​#अप्रैल_फूल_बनाया_बड़ा_मज़ा_आया_ (बच्चपन्न के किस्से)

"ओ सारे सुनो आज इंग्लिश वाली मैडम नहीं आई हैं । आज का टेस्ट कैंसिल । करो मौजां ।" नकुल की बात सुनते ही पूरी क्लाॅस में ऐसे खुशी की...

"ओ सारे सुनो आज इंग्लिश वाली मैडम नहीं आई हैं । आज का टेस्ट कैंसिल । करो मौजां ।" नकुल की बात सुनते ही पूरी क्लाॅस में ऐसे खुशी की लहर दौड़ी मानों फांसी की सज़ा मिले कैदी की सज़ा टल गई हो । फिर से वही गप्पें, वही हुड़दंग सब चालू हो गया । इंग्लिश की मैडम के ना आने की इतनी खुशी थी की गणित वाले सर से दो डंडे पड़ना ऐसा लगा सबको जैसे किसी ने फूलों से सहलाया हो । भला कुत्तों जैसे पिटने से अच्छा है इज़्जत के दो डंडे । तीसरी घंटी इंग्लिश वाली मैडम की ही थी । सब जोश से भरे बैंचों पर चढ़ चढ़ कर हुड़दंग कर रहे थे ।  सबको ऐसे खुश देख नकुल को याद आ गया था कि उसके पापा कैसे खुश हुआ करते थे जब उसकी मम्मी मायके जाती थी तब । मगर नकुल सबसे आगे की बैंच पर किताब खोले बैठा था, इतनी बड़ी खुशी के आगे किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि नकुल सबसे आगे क्यों बैठा है । 
तभी एक भारी भरकम शरीर औरत के लिबास में लिप्टा हुआ क्लाॅस में घुसा मगर किसी का उस दैत्य रूपी मानवी पर ध्यान नहीं गया । कुछ देर तक सब कुछ देखने के उस महिला ने टेबल पर पूरे ज़ोर से हाथ मारते हुए गर्ज कर कहा "साईलेंस" । हिरोशिमा नागासाकी का धमाका इससे थोड़ा कमज़ोर ही रहा होगा । पूरा स्कूल जान गया था कि आज क्लास सात की तो शामत आई है । नंदू की तो इस धमाके से पैंट गीली हो गई जिसका पता सबको बाद में लगा क्योंकि अभी तो सब इस तरह खड़े थे जैसे सामने को प्रेत खड़ा हो । वैसे भी रूपसुंदरी मैडम कोई प्रेत से कम थोड़े ना थीं । उनके डर से बड़ा छोटा हर बच्चा सूखे पत्ते की तरह कांपता था । अगर मायावती बहिन से उनकी मुलाकात हुई होती तो मायावती जी अपने पद पर उन्हें बिठा कर खुद उनके चरणों में बैठ जातीं । 
मैडम ने सबसे पहले आदेश सुनाया कि नकुल को छोड़ कर बाकी सारे लड़के मुर्गा बन जाएं और लड़कियां हाथ ऊपर कर के खड़ी हो जाएं । अब समझ आया नकुल जो हमेशा पीछे बैठता था आज सबसे आगे किताब खोल कर क्यों बैठा था । नकुल मुस्कुराए जा रहा था । मैडम ने लड़कियों के हाथ और लड़कों का पिछवाड़ा अच्छे से सेका । मैडम की पूरी क्लाॅस के दौरान सब ऐसे ही सज़ा काटते रहे । मैडम की क्लाॅस खत्म हुई तब बच्चों ने चैन की सांस ली । मैडम के जाते ही सारी क्लाॅस नकुल की ओर ऐसे बढ़ी जैसे कुत्तों के झुंड ने एक बिल्ली को घेर लिया हो । नकुल के तो पसीने छूटने लगे, घबराता हुआ सबसे बोला "अरे भाई लोग शांति रखो अप्रैल फूल बनाया है बड़ा मज़ा आया है ।" इतना कह कर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा । बाकि सब भी अप्रैल फूल के नाम पर चुप हो गए क्योंकि सब सच में बड़े वाले फूल जो बन गए थे । 
रिसेस की घंटी बजी, नकुल ग्राऊंड में खेल रहा था तभी रमन ने आकर कहा "नकुल इंग्लिश वाली मैडम जी बुला रही हैं तुझे ।" 
"जा जा मैं झांसे में नहीं आता, जानता हूँ अप्रैल फूल बना रहा है तू ।" रमन ने कितनी बार कहा पर वो नहीं गया । रमन के बाद भी चार पांच बच्चे बुलाने आए मगर नकुल ने सबको भगा दिया और मस्ती में खेलने लगा । खेलते खेलते नकुल को अहसास हुआ कि किसी ने उसकी पीठ पर इतनी ज़ोर से छड़ी मारी है, चीखने से पहले उसने पीछे देखा तो इंग्लिश वाली मैडम खड़ी थीं । 
"लाठ साहब हो गए हो, कब से बुला रहे हैं तुमको सुनाई नहीं देता ।" उसके बाद तो नकुल की वो पिटाई हुई कि बेचारा बेहाल हो गया । मैडम जब चली तो क्लाॅस के सारे बच्चे मुस्कुराते हुए आए और बोले "नकुल यार तूने तो अपना अप्रैल फूल खुद बना लिया । वैसे एक बात तो है, नकुल ने अपना अप्रैल फूल बनाया, हम सबको बड़ा मज़ा आया ।" सब बच्चे खूब ज़ोर से हंसने लगे और नकुल बेचारा अपने किए पर ही मुंह बना कर बैठ गया । 

अब भले ही हम अप्रैल फूल का शास्त्रों के मज़हब के या किसी और तरह से बहिष्कार करें मगर हम सब में से बहुतों ने बच्चपन्न में इस दिन की बहुत यादें इक्कट्ठी की हैं  । आज भले ही हम बड़े हो गए हैं मगर उन्हीं छोटी छोटी यादों को याद कर के आप मुस्कुराने के लिए एक दम आज़ाद हैं 😊
धीरज झा

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