जिऊतिया

​जिऊतिया साल क्या बदला साथ साथ बहुत कुछ बदल गया । पिछले साल एगो पोस्ट लिखे थे इसी दिन । पूरा वृतांत सुनाए थे की कईसे माँ।को जगाने के लिए पूर...


​जिऊतिया
साल क्या बदला साथ साथ बहुत कुछ बदल गया । पिछले साल एगो पोस्ट लिखे थे इसी दिन । पूरा वृतांत सुनाए थे की कईसे माँ।को जगाने के लिए पूरा रात नही सोए कईसे पापा का दिमाग चाटे कईसे छोटका सब से लत्तम जुत्तम किए आऊर कईसे बईठ भोरबे में दही चिऊड़ा चाँपे । उन विकट दिनों में जब पापा की बिगड़ती तबीयत हर रोज़ कल से ज़्यादा परेशान कर जाती थी तो कईसे एक बहाना ढूँढे थे खुस होने का । 
साल बदल गया साथ में बहुत कुछ बदल गया सबसे बड़ा बदलाव पिता का होने से ना होने तक का सफर, दूसरा जगह बदल गई तीसरा हम बदल गए । मगर माँ नही बदलीं ना वो कभी बदलेंगी । वो आज भी अपने सारे दुख भुला कर भोर में 3 बजे उठी होंगी । पिढ़िया पर खीरा अंकुरी सब रख के पितर सब को बुलाई होंगी और हम तीनों के लिए वही हर साल वाली खुशियाँ मांगी होंगी इस साल तो और ज़्यादा मन से मांगी होंगी । दूध की जली हैं ना हाल ही में छांछ को फूकना तो बनता है । फिर दोनों को दही चिऊड़ा खिलाया होगा और मुझे बहुत ज़ोर से याद किया होगा । सारा दिन भूखी प्यासी रही होंगी बस इसीलिए की लाल उसके खुश रहें । 
माँ से बड़ा स्वार्थी प्राणी मैने कहीं नही देखा आज तक बताओ एक ममता के स्वार्थवश जान तक की परवाह नही करतीं ये भी नही सोचती।की अगर उसे कुछ हो गया तो उसके बच्चों पर क्या बीतेगी । शायद ये समझने के लिए माँ होना ज़रूरी है । 
खैर अब शाम हो गई पूजा का समय हो गया पूजा हो गई । तब माँ से रहा नही गया सोचीं जब इक्कीसवीं सदी में आगए हैं जब टेक्नालोजी हाथ में है तो पूजा में कमी काहे करें । बस फिर का मिला दीं फोन । वो जानती हैं मैं ऑफिस में होता हूँ काम होता है इसीलिए फोन करते ही बोलीं " जानते हैं तुमको डिस्टरब किया मगर आज जिऊतिया है पूजा कर रहे थे तुम वहीं से गोड़ लाग लो । " हमको भी खट से याद आया आज जिऊतिया है हम मुस्कुराए माँ की ममता पर और माथा टेका । माँ भी उधर से बुदबुदाती रहीं " हमर लईका के खुस रखिहा, खूब आगे बढ़ईह , हर आफत बीपत से बचईह । " फिर खुद ही बोलीं " ठीक अब फोन रखो शाम को बतिआना । हम भी फोन रख दिए । 
मगर आज जो पितर सब को गोड़ लागे उसमें यही।माँगे की " हे पितर सब जानते।हैं तुम्हारे पास औलाद को बचाने का पावर होगा शायद अही ला पिछला बेर जब पापा को ठीक करने को कहे थे तो तुम लोग सुने नही पर अब हमार प्राथना सुनों हम पिता खो दिए पर हमारी माँ को कभी कुछ होने ना देना । माँ ही है जेकरा सहारे हम सब टिके हैं उसको कुछो हुआ त सही नही होगा । बाकी ई धमकी नही बस एगो डेराएल बेटा के मन से प्राथना है । बस माँ को ठीक रखना । " 
बाकी सब तो ठिके है बस पापा इन मौकों पर आम दिनों से ज़्यादा याद आते हैं क्योंकी उनको इन सब त्योहारों का बहुत शौख था । खैर मालिक सारी माँओं को सलामत रखें इन्ही के दम पर हम हैं । 
बाकी लभ यू भेरी मच माँ 

तोहार बेटबा 
धीरज झा 

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