेना चाहती थीं पर आपने हमसे नही कहा था । आपने अपनी मम्मी से कहा और मम्मी ने ये कह कर मना कर दिया के अगले साल ले देंगे । "
" वाह पापा आपको याद है । अच्छा आपको ये भी।याद होगा के आपने हमें पूरा दिन मनाया था बस ये जानने के लिए की हम मायूस क्यों हैं । और हमसे मायूस होने की वजह जान कर ही दम लिए थे । "
" हाँ बेटी अच्छे से याद है । हमेशा से तुम्हारा उतरा हुआ चेहरा देख कर मन घबराता है । जानते हैं की तुम किसी से अपने मन का हाल नही कहोगी अंदर ही अंदर दबाए रखोगी बात को । इसी लिए हर बार प्यार से मना कर पूछा और कोशिश की तुम्हारी मायूसी दूर करने की । " बोलते हुए पिता की आँखें डबडबा गईं ।
" वाह पापा आप तो बड़े चालाक निकले ।" नीलम ने पिता का कंधा दबाते हुए कहा ।
" क्यों बेपी चालाकी जैसा क्या किया हमने । " पिता ने आशचर्य से पूछा ।
" खुद हमारे लिए अपना प्यार साबित किया हमेशा । हर बार हमारी मायूसी से मायूस हुए तब तक नही माने जब तब हमारी मायूसी की वजह नही जान गए और जब हमारी बारी आई अपना आपके लिए प्यार दिखाने की तो पीछे हटते हैं । पिछले कितने दिनों से मायूस हैं अकेले से हैं औरपूछने पर कुछ बताते भी नही । आप तो हमे।मना कर पूछ लेते थे पर हम आपकी तरह होशियार नही जो आपको मना कर आपकी मायूसी को जान पाऐं । पर रोज़ यूँ मायूस देख कर बिल्कुल वैसे ही बेचैन होते हैं जैसे आप हमे बच्चपन में मायूस देख कर हुआ करते थे । आपकी परेशानियाँ दूर नही कर सकती मगर बाँट तो सकती हूँ ना पापा  ? आपकी मायूसी कम हो जाएगी सच में । जानते हैं पापा आपकी परेषानियाँ सिर्फ आपको ही मायूस नही करतीं वो आपके अपनों को भी उदास कर देती हैं । आप ना चाह कर भी वो नही।रह जाते जो आप हैं । हम बेटिओं को भी तो ये हक़ दीजिए जो कम से कम आपकी उदासी कम।कर सकें । " पिता जी पूरी तरह से नीलम की बातों मे ढूब गए थे । आँखों के आँसू शायद नीलम से माफी माँग रहे थे । होंठों की मुस्कुराहट उस गर्व से परिचित करा रही थी जो कह रहा था मुझे इस बात का घमंड है की मैं एक बेटी का बाप हूँ ।
उस दिन के बाद पिता अपनी हर परेशानी घर के बाहर छोड़ कर मुस्कुराते हुए ही घर में कदम रखते । बेटियाँ सच में जादूगर होती हैं । अपनी खिलखिलाहट से उदासियाँ जायब कर देती हैं ।

धीरज झा

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