जीतना ज़रूरी है

जीतना ज़रूरी है   कस्बसिया नदी के एक किनारे बसा था एक गाँव दुसरे किनारे बसा था दूसरा छोटा सा गाँव । कभी वो छोटा गाँव भी इस बड़े गाँव का ही हिस...


जीतना ज़रूरी है



 



कस्बसिया नदी के एक किनारे बसा था एक गाँव दुसरे किनारे बसा था दूसरा छोटा सा गाँव । कभी वो छोटा गाँव भी इस बड़े गाँव का ही हिस्सा था । मगर गाँव के कुछ परमभूतियों ने मिल कर इस बड़े गाँव से उस छोटे गाँव को अलग करवा दिया और वो नदी जो पहले केवल बड़े गाँव की थी बहुत सुन्दर नदी साफ सुथरी सी उसका थोडा भाग छोटे गाँव को भी दे दिया गया । मगर छोटे गाँव के मुखिया को ये पसंद नहीं हुआ वो कहता था उसे पूरी नदी का हक़ चाहिए पर बड़े गाँव वाले भला ऐसा कैसे करने देते । अब इस से खफा वो छोटे गाँव के मुखिया अपने गाँव के कुछ लम्पटों को रात के अँधेरे में नदी तैरा कर बड़े गाँव में कुछ अशांति फ़ैलाने भेज देता ।



 



बड़े गाँव के मुखिया ने कुछ लाठईतों की फ़ौज नदी किनारे खड़ी कर रखी थी क्योंकी उसे पता था की छोटे गाँव का मुखिया और बाकि के पञ्च हरामी किस्म के हैं और वो ऐसी घुसपैठ की हरकत करबे करेंगे । मगर बड़े गाँव के मुखिया के इतना सचेत रहने पर भी वो लम्पट लोग गाँव में आ ही जाते । इसका कारण ये था की नदी के किनारे मछुआरे बसे थे जिनमे से अधिकांश छोटे गाँव वालों से मिले थे । और जब उन्हें लगता की लंपटो द्वारा घुसपैठ हो रही है तो वो लठईत फ़ौज का ध्यान भटका कर लम्पटों की घुसपैठ में मदद करती । और लम्पट भले ही मार दिए जाते मगर इसमें कई लठैत भी मर जाते । ये आए दिन की बात होने लगी । गाँव के लोग मुखिया को दोष देने लगे । उनमे से कुछ का मनना था की मुखिया को छोटे गाँव पर चढ़ाई कर देनी चाहिए । कुछ कहते थे की मछुआरों को ही भगा दो या मर दो । मगर मुखिया उनकी बातों में नहीं आ सकता था क्यों की उसे हर पहलु को देखना था । हालाँकि मुखिया जब मुखिया नहीं था तब वो भी इन जैसी बातें ही करता था मगर मुखिया बन कर उसे समझ आया क एक मुखिया को कितना कुछ सोचना पड़ता है ।



 



सबसे पहले छोटे गाँव पर चढ़ाई करते ही गाँव में अन्न पानी की कमी आ जायेगी । व्यापर पर बुरा असर पड़ेगा जितना गाँव में अनाज है उसी से कम चलाना पड़ेगा और वो भी अनाज आम दर से काफी महंगा मिलेगा जिसे गरीब गाँव वाले नहीं खरीद पाएंगे । फिर बाकि के गाँव का दवाब बन जायेगा हो सकता है बड़े गाँव को थोडा युद्ध में उलझा और कमज़ोर होता देख बाकि के दुश्मन गाँव इसका फायदा उठा लें । अगर ऐसा हुआ तो भी दोषी मुखिया को ही ठहराया जायेगा । दूसरी तरफ उन मछुआरों में कई बेकसूर भी है और अगर उन बेकसूरों को मारा जाये तो ये भी नियम के खिलाफ होगा और इसके बाद वो जगह खाली हो जाएगी जिसपर हो सकता है छोटा गाँव अपना कब्ज़ा जमा ले ।



 



वो नदी जो कभी साफ सुथरी थी अब खून से लाल होने लगी । गाँव की माएं बेटों की लाशें देख दिन रत रोने लगीं । माहौल बिगड़ने लगा मुखिया पर हमले का दबाब बनने लगा । मुखिया ने भी हमला बोल दिया । मगर उसके बाद जो डर था वही हुआ । छोटा गाँव तो ध्वस्त होगया मगर बड़े गाँव की हालत जीतने के बाद भी बदहाल हो गई । गरीब भूख से मरने लगा, अनाज दल सब्जी सब ज़रूरत की चीजें महंगी बहुत महंगी हो गयीं । इसके लिए मुखिया को बाकि गाँवों को जवाब देना पड़ा । दुश्मन गाँव इसे कमज़ोर देख हमले की तैयारी करने लगे । देखते ही देखते बड़े गाँव का हाल बहुत ज्यादा बुरा हो गया ।



 



मगर उस से क्या दिक्कत छोटा गाँव तो तबाह हो गया ना भले अपने गाँव की हालत खस्ता हो गई भले लोग युद्ध के बदले भूख और बदहाली की मार से मर गए । मगर हम जीत तो गए ना । जीतना ज़रूरी है जानें भले ही कितनी कुर्बान हो जाएँ, नतीजा भले जो निकले । मुखिया की गलती थी सारी, उन्हें मुखिया बनने से पहले इतने बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए थे जिसके दबाब में उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा । भले ही वो बाद में समझ गए हों की मुखिया के लिए चढ़ाई करने का फैसला इतना आसान नहीं जितना एक आम गाँववासी के लिए सिर्फ मुंह से कह देना के चढ़ाई ज़रूरी है । पर जो भी हो जीतना ज़रूरी है । इसका क्या हल होना चाहिए ये तो पता नहीं मगर जो भी हो चढ़ाई तो बिल्कुल कोई कोई हल नहीं जब तक सामने से पहल न हो या जब तक सरे रस्ते न बंद हो जाएँ । ये पडोसी गाँव के लिए ही नहीं बल्कि अपने गाँव के लिए भी नुक्सानदेह साबित होगा ।



 



बाकि ये तो बस कहानी है क्या फरक पड़ता है इस से । और आप सब ठीक हैं ना ?



 



धीरज झा


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क़िस्सों का कोना : जीतना ज़रूरी है
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