नींद

नींद (कहानी) " सोनम बस कुछ दिनों की बात है । मेरा परमोशन होते ही हम अपना घर ले लेंगे । और मैने तो देख भी रखा है एक घर शहर के बीचों बीच ...

नींद (कहानी)

" सोनम बस कुछ दिनों की बात है । मेरा परमोशन होते ही हम अपना घर ले लेंगे । और मैने तो देख भी रखा है एक घर शहर के बीचों बीच जहाँ से तुम्हे मार्केट जाने के लिए भी ज़्यादा चलना नही पड़ेगा । " कबीर ने लेटे लेटे सोनम को पीछे से अपनी बाहों में समेटना चाहा । मगर ये क्या सोनम तो फिर सो गई । कबीर को फिर से बहुत बुरा लगा । ये कोई नई बात नही थी रोज़ का था । कबीर और सोनम एक दूसरे को बहुत चाहते थे । कबीर का सारा दिन ऑफिस में बीत जाता शाम को वो घर ऐसे बेचैनी में भागा आता जैसे सोनम से सदियों का बिछड़ा हो । मगर शाम को सोनम घर के कामों मे व्यस्त होती चाह कर भी वक्त ना दे पाती कबीर को । और रात होते ही जब कबीर प्यार से अपने सपनों के ताने बुनना चाहता तो सोनम एक तो थकी दूसरी ज़्यादा सोने की बुरी आदत के कारण कब सो जाती उसे खुद पता नही चलता । पहले ये बात आम सी लगती पर धीरे धीरे कबीर के दिमाग में ये बात जंगली बेलों की तरह तेज़ी से बढ़ने लगी की अब सोनम उसे उतना प्यार नही करती पता नही अब करती भी है या नही ! क्या वो कुछ देर अपनी नींद रोक नही सकती उसके लिए । भला वो कौन सा सारी रात जगाऐगा उसे । उसे भी तो ऑबिस जाना होता है सुबह ।

सोनम खुद अपनी इस बात से बहुत शर्मिंदा रहती मगर आदत थी की छूट ही नही रही थी । एक दिन कबीर ने गुस्से में कह भी दिया " बहुत नींद आती है ना तुम्हे ! नींद के आगे तुम्हे मैं भी।नही दिखता ना । पर याद रखना जिस दिन मैं सोया उस दिन तुम जगाती रह जाओगी , कितना भी रो गी पर मैं नही जागूँगा । " ये बात कबीर ने गुस्से में कह दी थी वो हमेशा ऐसा कुछ बोल देता पर थोड़ी ही देर बाद दोनो सब भूल जाते । दोनो में प्यार ही इतना था की कोई बात ज़्यादा देर दोनो को अलग नही रख पाती थी मगर सोनम की सोने की आदत के कारण हमेशा एक बार कबीर दुखी हो ही जाता था । वजह ये थी की कबीर सोनम को हर बात बताना चाहता था हर सपना सुनाना चाहता था उसे हँसता मुस्कुराता देखना चाहता था । मगर ना तो कबीर के पास दिन में वक्त होता ना रात में सोनम जाग पाती । और छुट्टी वाले दिन भी सोनम सारा काम निपटा कर दिन में भी जैसे ही बिस्तर पर लेटती वैसे ही कबीर से पहले ही नींद उसे अपने आग़ोश में ले लेती । जब कबीर कहता की " तुम सो जाती हो और मैं रात रात जगता हूँ की तुम उठो तो तुम से दो बातें कर लूँ । मगर तुम्हे परवाह कहाँ । " इस पर कई बार सोनम भी गुस्से में बोल जाती " तो इसमे मेरी गलती क्या । मैं नही कहती की तुम जागो , रात सोने के लिए होती है सो जाया करो । तुम्हे सुबह ऑफिस भी जाना होता है । " कबीर आगे अंदर से रो लेता पर कुछ बोल ना पाता ।

ऐसे ही चलता रहा कुछ वक्त बीता पर हाल नही बदला । एक दिन कबीर ऑफिस गया था । सोनम अपना सारा काम निपटा कर आदत से मजबूर जैसे लेटी सो गई । सोनम का फोन बजा एक बार दो बार चार बार सात बार मगर सोनम को होश ही नही ग्याहरवीं काॅल से सोनम की नींद खुली । फोन देखा तो कबीर का नम्बर था । हड़बड़ा कर फोन उठाया तो उधर से किसी की आवाज़ आई " आप कबीर सिंह के घर से बात कर रही हैं ? "
पहले तो सोनम समझ नही पाई की कबीर के फोन से कोई उससे ऐसे क्यों पूछ रहा है । फिर बोली " जी मैं उनकी पत्नी बोल रही हूँ । पर आप कौन और उनके फोन से मुझे फोन क्यों कर रहे हैं । वो खुद कहाँ हैं । "
" देखिए ज़्यादा सवाल ना करें , जल्दी से सिटी हाॅस्पिटल पहुँचें । आपके पति का ऐक्सिडेंट हो गया है । आप जल्दी से आजाए । पहले ही फोन उठाने में आप बहुत देर लगा चुकी हैं । " इतना कह कर फोन कट गया और इधर सोनम का रंग पीला पड़ गया उसे समझ ही नही आ रही थी वो करे क्या । लड़खड़ाते कदमों से बैग उठाया और हाॅस्पिटल के लिए निकल पड़ी । हाॅस्पिटल पहुँची तो कबीर के सारे दोस्त वहाँ थे । सबके चेहरे उतरे हुए थे । रमेश सोनम को आई सी यू की तरफ ले गया । वहाँ कबीर बेहोश हालत में पड़ा था । हालत गंभीर थी । डाॅक्टर ने कहा था की जब तक होश नही।आता हम कुछ नही कह सकते । सर पर चोट लगने से वो कोमा में चला गया था ।

कबीर की ये हालत देख सोनम वहीं लगी कुर्सियों पर धड़ाम से गिर पड़ी । उसे अपने सोने पर इतना गुस्सा कभी नही आया जितना अब आरहा था । सब दोस्त उससे पहले पहुँचे और वो पत्नी हो कर सबसे लेट । जब कबीर तड़प रहा होखा तब वो आराम से सो रही थी । जबकी उसके जागने से भी होनी टलने वाली नही।थी । उसकी गलती कुछ भी नही थी फिर भी खुद को कोस रही थी । दिन बीता रात बीती पर कबीर को होश नही आ रहा था । सोनम बस उसे निहारती रहती रोती रहती और भगवान से दुआ करती उसे जल्दी ठिक करने की । ना जाने कबीर ने कौन से बुरे वक्त में वो बात बोली जो आज सच हो रही थी सोनम दिन रात जाग कर रो कर उसे जागने को बोल रही थी और कबीर सोया पड़ा था । उठने का नाम ही नही ले रहा था । मगर सोनम की दुआओं और प्यार में ताकत थी भगवान ने उसकी सुन ली । कबीर को होश आगया । कुछ दिन इलाज के बाद कबीर को हाॅस्पिटल से छुट्टी मिल गई । कबीर के शरीर से बहुत खून बह चुका था वो कमज़ोर हो चुका था । कमज़ोरी और दवाईयों के असर से सारा दिन सोता और सोनम उसे सारा दिन और आधी रात तक निहारती रहती । कई बार तो कबीर को देखते देखते दिन कर देती । आज जब सोनम कबीर से बात करने के लिए दिन रात जागती है और कबीर चाह कर भी बात नही कर पाता सोता रहता तब उसे समझ आया की कोई किसी के कहने पर या किसी की मर्ज़ी से किसी।के लिए नही तड़पता । ये तड़प आपके लिए सामने वाले के मन में खुद से आती है क्योंकी वो आपको दुनिया की किसी भी चीज़ से ज़्यादा चाहता है । उसकी चाहत को समझिए ये दौलत से कीमती है । दौलत आपको कहीं से मिल जाएगी मगर आज के दौर में चाहत का मिलना बहुत मुश्किल है ।

धीरज झा

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