बधाई हो

"बहन" सुनते ही हँसी आ जाती है । अरे चुटकुलों वाली हँसी नही खुशी से भरी हुई हँसी । उन पुराने दिनों मे चाँदी वर्क वाली यादों में लिप...

"बहन" सुनते ही हँसी आ जाती है । अरे चुटकुलों वाली हँसी नही खुशी से भरी हुई हँसी । उन पुराने दिनों मे चाँदी वर्क वाली यादों में लिपटी हुई खुशी । एक बहन ऊपर से छोटी बहन एक भाई के लिए बेटी से कम नही होती । उसके प्रति भाई की ज़िम्मेदारियाँ वैसे ही होती हैं जैसे एक बाप के ऊपर । खुद के छोटे हाथों में बहन के उन छोटे हाथों को थाम कर पहले दिन उसे स्कूल लेना ही उस छोटे भाई को बड़ा ज़िम्मेदार बना देता है । स्कूल के पहले दिन छोटी बहन नए नए अंजान चेहरे को देख डरती है , रोती है , अपने छोटे से बड़े भईया को खोजती है । उसके कोमल गालों पर सूखे हुऐ आँसुओं जो भईया को देख फिर हरे होने लगते हैं को भईया अपने नन्हे हाथों से पोंछता है उन्ही छोटे हाथों से बहन को टिफिन खिलाता है । लड़ता है झगड़ता है रूलाता है फिर मनाता है । ये मस्ती भरी ज़िम्मेदारियों को एक भाई उम्र के हर पड़ाव में साथ ले कर हँसते हुए चलता है ।

स्कूल के बाद काॅलेज में छोटी सी बहन बड़ी हो जाती है खुद को समझदार समझने लगती है । मगर भाई तो जानता है समझता है के वो हमेशा छोटी रहेगी । उसे हर बात में समझाता है इसके साथ नही।घूमों वहाँ मत जाओ ये मत करो । बहन चिढ़ती है उसकी तानाशाही से मगर एक दिन अनुभव करती है की भाई सही था उसकी फिक्र सही थी । पिता अपनी बेटी के लिए रिश्ता ढूँढता है अपने मन पसंद का । मगर भाई अंदर से बेचैन होता है कुछ बोल नही सकता क्योंकी छोटा है घर में उसकी मर्ज़ी उसके फैसले अभी इतने असरदार नही  जो उनके आधी ज़िंदगी का तजुर्बा अपनी जेब में रखे पिता मानें । भाई अंदर से बेचैन होता है यही सोच सोच कर की उसका होने वाला बहनोई कैसा होगा , उसकी बहन को खुश रखेगा या नही , कहीं गुस्से वाला ना हो जो उसकी नाज़ो से पली बहन को बात बात पर डाँटता रहे । एक पिता अपनी बेटी के लिए एक सम्पन्न परिवार कमाऊ लड़का ढूँढता है पर एक भाई अपनी बहन के लिए एक अच्छ इंसान ढूँढता है । इसे आप तजुर्बे की कमी कहें या पीढ़ियों का अंतर मगर यही सच है । भाई तब तक अपने पिता के फैसले से संतुष्ट नही होता जब तक वो अपनी बहन के लिए देखे गए लड़के से मिल ना ले उस जान ना ले ।

फिर होती है बहन की शादी , इस वक्त सबसे अशांत इंसान एक भाई ही होता है । जो छोटे से कंधे पर बेचैनी और ज़िम्मेदारी दोनो का भार ढो रहा होता है । अपनी उम्र के मुताबिक जितनी समझ है उसी हिसाब से सारी व्यवस्था का बार बार मुआयना करता है । तब उसकी नज़रें चमियाँ ही ढूँढ रही होती हैं कहीं कुछ छूट तो नही गया । उसे चैन बरातियों के स्वागत और फिर फेरों के बाद ही आता है । बहन के फेरे हो रहे होते हैं भाई दूर थका हुआ बैठा बहन को निहार रहा होता है । बहन के घर छोड़ जाने की पीड़ा और बहन की खुशी है या नही इसी में उलझा सा । फिर जब विदाई होती है तो एक भाई बड़ा मजबूत सा दिल लिए मुस्कुरा रहा होता है । मुस्कुरा कर बहन के आँसू पोछता हुआ उसे विदा करता है और उसके विदा होते ही वो घर का वो कोना ढूँढता है जहाँ लोगों का आना जाना ना हो और इसके वाद वो सुनसान कोना गवाही बनता है उस भाई की मजबूती के पिघल कर आँसुओं में बह जाने के दृश्य का । एक मजबूत भाई फूट फूट कर रो रहा होता है । क्यों की उसने विदा किया है अपनी बहन अपनी दोस्त अपनी माँ के बाद वाली ममतामई परछाईं को ।

और इन सब के बाद वो वक्त आता है जो भाई को वो खुशी देता है जिसका अंदाज़ा उसके सिवा कोई नही लगा सकता । जैसे की आज मैं नही बता पा रहा अपनी खुशी की हद को । आज एक भाई जिसने अपनी उस छोटी सी बहन की ज़िंदगी को वैसे फलते फूलते देखा जैसे एक बाग़बान एक बीज को बढ़ते देखता है । आज उस छोटी सी बहन ने जन्म दिया है एक छोटे से राजकुमार को । आज वो नन्ही सी बहन बड़ी।हो गई आज वो एक नए और दुनिया के सबसे ऊँचे ओहदे को पा गई आड वो बेटी , बहन , बहू , बीवी के साथ साथ माँ हो गई । आज उसने एक भाई को मामा बना दिया उसे ऐसी खुशी दी जिसका बयान एक भाई कभी नही कर सकता । रक्षाबंधन को कुछ दिन ही बचे हैं । बहुत उत्सुक्ता होती थी हमारी बहन को इस बात की के राखी पहुँची या नही । महीने पहले ही राखियों का गुच्छा और चिट्ठी हर साल बिना नागे के चार पाँच दिन पहले ही।पंजाब पहुँच जाया करती थी । हक़ तो हमारा था तोहफा देने का पर इस राखी में तुमने वो तोहफा दे दिया जिसके बराबर का तोहफा हम चाह कर भी नही दे सकते । हमेशा खुश रहो बहन ।

और ( Piyush )  झा जी आप एक भाई की बेचैनी का सबसे बेजोड़ इलाज निकले । आप उम्मीद से ज़्यादा अच्छे जीवनसाथी साबित हुए हमारी बहन के लिए । सभी भाईयों की दुआऐं लगें आपको ।महादेव बहन और बाबू को तंदरूस्ती दें और आप सब को हमेशा खुश रखें ।
बहुत बहुत बधाई हो 😢😊

धीरज झा

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