प्रेम भूत

​कल एक कहानी से बहुतों को रुलाया था आज एक पुरानी कहानी से सब को गुदगुदाने की कोशिश कर रहा हूँ । पढ़िएगा शायद आपके अपने शरारती बच्चपन की कुछ ...

​कल एक कहानी से बहुतों को रुलाया था आज एक पुरानी कहानी से सब को गुदगुदाने की कोशिश कर रहा हूँ । पढ़िएगा शायद आपके अपने शरारती बच्चपन की कुछ यादें ताज़ा हो जाए । 
_________________________________________
प्रेम भूत‬

.

प्रेम है भई ! उसका क्या भरोसा कब , कहाँ , किसके साथ और किस उम्र में किस उम्र से हो जाये | ये तय होता तो हर कोई अपने लिये हीरो हिरोईनों को ही चुनता | फिर गाँव की गुंजवा , नैनतरवा , खुसिया भी सलमान खान को अपना साझा पति बना लेतीं | और इधर रमेसवा , बेलबा , रकेसबा जैसे भी दिपिका पादूकोन को ललटेन लाईट डिनर के लिये खरिहान में इनभाईट करते , बथुआ के साग , भात आ स्वीट डिश में सूजी हलुआ खिलाने के लिये | पर ऐसा होता नही ना है | प्रेम तो बस हो जाता है | 

बरजेस को भी हो गया था प्रेम | पर ये होने से पहले की कहानी भी बड़ी रोचक है | हालांकी प्रेम परवान ना चढ़ सका | एके दिन के डर में प्यार शरीर के उस छुपे हुये हिस्से से निकल कर खेतों की खाद बन गया | जब बरजेस सातवीं क्लास में गया तब उसे पता लगा की प्रेम होता क्या है | इस से पहले आभा मैडम से हुआ था पाँचवीं क्लास में | पर तब पता नही था के ससुरा यही प्रेम है | पता होता तो पकड़ कर बाँध लेते | तब बस अच्छा लगता था आभा मैडम के मुँह से बरजेस नाम को पुकारा जाना | गणित की मैडम थीं | इसलिये पुरा गणित चाट गया था बरजेस | मासिक परिक्षा में सौ में से सौ लाया तो मैडम गाल चूम के साबासी दी | दो दिन तक बेचारा बरजेस मुँह ही नही पोछा | कहता था मैडम का इनाम है धुल जायेगा | पर तीसरे दिन अम्मा पहले बरजेस को धोई फिर उसका गाल से ले कर इहां उहां सब धो दी | पता तो था नही कुछ , बस मैडम जब प्यार से बुलाती तो खूब उछलता | नई जान आ जाती | एक दिन दिनेसबा को मैडम मारी तो दिनेसबा टिपिन में सब लईकन के सामने मैडमिया को लगा गरियाने | अब मैडम का प्रेमी चुप कैसे रहे | बस फिर का था दे धोबी पछाड़ | बहुत मारा बदले में बड़का माट्साहेब से दू बेंतो खाया | पर ई प्रेम का जिनगी जादा दिन नही था | पांचवा के बाद आभा मैडम बियाही गईं | और बरजेसवा को छोड़ पिया घर चली गईं | एगो पेन दीं बरजेस को | ई उस पेन को केतना बरस तक संभाल के रखा | अब छठा बिता सातवाँ आगया | अब बरजेस को लगने लगा के ऊ जवान हो गया है | अपना दोस ललटूआ को देखता के ऊ रजनिआ के प्रेम में पगलाएल रहता है | जोन ससुर कोनो ओकरा खिलाफ या उकरा प्रति प्रेम दिखा के बोल दिया समझो छुट्टी के बाद ओकर धुलाई पक्का है | बरजेस से चिट्ठी लिखवाता | और जब रजनी चिट्ठी फाड़ के फेंक देती तो ललटूआ के बिलुख बिलुख के रोते भी देखता | जमाना एडवांस हो रहा था | प्रेम समय से पहले पैर पसारने लगा था | सब सिनेमा के कमाल था भाई जी | " बस एक सनम चाहिये आशकी के लिये " जैसे गाने की परिभाषा लईकवा सब के दिमाग में पल्थी रोप के बईठ हो | ई सब देख के बरजेस के मन में भी होता , के हे भगवान काश हमरो कोई प्रेमिका होती जिसके खातिर हम भी तड़पते | बस क्या था ! एक दिन भोला बबा लमन पहुच गया | जल ढार के बईठ गया उनके सिरहना में बोला " हे बबा ! रऊआ त सब के सुनते हैं | तनी हमरी भी सुन लीजिये ना | ऐसा प्रेम करवाईये के हमहूं किसी के लिये रोयें किसी का सपना देखें | बड़ा किरपा होगा हे बबा | हर सोमार के जल ढारेंगे | " मासूम था बेचारा |मन से की थी प्रार्थना , कबूल हो गई | अगले ही दिन छुट्टी के समय उसी की क्लास में पढ़ने वाली मंजू उस से टकरा गई और हँस दी | अब दुआ कबूल होनी थी तो बस फिर का था, जो हँसी ऐतना दिन से दिखती ना थी वो एक टकराने में दिखी भी आ दिल पर भी लग गई | अब तो बरजेस घरे आया तो खाना भी न खाया | अम्मा गरिया कर अपना आसिर्बाद बरसाती रही , पर ई मजनूं अपनी लैला के ख़याल से बाहरे नही निकला | अब तो मंजू के ख़याल बरजेस को सोते जागते , घर स्कूल हर जगह आने लगे | कभी कभी तो अपना यार नरेस को गले लगा लिया करता बरजेस | फिर नरेस खिसिया के कहता " अरे हट ना मजनूं के औलाद | पता नही का समझ लिया है हमको , जभे देखो पंजिया लेता है | रे बेटा अभी ई सब करने का दिन नही है | मैडमिया जानी ना त दुईये डंटा में सारा भूत उतार देगी | " 

" तो का करें तुम्ही बताओ ? रे नरेस ! तुम्हारे मोहल्ले की है ना मंजू ? " बरजेस को एकाएक याद आया तो खुशी से उछलता हुआ बोला | 

" हाँ है तो ! का करें ? " नरेस समझ गया अब ई ससुरा कोनो उटपटांग बात कहेगा पक्का | " तुम्ही कुछ करो ना | "

" अरे लभ तुमको हुआ , करें हम ! वाह ! बहुत अच्छे | "

" साला | यही कहते हैं ! हम तुम्हरे लिये चिट्ट बनायें , तुमको परिक्षा पास करवायें | तुम्हारी मईया के आगे तुम्हरी तारीफ कर के तुमको बाबू के मार से बचायें | और तुम हो के इतने में जय बोल गये | "

" अरे चुपो | जादा इमोसनल नही करो | बोलो करना का है |"

" हमको मालुम था , तुम हमार रक्छा जरूर करोगे | बस तुमको जो कहेंगे ना ऊ जा कर मंजू से कह देना | पर ससुर सुनों सब हमारे नाम से कहना कहीं खुद का चक्कर मत भिड़ा आना | "

" भागो साले यहाँ से , एतने यकीन है तो मते कहो हमको ई काम करने को | " नरेस गुस्सा के बोला 

" अरे मजाक कर रहे थे भाई | अब सुनो.....| " बरजेस नें सारी बात समझा दी नरेस को के कहना क्या है | छुट्टी हो गई | दोनों अपने अपने घर चले गये | बरजेस का हाथ अगले दिन स्कूल आने तक सीने पर ही रहा | ना सुध से खाया ना सो पाया | भोला बबा ने फरियाद सुन ली थी शायद | किसी तरह करवटें ले कर भोर हुई | अभी उठ के नहाने जा रहा था के नरेस आ गया | नरेस को एतना भोरे देख कर बरजेस खुस हो गया | समझा आज तो बात पक्का बनी ही समझो | पर नरेस तो एक दम घबराया था | आते ही बोला " मरवा दिये ना ससुरे हमको भी | "

" का हुआ ? बतयेबो करोगे | "

" बतायें का कटहर | गये थे शाम को उसके घर के पास | सामने ही मिल गई अकेली | "

" वाह ! क्या बात है | " पूरी बात सुने बिना बरजेस टुभुक पड़ा | 

" का बात है ! पूरा सुनोगे तो नानी अम्मा का भोज उखड़ जायेगा अभिये | " नरेस खिसियाके हुये बोला |

" अच्छा अब ना बोलेंगे | तुम कहो |"

" गये कहे मंजू सुनो एगो बात कहनी थी | मंजू ने कबा कहो | हम कहना सुरू किये | मंजू बरजेस तुमको बहुत चाहता है | न दिन में चैन से खाता है ना रात को भर पेट सोता है | हर बखत तुमको ही याद करता है | ऊ तुमको आई लभ यू कहा है | ऊ सब सुनती रही | फिर बोली तुम सबको जो ई हवा लगा है ना ई कल हम उतारते हैं | पापा को ले कर आयेंगे कल हेडमास्टर साहेब ही जबाब देंगे ई लभ यू का | " इतना सुनते ही बरजेस को लगा जैईसे अंधेरी रात में दस बारह गो कुत्ता घेर लिया हो | 

" अब का होगा ? हम नही जायेंगे इस्कूल | "

" अछा आ हम जा के लात खायें अकेले | चलो आ चल के समझाते हैं मंजूआ को |"

" ठीक है आते हैं कपड़ा पहीन | आ सुनों मंजूआ नही भौजी कहो | "

" इहां दान जा रही है तुमको रिस्ता सोझराने का सूझ रहा है | जल्दी चलो | " दोनों जल्दी जल्दी स्कूल पहुंचे | आज तो सबसे पहले स्कूल में वही दोनो पहुंचे थे | गेट के खड़े हो कर उन्होंने सब को बारी बारी देखा अन्दर आते | पीरियड की घन्टी में दो मिनट ही थे पर मंजू अभी तक ना आई | दोनों डर के मारे कंप कंपा रहे थे | अब तो हो गया के वो अपने बाबू को साथ लयेबे करेगी | क्लास के बाकी के दोस्त आते पूछते के यहाँ का कर रहे हो पर अब ये क्या बतायें | तभी दोनों का करेजा मुँह में आने लगा जभी देखे सामने मंजू अपने पपा के साथ चली आ रही है | अब तो वो उसके पपा कम यमराज ज़्यादा दिख रहे थे | ऐसा लग रहा था के हाथ में गदा लिये वो उन्हे स्वर्ग ले जाने उन्ही की तरफ बढ़ रहे हैं | पर वो उनकी तरफ ना आ कर हेड मास्टर के कमरे में घुस गये | जाते हुये मंजू ने दोनों की तरफ ऐसे मुस्कुरा कर देखा मानों कह रही हो " देखो बच्चू अब का हाल होता है तोहार दुनू के | " अब तो दोनों फाँसी की सज़ा भुगत रहे कैदी की तरह घड़ियां गिनने लगे के कब बुलावा आ जाये | बरजेस के बाबू पंडि जी थे बड़ी इज्जत थी | उसको भी स्कूल में सब मैडम बहुत सुध्धा मानती थी | उसे अब मार से ज़्यादा बदनामी का डर सताने लगा | इतनें में मंजू अपने पिता के साथ बाहर आई | ई दोनों बाहर काटल खंसी की तरह टुकुर टुकुर ताक रहे थे | मंजू अपने पापा को उनकी तरफ ही ला रही थी | पास आ कर बोली " पपा ई नरेस आ ई बरजेस है | हमारी ही क्लास में पढ़ते हैं | " उसके पपा बोले " हाँ दोनों के पिता जी को जानते हैं | बहुत अछे लोग हैं तो बच्चे भी अच्छे होंगे | बेटा लोग घरे आना अपनी दुकान का मिठाई खिलायेंगे | " इतना कह कर वो चले गये | दोनों के अचरज का ठिकाना ना रहा | बरहम बबा से देवी माई सबका शुक्रिया कर दिया मन ही मन | मंजू पास आ कर बोली " एमकी छोड़ दिये हैं आगे से अईसा कुछो किये तो पक्का बता देंगे पपा को | फेर त बुझबे करते हो का होगा | अब अपना रोदलू चेहरा सही करो | " मंजू एतना कह कर चली गई | अब दोनों के जान में जान आई | प्रेम का भूत झड़ चुका था बरजेस के मन से | दोनों अपना क्लास में चले गये | अब तो मंजू के साये से भी बरजेस 1०० मीटर दूर रहता ….

.
धीरज झा

COMMENTS

Name

अन्य रचनाएँ,1,अलविदा,5,इश्क़ वाली कहानियां,14,कल्पनाएं,1,कविता,112,कहानियों का कोना,30,कहानी,121,किश्तों वाली कहानियाँ,5,किस्से गाँव के,14,ख़ास लोग,2,खुशियाँ,39,ख़्वाहिशें,2,गज़ल,31,चलते फिरते बस यूं ही,2,चिट्ठियाँ,22,जय जवान,11,तड़प मेरी तुम्हारे लिए,72,दु:ख,16,दुख,45,नमन,3,पापा के लिये,26,पुराने किस्से,3,प्रतिभा की दुनिया,2,फिल्म समीक्षा,3,बस यूं ही,27,बातें काम कीं,59,माँ,18,युवाओं की बात,1,रात के किस्से,6,लघु कहानी,8,लेख,149,वैश्विक,1,व्यंग,35,शायरी,30,सिनेमा,1,सिर्फ तुम्हारे लिये,63,हास्य कथा,1,
ltr
item
क़िस्सों का कोना : प्रेम भूत
प्रेम भूत
क़िस्सों का कोना
http://www.qissonkakona.com/2016/08/blog-post_20.html
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/2016/08/blog-post_20.html
true
3081115015472439889
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy