बधाई हो

बधाई हो खुशियों का त्योहार हे रक्षाबंधन । भाई बहन के प्यार का प्रतीक है रक्षाबंधन । भाई का बहन की हर दम सुरक्षा का वचन है रक्षाबंधन । मगर बड़...

बधाई हो

खुशियों का त्योहार हे रक्षाबंधन । भाई बहन के प्यार का प्रतीक है रक्षाबंधन । भाई का बहन की हर दम सुरक्षा का वचन है रक्षाबंधन । मगर बड़ा सबसे बड़ा मायूसी भरा त्योहार भी यही है । बचपन से साथ रहे भाई बहन , लड़े झगड़े , हँसी मज़ाक किया , खूब सारा प्यार लुटाया । चोटी खींच कर रुलाया तो चुटकुलों से हँसाया भी । पर्स से पैसे।चुराए तो गिफ्ट के रूप में लौटाया भी । बहन ने भाई की चुगली कर दी घर पर तो पापा की डाँट से कई बार बचाया भी । दुआओं से माँगे भाई को गुस्से में हज़ार बार कहा होगा " मर जा तू । मरेगा तो भगवान को भोग लगाऊँगी । " फिर मन ही मन भगवान से माफी भी माँगी होगी । और कहीं एक दो दिन के भीतर भाई को खरोंच तक लग जाए तो रो रो के बुरा हाल ये सोच कर की मेरी ही बद्दुआ से ऐसा हुआ होगा । शहद की मिठास में खट्टे नींबू की दो चार बूंदे मिलाने के बाद आए खट्टमिठ्ठे स्वाद जैसा है ये रिश्ता । और आज का दिन इस रिश्ते के लिए हैपी बड्डे जैसा । जैसे ये रिश्ता आज ही जन्मा हो । इतनी खुशी इतनी खुशी देता है नन्हे से हाथों से ले कर बड़े हो रहे हाथों तक को राखी बाँधने और बंधवाने का ये पर्व ।

मगर जैसे ही बड़े हुए वैसे ही ये पर्व मायूस करने लगता है । कुछ भाई तो बच्चपन से मायूस होते आ रहे होंगे । यही।वो दिन होता है जब बेटी बचाओ का नारा कुछ कुछ असर दिखाता है । पड़ोस की किसी मुँह बोली दीदी के इंतज़ार में बैठे अपने बेटे को जब माँ बाप देखते हैं तब अफसोस करते हैं काश हमारी भी।एक बेटी होती । उसके बाद वो भाई बहन मायूस जो एक दूसरे से इतना दूर हैं की चाह कर भी राखी पर नही मिल पाते । बस पुरानी यादों और तस्वीरों को देख आँसू बहा लेते हैं दो चार ।

और इन सब के बीच सबसे ज़्यादा मायूस वो लौंडे होते हैं जो पड़ोस के फलाने अंकल की बेटी को मन ही मन बहुत पसंद करते हैं बस मन की बात कहने के लिए मौका तलाशते हैं । मन और भी पक्का हो जाता है जब फलाने अंकल की बेटी हर बार देखने पर हँस कर हाल पूछती है तो  । मगर मायूसी का ये कहर आज के दिन ही तब टूटता है लौंडे पर जब फलाने अंकल की बेटी हाथ में राखी और चंदन से सजी प्लेट लेकर लौंडे को ढूँढती उसके घर आती है और मम्मी खुशी खुशी लौंडे को राखी बंधवा देती है । टूटे दिल पर एक और कहर बरसता है जब जेब से सौ दो सौ ढीले भी करने पड़ते हैं । बलि के बकरे की तरह मुँह बनाए राखी बंधाना किस हद तक मायूस करता होगा शायद लौंडा किसी को बता भी ना पाए ।

फेसबुकिए भाई भी कई बार मायूसी के उस दलदल में चले जाते हैं आज जहाँ से निकलने में दो चार दिन लग ही जाते हैं । अब कैसे ना मायूस हों रोज़ अरमानो से सजे तीन वक्त के हाए हेलो गुड मार्निंग गुड ईवनिंग गुड नाईट जैसे मैसेज करना ये सोच कर की जो करिश्मा सामने ना हो पाया बूढ़ी हो रही जवानी में आज तक शायद यहाँ हो जाए । मगर सारे मैसे अरमान सब तबाह जब आज मैसेज या तस्वीर टैग कर के वो सपनो की रानी कह दे " हैपी रक्षाबंधन भईया " । कितना कठोर है ईश्वर बताईए एक दिन में इतने प्रकार की मायूसियाँ । कुछ तो रहम करो प्रभू ।

खैर मायूसी वायूसी छोड़िए । खुशी का त्योहार है खुश रहिए । आँखें बंद कर अपने भाई बहनों को याद करिए , मुस्कुराईए और आशीर्वाद और स्नेह बरसा कर उनके लिए दुआ करिए । फेसबुक से ले कर आमने सामने आस पड़ोस हर तरह की बहनो को रक्षाबंधन की बहुत बहुत बधाई । महादेव खूब खुश रखें मेरी बहनो को ।

मेरी सभी बहनों का भाई

धीरज झा

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