​जी लूँ तुम्हारे अहसास संग

​जी लूँ तुम्हारे अहसास संग "क्या है कबीर ? अब आपको क्या हुआ । मान भी जाओ ना, अच्छा सुनो चलो आज हम कहीं घूम कर आते हैं । कोई अच्छी सी फि...

​जी लूँ तुम्हारे अहसास संग
"क्या है कबीर ? अब आपको क्या हुआ । मान भी जाओ ना, अच्छा सुनो चलो आज हम कहीं घूम कर आते हैं । कोई अच्छी सी फिल्म देखेंगे और खाना बाहर ही खाऐंगे वो भी आपकी फेब डिश । हाँ जानती हूँ आपको मेरे और माँ के हाथ का ही।सबसे ज़्यादा पसन्द है मगर आज मेरा आपके साथ वक्त बिताने का मन है इसलिए मैं तो खाना बना नही पाऊँगी तो हम बाहर चलते हैं साथ साथ घेमेंगे भी और खाना भी।बाहर से खा रेंगे और वैसे भी आपको बाहर से खाने की भी आदत डालनी चाहिए, क्या पता कल को आपके साथ रहूँ ना रहूँ ( धरा ने ये बात जान बूझ कर बोली उसे पता है अब कबीर गुस्से से उसे देखेगा और उस पर खूब बरसेगा और यही बारिश तो वो चाहती है, इस बारीश में झलकती है कबीर की फिक्र उसके लिए मगर कबीर अब भी चुप है ) " गेस्ट रूम में शोभित बैठा है वो ये सब सुन रहा है और हैरान भी है । तभी परिधी आती है । शोभित परिधी का सबसे करीबी दोस्त है दोनों की दोस्ती स्कूल के वक्त से है । लड़का लड़की का बहुत अच्छे दोस्त होना अजीब लगता है।सुनने में।सबको मगर ये दोनो हैं । शोभित पूरे सात साल बाद परिधी से मिला है क्योंकी अब शोभित इंडिया में नही रहता । खैर बहुत हुआ दोनो का परिचय अब कहानी पर वापिस आते हैं । 
" परिधी आँटी किससे बातें कर रही हैं ? 

" पापा से । " सामने के सोफे पर बैठते हुए परिधी ने बड़े आराम से जवाब दिया मगर उसके जवाब शोभित का आराम छीन लिया । 

" मैं और तुम बच्चपन से साथ हैं हर बात शेयर की है हमने अपनी और तुमने तो हमेशा यही बताया की पापा  नही हैं अब । फिर ये अचानक से..... ? 

" कुछ नही तुम नही समझोगे । हमें निकलना चाहिए क्योंकी शाम से पहले घर आना है नही तो माँ परेशान हो जाती हैं । " परिधी ने ऐसे व्यवहार किया जैसे उसे शोभित के सवालों का कोई असर ही ना हो रहा हो । 

" यार तुम तो मेरी गंदी आदत जानती हो ना अब जब तक सब सुलझेगा नही मेरा सर दुखता रहेगा । प्लीज़ बताओ ये सब क्या है । " 

" अच्छा बताऊँगी मगर पहले मेरी एक कहानी सौनोगे ? "

" क्या है यार ? मैं कुछ पूछ रहा हूँ और तुम हो की कहानी सुनाओगी । '

" तुम शायद मेरी एक गंदी आदत का पता नही वो ये की मैं कोई नई कहानी लिखूँ और जब तक सुना ना लूँ किसी को तब तक मुझे बहुत गुस्सा आता रहता है । मन करता है सामने वाले का सर फोड़ दूँ । " परिधी ने बनावटी गुस्से वाला मुंह बना कर लैपटाॅप दोनो हाथों से ऐसे ऊपर उठाया जैसे शोभित को मार देगी । 

" अच्छा मेरी माँ मार मत सुना अपनी कहानी । " 

" तो सुनो,

बात तकरीबन 30 या 32 साल पुरानी होगी । एक लड़का लड़की थे जैसे हर कहानी मे होते हैं । दोनों एक दूसरे से इतना प्यार करते थे की जैसे दुनिया में उनके सिवा कोई और हो ही नही, जैसा हर कहानी में होता है । धीरे धीरे दोनों का प्यार इतना बढ़ गया की एक दूसरे बिना रहने की सोचना भी उन्हे सज़ा लगने लगा, जैसा हर कहानी में होता है । लड़का हमेशा कहता था " सुनो, तुम्हारे सिवा अब ये ज़िदगी किसी की नही । कोशिश करना आखरी दम तक की मेरी हो जाओ अगर ना हो पाई तो ये ज़िंदगी तुम्हारे बाद मेरी भी नही रहेगी । " ऐसा ही तो हर कहानी में हर लड़का कहता है । 
लड़की भी हर कहानी की लड़की की तरह कहती " ऐसा नही होगा हम एक हो कर रहेंगे । तुम्हारे बिना अपना वजूद सोचना कब का छोड़ दिया । तुम नही तो कोई नही । " हालाँकी लड़की जानती थी उसकी मजबूरियाँ बड़ी हैं हो सकता है वो ना भी कर पाए मगर फिर भी।वो हिम्मत नही टूटने देती लड़के की । जैसा हर कहानी की लड़की करती है । 
लड़का ना लड़की के कहीं बाहर रिश्तेदारी या किसी पार्टी फैंक्शन में जाने से बहुत नाराज़ होता क्योंकी उसे पता था की किसी जवान और शादी लायक हो रही लड़की को देख समाज और रिश्तेदारों को उनका हर बेटी के लिए वर वाली ज़िम्मेदारी याद आजाती है और वो लड़की के घर वालों को अपनी बिरादरी के तमाम लड़कों का ब्योरा देने लगते हैं । लड़की लड़के के लिए इतनी कीमती थी जितना जनता के लिए कालाधन भी कीमती ना होगा । तो भला वो कैसे ना डरता । मगर लड़की को मजबूरी में जाना पड़ता । फिर जब लड़का गुस्सा करता अपना डर दिखाता तो लड़की को लगता कहीं उसकी आज़ादी तो नही छीनी जा रही वैसे बाद में वो अपना मन समझा लेती पर लड़के के डर को कभी समझ नही पाई । 
लड़के ने एक रोज़ कहा " अब तुम्हे नही रोकूँगा कभी कहीं आने जाने से । बस जिस दिन कोई अनहोनी हुई उस दिन के लिए खुद को तैयार रखना की संभल सको । " बात आई गई हो गई । वक्त बीता और लड़के का डर सच हो गया । लड़की के किसी रिश्तेदार ने लड़की के लिए एक लड़का सुझाया उसके घर वालों को । उन्हे लड़का पसन्द आगया । लड़की रोती रही चिल्लाती रही मगर किसी ने उसकी नही सुनी । उसकी माँ ने भी नही जो उसे इतना प्यार करती थी । लड़के को जब पता लगा तब बस वो मन में उठे तूफान को बड़ी मुश्किल से दबा कर मुस्कुरा पाया और लड़की का हाथ अपने हाथों में ले कर बस इतना बोल पाया " ख़याल रखना अपना और महसूस करती रहना हमेशा अपने पास ही पाओगी मुझे । ये तुम्हारे प्यार पर निर्भर करेगा की मुझे किस हद तक महसूस करती हो जितना दिल से महसूस करोगी उतना ही साफ नज़र आऊँगा हर वक्त तुम्हारे पास । "
इतना कह कर लड़के ने लड़की का हाथ छोड़ा और वहाँ से चला गया जैसा की अधिकतर कहानियों में होता है । वो दिन भी आ गया जिस दिन लड़की की शादी थी । लड़की मंडप पर बैठी रो रही थी और सामने अचानक से लड़का बैठा हुआ दिखा । लड़की का दिल धक्क से रह गया । अब वो क्या करे ? बाप की पगड़ी।संभाले या अपना प्यार । लड़का सामने उसी की पसंदीदा ब्लैक शर्ट ब्लू जींस पहने बैठा था । कपड़ों और चेहरे पर मिट्टी लगी थी जैसे गिरा हो कहीं से । पर लड़का मुस्कुरा रहा था । लड़की क्या करूँ क्या ना करूँ वाली उधेड़ बुन में थी । 
अब तक जो हुआ वो लगभग हर कहानी में होता है मगर अब जो होने वाला था वो किसी कहानी में नही होता मगर इस कहानी में हुआ । लड़की की बहन दौड़ती आई और लड़की के कान में बोली की जो लड़का तुमसे प्यार करता था वो अब इस दुनिया में नही रहा । थोड़ी देर पहले ही उसने दम तोड़ दिया । इतना सुनते ही लड़की की आँखें फटी रह गईं दिल की गति धीमी।हो गई और देखते ही देखते लड़की बेहोश । आँख तब खुली जब लड़का ने अपनी गोद में सर रख कर उसे जगाया । आँखे खुलते वो देखती है सामने कोई नही।है बस लड़का और वो हैं पंडाल खाली है । लड़का मुस्कुराता है और कहता है " कहा था ना तुम गई तो ये ज़िंदगी भी मेरी ना रहेगी । देखो  मैने वादा निभाया और तुमको ये भी कहा था ना की जितनी शिद्दत से याद करोगी उतना साफ और पास दिखूँगा हमेशा । अब तुम खुश रहना मुझे भूल जाना तुम्हे मुस्ईउराता देखना ही सबसे बड़ी खुशी है मेरे लिए । यकीन करो मैने खुद को नही मारा बस होनी को रोक नही पाया । लाख हिम्मत दिखाने के बाद भी नही रोक पाया । " लड़की चाह कर भी कुछ बोल नही पाई बस रोती रही । अब तक वो बेहोश थी जब होश आया तो हाॅस्पिटल में थी । लड़का अभी भी सामने बैठा रो रहा था । शायद उसे लड़की को इस हाल में देख कर तकलीफ हो रही थी । 
उसके बाद लड़की ने ये फैसला कर लिया की वो शादी नही करेगी कभी । हमेशा उस लड़के की सोच के साथ रहेगी और उसके साथ देखे सारे सपने जिएगी । लड़की के घरवालों ने बहुत कोशिश की हर तरह से मार कर डाँट कर समझा कर मगर लड़की नही मानी । कुछ वक्त बाद घर छोड़ दिया । दूर शहर में नौकरी करने लगी और लड़के की सोच के साथ अपनी ज़िंदगी बिताने लगी । लोग उसे पागल समझते मगर वो खुश है ऐसे जैसे लड़का उसके ही साथ हो । बस एक कमी है की लड़का उससे बात नही कर सकता बस उसे दिखता है और अपनी बात अपने चेहरे के भावों से लड़की को समझाता है । लड़की आज भी उससे वैसे ही।बात करती है प्यार करती है जैसे वो सामने हो । और ऐसा इसलिए है क्यों की उसके लिए वो लड़का सामने ही है और  हमेशा रहेगा । " 
परिधी की कहानी खत्म हो गई थी मगर शोभित के आँसू खत्म होने का नाम ही नही ले रहे थे । उसने परिधी की माँ के कमरे की तरफ देखा और उठ कर उधर बढ़ा । दरवाजे की ओट से अंदर झांकने पर उसने देखा की परिधी की माँ ऐसे बैठी मुस्कुरा रही हैं जैसे किसी के कंधे पर सर रखा हो । वो वापस परिधी के पास आया और पूछा की "तुमने किसी डाॅक्टर से नही  दिखाया इन्हे ? "
" मैं क्यों दिखाऊँ इन्हे किसी डाॅक्टर को ये ठीक हैं सब बढ़िया है । जाॅब करती हैं लोगों से अच्छे से मिलती हैं सबकी मदद करती हैं । सब ठीक है तो डाॅक्टर से बस इसलिए दिखाऊँ की इन्हे इतना बड़ा सदमा सह कर भी एक खुशी के छलावे में खुश रहने की आदत है ? समाज परिवार ने इन्हे पापा से अलग कर दिया अब जब ये उनके अहसास उनकी सोच में खुश हैं तो मैं इनकी खुशी छीन लूँ ? " शोभित कुछ बोल नही पाया बस इतना पूछा की अगर " शादी नही हुई तो फिर तुम ? "
" गोद लिया है मुझे । अनाथ थी मैं । बेसुध सी दुनिया के रंगों से अंजान बस तीन साल की । जब ज़िंदगी का एक घिनौना सच मेरे सामने आने वाला था शायद एक भिखारिन एक बज़ारू या फिर ना जाने किस रूप में तब माँ ने गोद में उठा कर अपना नाम दिया मेरी किस्मत का लिखा बदल दिया और कमाल ये है की इस बात का पता मुझे खुद कुछ सालों पहले ही चला । खैर अब देर हो रही है निकलना होगा चलो । " शोभित बस परिधी को देखता रहा । परिधी उठी और माँ के कमरे में चली गई । 
" जा रही हूँ माँ शाम को मिलती हूँ । हाँ जल्दी आजाऊँगी । तुम पापा के साथ कहीं घूम आना । आशीर्वाद दो दोनो मुझे की मेरा शो हिट जाए । लव यू टू । बाय माँ बाय पापा । " 
धीरज झा 

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