फिल्म हकीकत के आसपास की ( मदारी )

मैं बेटा था मैने एक पिता खोया वो पिता जो पेड़ था । हरा भरा पेड़ जो सब देख कर सूखने की दिशा में बढ़ रहा था । दस साल बीस साल तीस साल में वो सूख ...

मैं बेटा था मैने एक पिता खोया वो पिता जो पेड़ था । हरा भरा पेड़ जो सब देख कर सूखने की दिशा में बढ़ रहा था । दस साल बीस साल तीस साल में वो सूख जाता । हमे अपने फलों की सारी आमदन दे कर । हर हरे पेड़ जैसा सूखने की ओर बढ़ता पिता अपने बेटे के लिए यही तो करता है । मगर हम बेटे थे हमे तो वो पेड़ सूखा भी भला था । हमने खोया फूट कर रोए बेसहारा अनाथों की तरह रोए । चिल्ला चिल्ला कर रोए । गलती किसकी थी ये जानने की ज़रूरत भी नही समझी बस रोए ।
दूसरी तरफ वो हरे पेड़ जैसा पिता जिसने सावन पतझड़ बसंत सर्द गर्म सब देखा था कितनी ही बार देखा था और हर मौसम में अच्छे मौसम को दिखाने की बुरे से बचाने की चाह पालता रहा अपने बीज के लिए । वो बीज जिसे अभी पेड़ बनना था जो अभी छोटा था नासमझ था सभी मौसमों और रंगों से अंजान था पिता की जान था । उस बीज को खो देना उस हरे पेड़ को अंदर ही अंदर कितना सुखा देता है इसकी कल्पना कर भी हम नही कर सकते । दुनिया कि जीता जागता नर्क है एक बाप के कंधे पर बेटे की लाश का उठना । और तब तो और जब जब बेटा बेवजह मारा गया हो । फिल्म थी मैने देखी आपने देखी देखने पर दो आँसू आए फिल्म खत्म आप अपने घर अपनी दुनिया में मस्त । हों भी क्यों नही फिल्म जो थी । मगर उनका क्या जिन्होने हकीकत झेली है बेमतलब बेकार में बिना किसी का कुछ बिगाड़े । जिन्होने खोया अपना किसी अंजान की गलती से । फिल्म है कहानी है मगर कहानी हकीकत की बुनियाद पर ही खड़ी होती है । हकीकत को मजबूत बनाने की उम्मीद में । इस उम्मीद में की ये कहानी कभी तो सच का रूप लेगी कभी तो कुछ बदलेगा । मुझे समिक्षा  नही लिखनी मुझे फिल्म के बारे में नही बताना । मुझे बस इतना कहना है महसूस कर के देखें उन तमाम पिता जैसे हरे पेड़ों का दर्द जिन्होने अपने बच्चों को बेवजह खो दिया । जिनकी चीखें दब कर रह गईं । जब खुल कर चीखना चाहा तो मुँह में मुट्ठी भर मुआवज़ा ठूँस कर चुप करा दिया गया । और फिर से वही गलती बार बार हज़ार बार दोहरा दी गई ।
इरफान खान को सलाम एक पिता को जीने के लिए एक बाप का दर्द इतनी खूबसूरती से बयान करने के लिए । हर पिता को नमन खुद तप कर अपने बेटों को छाँव देने के लिए ।

धीरज झा

COMMENTS

Name

अन्य रचनाएँ,1,अलविदा,5,इश्क़ वाली कहानियां,15,कल्पनाएं,1,कविता,114,कहानियों का कोना,30,कहानी,124,किश्तों वाली कहानियाँ,5,किस्से गाँव के,14,ख़ास लोग,7,खुशियाँ,39,खेल कहानियां,4,ख़्वाहिशें,2,गज़ल,31,चलते फिरते बस यूं ही,2,चिट्ठियाँ,22,जय जवान,11,तड़प मेरी तुम्हारे लिए,72,दु:ख,61,नमन,4,पापा के लिये,27,पुराने किस्से,3,प्रतिभा की दुनिया,2,फिल्म समीक्षा,3,बस यूं ही,27,बातें काम कीं,60,बिहारनामा,2,माँ,18,युवाओं की बात,2,रात के किस्से,6,लघु कहानी,8,लेख,151,वैश्विक,1,व्यंग्य,35,शायरी,30,सिनेमा,1,सिर्फ तुम्हारे लिये,63,हास्य कथा,1,
ltr
item
क़िस्सों का कोना : फिल्म हकीकत के आसपास की ( मदारी )
फिल्म हकीकत के आसपास की ( मदारी )
क़िस्सों का कोना
http://www.qissonkakona.com/2016/07/blog-post_27.html
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/2016/07/blog-post_27.html
true
3081115015472439889
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy