पापा के नाम एक और चिट्टठी

​पापा आपके लिए चिट्ठी है, कितने दिनों से नही लिखी थी ना । पढ़िएगा ज़रूर और आशीर्वाद दीजिएगा अपने नालायक बेटे को । प्रणाम पापा  कैसे हैं पापा...

​पापा आपके लिए चिट्ठी है, कितने दिनों से नही लिखी थी ना । पढ़िएगा ज़रूर और आशीर्वाद दीजिएगा अपने नालायक बेटे को ।
प्रणाम पापा 
कैसे हैं पापा आप ? उम्मीद है बहुत अच्छे होंगे । मैं भी ठीक हूँ, बाकी आप तो जानते ही होंगे कितना ठीक हूँ । अपना हर कदम कैसे उठा रहा हूँ ये भी जानते होंगे, वक्त और हालत इसकी इजाज़त नहीं देते मगर मुझे बढ़ना है मैं सारी  ज़िन्दगी यहीं खड़ा नहीं रह सकता । परिस्थितियां जंजीरों की तरह पैरों में जकड़ी हुई हैं । मगर आपके बेटे ने हार नहीं मानी कभी और ना कभी मानेगा । कल रात आप आए थे और बिना कुछ बोले सर पर हाथ फेर कर चले भी गए । मैं कितना कुछ बोलना छह रहा था मगर पता नहीं क्यों बोल ही नहीं पाया । सुबह उठा तो आप गायब थे । या ऐसा कहूँ कि मुझे दिख ही नहीं रहे थे । 
जानते हैं पापा, जैसा भी है सब ठीक है, मेरे साथ बहुत अच्छा पहले रहा ही कब है मगर मैं ठीक हूँ, एक कमी है तो बस आपकी, पापा आपके बाद बहुत अकेला हो गया हूँ, जब हिम्मत हरने लगता हूँ तो कोई आपकी तरह समझाने वाला नहीं होता ये कह कर कि “तू चिंता क्यों करता है मैं हूँ ना ।” अब मुझे आपका ना होना चिंता करने पर मजबूर कर देता है । इतनी बड़ी भीड़ में अकेला होगया हूँ । आपके होने से हिम्मत थी एक ताक़त थी, ये सोच कर कि पापा हैं ना । मगर अब, अब तो बस खुद को खुद ही समझाना है खुद को खुद ही बहला लेना है । माँ को भी कितना परेशान करूँ । वो तो खुद ही बड़ी मुश्किल से खुद को सम्भाले हुई है । 
खैर ये सब तो चलता ही रहेगा, आप तो जानते हैं मैं जिद्दी हूँ पहले कब हारा था जो अब हरूँगा । आपको याद है एक बात आप मेरे एक जानने वाले के सपने में अचानक से आए थे । उनका नाम नहीं लूँगा मगर वो पढ़ रहे होंगे तो उस दिन को याद कर के मुस्कुराएंगे । आपने उनसे कहा था कि “धीरज को कहना वो हिम्मत न हारे उसे बहुत आगे तक जाना है ।वो अच्छा लिखता है ।” पापा मैंने उसी दिन मन बना लिया था किताब लिखूंगा और एक नहीं बहुत सी किताबें लिखूंगा । उसकी शुरुआत मैंने कर दी है । आपको तो पता ही होगा मैं तो बस अपनी तरफ़ से आपको बता रहा था । कभी जा कर देखिएगा, माँ जो कभी कुछ पढ़ती नहीं थी वो अब रोज़ किताब की एक कहानी पढ़ती है और वो चिट्ठी तो वो हमेशा पढ़ती है जो मैंने आपको लिखी थी । एक कहानी जो मैंने उस औरतों पर लिखी है जो समाज द्वारा नकारी जा चुकी है, उसे पढ़ कर तो माँ ने कहा बेटा इतना सब सोचा कहाँ से और सोचा तो महसूस कैसे कर लिया । माँ का ऐसा सवाल करना मुझे ख़ुशी मुझे अन्दर से खुश कर देता है कि माँ मेरे किए से मेरे लिखे से हैरान है, उसे ख़ुशी हुई है ये जान कर कि उसका ज़िद्दी बेटा थोड़ा समझदार भी है । बस दुःख इतना है कि आप होते तो आप भी अन्दर ही अन्दर कितना खुश होते, सामने से तो आपने कभी कुछ कहा नहीं मगर जनता हूँ आप माँ से कहते सब । हो सके तो अब भी आ कर कहियेगा उन्हें, बताइयेगा कि आपको कितनी ख़ुशी मिली है । 
ठीक है पापा अब जा रहा हूँ थोडा कम है, आते रहिएगा हमेशा कम से कम तसल्ली रहती है ये सोच कर कि आप यही आस पास ही हैं । बहुत याद आते हैं आप, और हमेशा आते रहेंगे । कबसे आपको चिठ्ठी लिखना छह रहा था मगर अब वक़्त नहीं मिलता । आपका बेरोजगार बेटा अब काम करने लगा है न इसलिए । मगर आज रहा नहीं गया तो लिख दी और सबको पढ़ा दी क्या पता किसके पास जा कर आप मेरी बात कह दो, वैसे आप किसी से भी कह सकते हो सब दोस्त ही हैं वो मुझे बता देंगे । ठीक है पापा अपना ख्याल रखिएगा । और हाँ आज एक नए सफ़र के लिए निकल रहा हूँ हो सके तो साथ चलिए 😊
प्रणाम 
आपका अलग सा बेटा 
धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : पापा के नाम एक और चिट्टठी
पापा के नाम एक और चिट्टठी
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