सहो तो कहो मत

​सहो तो कहो मत  कहीं देखा एक किस्सा याद आगया । घर में नई बहु आई, बाप के दिए संस्कारों से लदी किसी से ज़्यादा बोलना नही , कोई कुछ कहे सुन लेन...

​सहो तो कहो मत 
कहीं देखा एक किस्सा याद आगया । घर में नई बहु आई, बाप के दिए संस्कारों से लदी किसी से ज़्यादा बोलना नही , कोई कुछ कहे सुन लेना । मगर शराफत का ज़माना कहाँ है । जितना वो सूस्कार और शराफत दिखाती ससुराल वाले उतना सर चढ़ जाते । सास की टोका टोकी, पति का दबदबा सब बढ़ने लगा । लड़की की हालत टोटली खराब । क्या करे ? पिता से कहा तो समझा दिया गया तुम्हारा घर वही है अब वहाँ रहने की आदत डालो । लड़की तंग हो गई क्योंकी अब तो बेवजह हाथ भी।उठने लगे । एक दिन पता नही क्या हुआ लड़की के सर भूत सवार हो गया । करो या मरो वाली फोर्म में आगई । पहले तो माँ समान सास का सतकार किया झाड़ू से पति आया और भड़का तो पति पर भी बेलन चला मारा और ऐसे होगई जैसे सच में भूत आगया हो उसके ऊपर । अगले दिन से पति अच्छे से समझाने लगा सही से बात करने लगा । सास की रोक टोक बन्द हो गई । उसके बाद जब भी।कुछ ऐसा होता वो अपना रूद्ररूप दिखा देती । सब सीधे हो जाते । हालात के हिसाब से खुद को बदलना पड़ता है । 
अब आगे की बात
 "सर एक बहुत गंदी फीलिंग आती है जब कोई ऐसे छूता है । किसे अच्छा लगता है कोई उसे छूए, ज़बरदस्ती " ये सिर्फ पिंक फिल्म में मीनल नामक किरदार के बोल नही हैं ये बोल है उस हर लड़की के जिसे कभी ना कभी कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरीके से छूआ उसके ही किसी दोस्त रिश्तेदार या ऑटो बस ट्रेन में किसी ग़ैर ने मन में ये मंशा ले कर की क्या पता मान ही जाए । लड़की के भड़काऊ कपड़े ( जैसे सब कहते हैं ) पहने हों तो लड़की चालू है । भई ये समझाओ चालू मने है क्या ? अच्छा मने जो सबके साथ चल दे वो चालू , है ना ? फिर तो झोंपड़ी के तुम महाचालू हुए जो ऐसी लड़की जिसे तुमने स्पैशल नाम दे रखा है जो तुम्हारी नज़र में गिरी है उसके साथ भी इधर उधर करने को मरे जा रहे हो । 
ये जो बात चलती है ना आए दिनों की लड़कियाँ अकेली ना रहें छोटे कपड़े ना पहनें दारू ना पीऐं ये सब सही है एक दम सही । लड़कियों को ऐसे ही रहना चाहिए पर इसलिए नही की उससे उनके चरित्र पर असर पड़ेगा बल्कि इसलिए की गोश्त को सूंघते जंगली कुत्ते हर जगह घूम रहे जो इन लड़कियों को देखते लार टपकाने लगेंगे । लड़कियों को अपने बचाव के लिए ऐसे कपड़ों ऐसे माहौल से बचना चाहिए । क्योंकी बाद में लड़के की गलती नही मानी जाएगी । भई क्यों मानी जाए हम लड़के हैं हम तो पैदा ही गलतियाँ करने के लिए हुए हैं । जवानी का जोश हम पर ही आता है और हो जाती हैं गलतियाँ । भुगतो तुम सारी ज़िंदगी उस घिनौनी छुअन को याद कर कर के । हमने तो मज़े लिए और निकल लिए । पर तुमने छोटे कपड़े पहने थे ना अब भुगतो । नही तो एक चाकू रखो पर्स में और जो कोई ऐसा करे उसके ऐसी जगह घुसेड़ो की जब जब बैठने की कोशिश करे तो याद आए की किसी को ज़बरदस्ती छूने की कोशिश की थी ।
जंगल में रह रही हो तो जंगल के कानून को अच्छे से समझ लो यहाँ हर झाड़ी के पीछे भेड़िया छुपा है जो तुम्हारे इन धरनों और हो हल्ले से डरने वाला नही । दो रास्ते हैं तुम्हारे पास या तो घर में दुबक कर बैठो या लड़ना सीखो । खुद को किसी के बराबर बता कर तुम अपने स्तर को गिरा देती हो जो असल में सबसे ऊँचा है । किन्ही दस बीस को अगर वो सज़ा मिल जाए तुम्हारे हाथों जिसे देख कर रूह काँप जाए किसी की भी फिर देखो तमाशा कैसे तुम्हे छूने से डरते हैं । फिर तुम्हे ना कहना ही नही पड़ेगा । क्योंकी तुम्हे छूने की कोई हिम्मत ही नही करेगा । अगर तुम सह रहे हो तो तुम्हे बोलने का हक़ नही । लड़ रहे हो तो बोलने की ज़रूरत ही नही ।
बाकी तुम्हारी मर्ज़ी मन हो तो मानो नही गरिया कर चल दो । जय हिन्द
धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : सहो तो कहो मत
सहो तो कहो मत
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