​मेरी आस्था मेरी संतुष्टि मेरी मर्ज़ी (करवाचौथ)

" क्या यार फिज़ूल का काम तुम सब करती हो और ये महिला मोर्चे वालियाँ गालियाँ हम मर्दों को सुनाती हैं । अब भी मना कर रहा हूँ मत करो ये व...

" क्या यार फिज़ूल का काम तुम सब करती हो और ये महिला मोर्चे वालियाँ गालियाँ हम मर्दों को सुनाती हैं । अब भी मना कर रहा हूँ मत करो ये व्रत व्रूत, कुछ नही।होता इन सबसे । माँ तो हर साल पूरी पिष्ठा से रखती थीं पर पापा की उम्र तो लम्बी नही हुई, छोड़ गए हमें अकेला । पहला व्रत है तुम्हारा हालत खराब हो जाएगी मान जाओ मेरी बात ।" अंश अंशू को ना व्रत रखने के लिए पूरा ज़ोर लगा रहा था । मगर अंशू थी कि उसकी एक सुनने को तैयार नही थी । बस कल की व्रत की तैयारियाँ करते हुए उसकी बातों पर बीच बीच में मुस्कुरा देती ।

" यार तुम इंसान ही हो महसूस तो होगी ही भूख और मैं तुम्हे किसी तरह कि तकलीफ़ में नही देख सकता । प्लीज़ मान जाओ, छोड़ दो ज़िद अपनी । नई साड़ी आई है गहने आए हैं सब पहनों खाओ पीओ ऐश करो क्या तुम इन फालतू के आडम्बरों में पड़ी हो ।" अंश की इस बात ने अंशू के दिल पर चोट कर दी उसे लगा कि अगर अब भी वो चुप रही तो अंश समझेगा कि वही सही है और ये सब सच में आडम्बर ही है ।

" सुनों अंश मैं जो भी कहूँगी सब ध्यान से सुनना । ये जो व्रत है ना ये हम भारतीय औरतों की आस्था से जुड़ा है । हम पर किसी का ज़ोर नही है । हम औरतें ये अपनी खुशी और संतुष्टि के लिए करती हैं । तुम्हे और तुम जैसों को क्या लगता है सारा घर गृहस्ती का हिसाब रखने वाली आज की पढ़ी लिखी औरत इतनी मुर्ख है कि ये भी ना समझ पाएगी कि एक दिन भूखा रहने से उसके पति की उम्र 100 साल नही होगी । अगर ऐसा होता तो भारत की आबादी अभी के मुकाबले ना जाने कितनी ज़्यादा होती । एक एक व्रत का हिसाब भी जोड़ा जाए तो मर्द लोग सैंकड़ो साल तक जीते और जिनकी पत्नियाँ नही होतीं वो जल्दी ही मर जाते । हमें इतनी समझ है अंश मगर हम फिर भी करते हैं ये व्रत क्योंकि हमें अच्छा लगता है । आज तो माना के बंदिश हो सकती है मगर हम लड़कियाँ तो शुरू से माँ की देखा देखी रखती आ रहे हैं ये व्रत । तब तो हमें ये पता भी नही था कि हमारा जीवन साथी होगा कैसा और कौन । हमने हमेशा से ये सब अपनी संतुष्टि के लिए ही रखा है । और जहाँ तक रही माँ कि बात तो कल मैने माँ से पूछा कि "माँ आपको कभी भगवान पर गुस्सा नही आया कि आपने पापा के लिए इतने व्रत रखे मगर फिर भी ऐसा हो गया । " तो पता है माँ ने क्या कहा ? माँ ने कहा "बेटा जीवन मरन उस परमात्मा के हाथ में है हम तो ये बस अपनी संतुष्टि के लिए ये सोच कर करते हैं कि कहीं कोई अनहोनी हो तो हम खुद को ही ना कोसते मर जाऐं कि हमने एक व्रत तक नही किया । यहाँ सबको आज़ादी है जिसका मन है वो करे जिसका नही वो ना करे । बाकि रही बात महिला मोर्चा कि तो उनको कभी किसी बलात्कारी के घर धरना देते नही देखा कभी किसी के ऊपर हो रहे ज़ुल्म को रोकते या उसके खिलाफ आवाज़ उठाते नही देखा । बस त्यौहारों पर उनका मुंह खुलता है ।" अंशु जब बोलना शुरू हुई तो बोलती ही गई और अंश मुंह ताकता रह गया उसका । अंश यह सोच कर हैरान था कि माॅडर्न सी अंशू के मन में ऐसे ख़याल कैसे । मगर शायद वो भूल गया था कि वो भले कितनी मार्डन हो मगर दिल से भारतीय पत्नी ही रहेगी ।

उसके बाद अंश कुछ ना बोला उल्टा अंशु का हाथ बटाने लगा । सुबह सुबह सर्गी के लिए अंशु को ज़बरदस्ती उठा कर खाना भी खिलाया । सारा दिन अंशु को एक काम नही करने दिया । हाँ बीच बीच में उसे चिढ़ा ज़रूर देता ये कह कर कि "बहुत भूख  लगी है बई मैं तो बाज़ार से कुछ खा के आता हूँ बढ़िया सा साथ में आईसक्रीम भी खाऊँगा" और इस पर अंशु मुस्कुरा देती । ऐसे ही दिन बीत गया और रात को चाँद का इंतज़ार करते करते चाँद भी दिख ही गया आखिर । अंशु ने अंश के साथ व्रत की सारी रस्में निभाईं उसके बाद अंश ने अंशु के लिए खाना परोसा और उसे अपने हाथों से खिलाने के लिए निवाला अंशु के मुंह की तरफ बढ़ाया पर अंशु ने वो निवाला अपने  हाथों में ले कर अंश के मुंह की तरफ बढ़ाते हुए कहा " पहले आप खाओ, जानती हूँ सुबह से कुछ नही खाया मेरे साथ व्रत रहे हो ।"

अंश झूठ को छुपाते हुए बोला " नही तो मैं भला क्यों व्रत रहूँगा ? मुझे ज़रूरत नही ये तो पत्नियाँ रखती हैं । और तुमने नही देखा मैं बाज़ार गया था कुछ खाने ।

" हाहाहाहाहा, आपको झूठ बोलना भी नही आता । मुंह देखो सूख गया है एक दम । जानती हूँ बाहर बस मेरे लिए आईसक्रकीम लेने गए थे । चार बार आपको कहा आप खाना खा लो आपके पसंद की सब्जी बनी है मगर आप टाल गए । अब बनों मत खाना खा लो । बड़े आए हुंह ।" अंश झेंप गया । शर्माता हुआ निवाला खा लिया और अंशु को खाना खिलाया ।
समाप्त
बाकि कुछ कहने की मुझे ज़रूरत नही है । जो कहना था अंशु कह गई ।

सभी माताओं बहनों और मेरी होने वाली उसको करवाचौथ पर्व की शुभकामनाएं । भगवान आपको भूख प्यास सहने की शक्ति दें ।

धीरज झा

Web Title: Hindi Story, Love Story, Karwachuth, Fasting, My Life My Choice 

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क़िस्सों का कोना : ​मेरी आस्था मेरी संतुष्टि मेरी मर्ज़ी (करवाचौथ)
​मेरी आस्था मेरी संतुष्टि मेरी मर्ज़ी (करवाचौथ)
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