चोर किसी का सगा नही होता

चोर किसी का सगा नही होता गाँव में एक चोर था । चोरी करने में ऐसा माहिर की आपकी आँखों से आपका चश्मा चुरा ले और आपको ख़बर तक ना हो । गाँव के ही...

चोर किसी का सगा नही होता

गाँव में एक चोर था । चोरी करने में ऐसा माहिर की आपकी आँखों से आपका चश्मा चुरा ले और आपको ख़बर तक ना हो । गाँव के ही किसान थे लल्लन राए । कुछ ज़्यादा ज़मीन तो थी नही पर जितनी थी उसी पर खूब मेहनत करते थे । बेटी की शादी सर पर थी । पाई पाई जोड़ लल्लन ने पैसे इक्कट्ठे किए थे । चोर को इसकी भनक लग गई । माहिर तो वो था ही बस क्या रातों रात ही सारे पैसे उड़ा लिए । दिन हुआ सूरज बाबा ने भोर के आँगन में पैर रखा ही था की लल्लन की चीखों ने सारा गाँव जगा दिया ।

एक बाप जिसने कौड़ी कौड़ी जोड़ी हो बेटी की शादी के लिए उसके सारे पैसे एक झटके में कोई उड़ा ले जाए तो उसकी दशा क्या होगी आप पत्थर दिल होकर भी महसूस कर सकते हैं । पटी पटिदार ने तहकीकात शुरू कर दी चोर पकड़ा गया । गाँव की चौपाल पर उसका जूते लातों से अभिनंदन होने लगा । खूब मार लगी तब भी मानाने को तैयार नही था की चोरी उसने की है । जिसकी पूरी जात हो हल्ला करने लगी ।

मामला बिगड़ने लगा । इतने में सूखन राए चोर के पक्ष में खड़ा हो गया । चोर का पक्ष लेने का कारण ये था की सुखन लल्लन का दुशमन था । था तो उसी का पटिदार पर उससे लल्लन की मेहनत और मेहनत से कमाया धन और लोगों में उसकी प्रशंसा देखी नही जाती थी । सुखन ने अपना हर संभव दाव लगा कर चोर को बेगुनाह साबित करवा ही दिया । लल्लन की हालत ऐसी थी जैसे उसका गला सबके सामने रेता जा रहा हो और कोई कुछ ना बोल रहा हो । पर अब वो कुछ कर भी नही सकता था कलेजे पर मुक्का मार कर रह गया । हिम्मती था मन में सोच लिया मेहनत कर के पैसे फिर इकट्ठे कर लेगा । पर सुखन को दिल से बद्दुआ दी लल्लन ने ।

कहते हैं एक दुखी मन की बद्दुआ फौलाद को भी गला देती है । वही हुआ आगे साल उसी चोर ने सुखन के घर चोरी की और सारा पैसा गहने ले कर गाँव से भाग गया । चोर तो चोर है वो तो अपने बाप का नही होता तो भला सुखन का सगा कैसे होता । सुखन ने जब अपने सारे घर का सामान और पैसे गायब देखे तो पागलों की तरह चिल्लाने लगा । उसी चोर का नाम पुकारने लगा की उसने ही चोरी की है उसे पकड़ो पर वो तो गाँव छोड़ चुका था । सुखन लल्लन की तरह हिम्मती नही था । ये दुख सह नही पाया और ह्रदयाघात से अपने प्राण गँवा बैठा । उसकी भूल यही थी की उसने ये नही सोचा चोर किसी का सगा नही होता ।

बुरहान को भगतसिंह का नाम देकर उसकी मौत को शहीद का दर्जा दे कर छाती पीट रहे हैं ना वो ये ना भूलें आतंकवादी किसी का सगा नही होता । कश्मीर क्या भारत क्या दुनिया आए दिन जल रही है इनके आतंक से । उसमें अकेला राम ही नही रहीम भी मरता है । बाकी समझदार तो अपने हिसाब से हर कोई है ।

धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : चोर किसी का सगा नही होता
चोर किसी का सगा नही होता
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