चिट्ठी तुम्हारे लिए

​बहुत होंगे जे इसे पढ़ कर हसेंगे , बहुत होंगे जिन्हे ये अपने दिल की बात लगेगी , बहुत होंगे जो क्या प्रतिक्रिया दें उन्हे समझ ही नही आएगा और ...

​बहुत होंगे जे इसे पढ़ कर हसेंगे , बहुत होंगे जिन्हे ये अपने दिल की बात लगेगी , बहुत होंगे जो क्या प्रतिक्रिया दें उन्हे समझ ही नही आएगा और बहुत ऐसे भी होंगे जो सोचने पर मजबूर हो जाऐंगे की क्या उन्होने जैसा प्रेम किया वो ऐसा ही था या नही । पर मेरा काम तो लिखना था और मैं लिख चुका हूँ अब आप पढ़ें ये चिट्ठी ।

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सुनो तुम 
आज ये ख़त तुम्हारे लिए है । एसा ख़त जिसमे लिखी बातें मैं पहले भी कह चुका होऊँगा तुमसे मगर आज उन सब बातों को एक साथ कहने का मन हुआ तो चिट्ठी लिख रहा हूँ । इस चिट्ठी को तुम मेरा बयान मान कर स्टाँप पेपर पर भी लिख कर भविष्य के लिए रख सकती हो । तो चलो कुछ बातें दिल की तुम्हारे दिल तक पहुँचाता हूँ । 
देखो अगर बात सिर्फ इतनी सी होती के शादी कर के तुमसे और फिर कुछ महीने जम कर लपाकझन्ना करूँ और फिर जब महीने सालों में बदलने लगें तो बस रात के रात अपनी भूख मिटाने को तुम्हे नोचूँ और तुम्हारी तरफ पीठ कर के सो जाऊँ बिना किसी भाव को चेहरे पर आने दिए और फिर तीन चार बच्चे पटक दूँ तुम्हारी गोद में और कहूँ की ये सब तो बाई मिस्टेक दो पेग ज़्यादा पीने की वजह से हो गया तो फिर लानत है मेरे ऐसे प्यार और रात दिन भगवान को तंग कर के तुम्हे दुआओं में माँग कर अपना बनाने पर । इससे अच्छा मैं भी इस सभ्य समाज की तरह रीति रिवाज़ो से शादी कर के ऐसी ही आदर्श शादी ना कर लूँ क्यों इतने पापड़ बेल रहा हूँ। 
मुझे तुम्हे अपना बनाना है क्यों की मुझे अपने हर वो छोटे बड़े वादे पूरे करने हैं जो मेरा सपना हैं और वक्त वक्त पर मैने तुम्हे कहा है की मैं ये करूँगा वो करूँगा । इस ये और वो को सच करना है मुझे । मुझे तुम्हे रात को बेफिक्र मुझ से लिपट कर सोते हुए एक टक लगा कर देखना है । मुझे कभी कभार तुम्हारी आँख देर से खुले तो चाय बना कर त्हे प्यार से उठाना है और कभी कभी तो एक नोट छोड़ जाना है तुम्हारे सिरहाने के नीचे ऑफिस जाते हुए जिस पर लिखना है " जानता हूँ रात देर से सोई हो तो देर से उठोगी और मैं ऑफिस चला गया होऊँगा तो आलस का सौ मन भार तुम पर पड़ जाएगा और तुम नाश्ता भी नही।बनाओगी इसीलिए कच्चा पक्का नाश्ता बना कर छोड़े जा रहा हूँ , बिना मीन मेख निकाले खा लेना । जानता हूँ उतना अच्छा नही होगा क्योंकी तुम्हारी तरह गुणों की खान तो मुझ में है नही । तो अब उठो और नाश्ता कर लो और हाँ और जो अभी इत्ती बड़ी स्माईल आई है ना चेहरे पर उसको सिल्फिआ कर व्हाट्ऐप कर देना । नाश्ता ज़रूर कर लेना और खराब बना होगा तो इसका हरजाना रात को बाहर डिनर करा के चुकाऊँगा । " 
फिर तुम्हे छोटी छोटी बातों पर तंग भी करना है और जब तुम रूठ जाओ तो अलग अलग तरीकों से मनाना भी है । महीने के उन दिनो मे जब तुम बहुत चिड़चिड़ी हो जाती हो उन दिनो तुम्हारी चिड़चिड़ाहट को अपने प्यार से सहलाना है । फिर उन महीनों में जब तुम बीवी से माँ का सफर तय करोगी और दुनिया की सबसे बड़े दर्द पर दुनिया की सबसे बड़ी खुशी वाली चादर ओढ़ कर दर्द में भी मुस्कुराओगी तब मुझे तुम्हारे उन तकलीफ से भरे दिनों को इतना खुशनुमा बनाना है की तुम इस महंगाई के दौर में भी आठ दस बच्चों की डिमांड करो । उन महीनो में तुम्हे एक चम्मच तक नही उठाने देना है और जब तुम हमारी गुड़िया ( हाँ गुड़िया ही होगी पक्का ) को इस जहान में लाने के लिए मौत से लड़ने जैसी हालत में रहोगी ना तब तुम्हारी ख़्वाहिश के मुताबिक तुम्हारा हाथ पकड़े रहना है ( अगर डाॅक्टर माना तो वरना उस हाल में मैं डाॅक्टर से बहस करने बिल्कुल भी नही जाऊँगा ) । 
तुम्हे सारी उम्र वैसे ही देखना है जैसे पहली बार तुम्हे देख कर ज़मी और जन्नत की बीच वाली गली में खो गया था ।और ढूँढना है हमेशा वही प्यार जिसे पहली बार तुम्हारी आँखों में डूब कर गहराईयों से खोज लाया था । ज़िंदगी के उस आखरी पड़ाव में भी तुम्हारे साथ रोमाँस करना है । बिना दाँतों के कपकपाती आवाज़ में गाना है वो गाना जो समन्दर को देख मेरा हाथ पकड़ कर तुमने गुनगुनाया था " ये रातें ये मौसम नदी का किनारा , ये चंचल हवा " और फिर तुम्हारी शर्म पर उस बुढ़ापे में भी फिदा हो जाना है और सुनो मैं वो भी वादा निभाऊँगा जब तुम अठासी की उम्र में मरोगी तो मैं कसम से दूसरी शादी का सोचूँगा भी नही अपने इक्यानवे से बानवे पूरे होते होते फिर उस दुनिया में चला आऊँगा जहाँ तुम उस उम्र उस हाल में भी बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही होगी । 
मुझे इन सब सपनों , बातों और वादों को पूरा करने के लिए तुम्हे अपना बनाना है वरना जिस्म की प्यास तो बेचारे कुत्ते भी बुझा लेते हैं । मालिक सहाए हों सपने सच ज़रूर होंगे । 
मन ही मन हो चुका तुम्हारा हब्बी 😂
धीरज झा 

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