आईए उन्हे अमर करें _/\_

आईए उन्हे अमर करें _/\_ कल से देख रहा हूँ लोग शोक मना रहे हैं उन्हे श्रद्धाँजलि दे रहे हैं । मगर उनमें से आधे से ज़्यादा लोगों ने कल से पहले...

आईए उन्हे अमर करें _/\_

कल से देख रहा हूँ लोग शोक मना रहे हैं उन्हे श्रद्धाँजलि दे रहे हैं । मगर उनमें से आधे से ज़्यादा लोगों ने कल से पहले उनका नाम तक नही सुना होगा दावे से कह सकता हूँ । मगर फिर भी श्रद्धाँजलि दे रहे हैं अच्छी बात है मगर इसमें बुरी बात ये है की ये एक दिखावा मात्र है दिखावे के सिवा कुछ भी नही । किसी को श्रद्धाँजलि कैसे और क्यों दी जाती है जानते हैं आप ? किस बात का शोक है उनके जाने से आपको । क्या आपकी चाची थीं ? या दादी या फिर कोई दूर की रिश्तेदार जो सालों बाद कभी आपके लिए सेब के मुरब्बे भेजा करती थी ? जब इनमे से कोई नही थीं तो ये शोक ये टीसू क्यों ? अच्छा साहित्य का एक स्तंभ गिर गया इस लिए ? अच्छा तो कितना पढ़ा था इनको आपने ? कुछ भी नही ना ? जानता हूँ ये बस देखादेखी था और कुछ भी नही ।

जब कोई ऐसा हमें छोड़ कर चला जाता है ना जिसने बदलाव का सपना देखा हो जिसने अपनी सासें फूँक कर अपने अंदर की चिंगारी को सुलगाऐ रखा हो तब उसे श्रद्धाँजलि दी जाती है और मन में प्रण किया जाता है की हम वो चिंगारी बुझने नही देंगे वो जलती रहेगी आपके बाद भी हमारे बाद भी तब तक जब तक वो आग बन कर कुरीतियों को जला ना डाले । जब तक एक नया सवेरा हर घर हर आँगन में नृत्य ना करने व
लगे । उन्होने महसूस किया दर्द को भूख को लुटती आबरूओं को फिर लिखा ताकी हम पढ़ें हम समझें की हम क्या हैं और हमारे साथ कौन ऐसा है जो ज़िंदा तो है मगर मुर्दों से बुरा है । हमने कितना पढ़ा ? कितना समझा ? कितना बदल दिया ? कुछ भी तो नही । लिखने वाला सिपाही से कम नही है वो चाहे तो स्याही की मार से हड्डियों से माँस छिटका दे आपको खून के आँसू रोने पर विवष कर दे और किया भी है । लोग बदले भी हैं पढ़ कर ही समझ कर ही ।

उन्होने ठानी और आदिवासियों के लिए लिखा उनका दर्द उनकी भूख उनकी बेबसी उन पर हो रहा अत्याचार सब लिखा उनके बच्चों की भूख से हो रही मौत लिखी उनकी बिकती बेटियों की चीख पुकार लिखी । मगर हमने क्या किया हमने कौन सी उनकी कोशिश को बढ़ा दिया । भारत में आज भी लाखों लोग भूखे सोते हैं , डाईटिंग के मारे नही ज़िंदखी से चल रही फाईटिंग के मारे भूखे सोते हैं । हमने कितनों को अपनी थाली का निवाला दिया । हमने कितनों को सहारा दिया । हमने कितनी महाश्वेता देवियों को सही से श्रद्धाँजलि दी । हमने बस दिखावा किया । तो आईऐ हम आज उन्हे श्रद्धाँजली दें आईए उनकी चिंगारी को किसी ना किसी रूप में हमेशा जलाए रखने का प्रण करें । आईए उन्हें हमेशा के लिए अमर करें ।

धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : आईए उन्हे अमर करें _/\_
आईए उन्हे अमर करें _/\_
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