"नंद जी" एक कहानी पिता वाली 😊

​आप पिता हैं तो पढ़ें और अगर आप पुत्र हैं तो ज़रूर पढ़ें 😊 "नंद जी" एक कहानी पिता वाली 😊  "मर जाओ ससुर तुम, तुम्हारे जीने क...

​आप पिता हैं तो पढ़ें और अगर आप पुत्र हैं तो ज़रूर पढ़ें 😊
"नंद जी" एक कहानी पिता वाली 😊 

"मर जाओ ससुर तुम, तुम्हारे जीने का कोई फायदा भी तो नहीं । बोझ हो बस, खाओ और पड़े रहो ।" नंद जी ने दोनो हाथ नरेंद्र मोदी स्टाईल में लहराते हुए कहा । 
"एक दिन आपका ये मनसा भी पूरा कर देंगे । आपके इन तानों से अच्छा है मर ही जाएं । जितना खिलाया नहीं होगा उससे ज़्यादा तो आज तक सुना दिया है आपने । अब देश का सिस्टम खराब है नहीं मिलती नौकरी तो हमारा कसूर है क्या ? और हाँ जिस दिन मरे ना उस दिन आंसू मत बहाईएगा ।" बेटा भी राहुल गांधी से कम नहीं था उल्टा ही सही मगर जवाब देना अपना अधिकार मान चुका था ।
"आंसू वो भी तुम्हारे मरने पर । तुम साले प्रायश्चित हो हमारे पापों का, तुमसे पिंड छूटे तो गंगा नहा आएंगे और प्रार्थना करेंगे महादेव से कि किसी को बेऔलाद रख दे पर तुम्हारे जैसी औलाद ना दे ।"
"आप कैसी बातें निकाल रहे हैं बेटे के लिए मुंह से ।" माँ हाई कोर्ट हो गई थीं दोनो तरफ़ की दलीलें सुनते सुनते मगर फैसला तो अब इनके हाथ भी नहीं था बस समझौते की गुहार लगा सकती थीं सो लगा दी ।
"तुम चुप रहो, तुम्हारी छूट का नतीजा है जो ऐसा हो गया है । बाप से ज़ुबान लड़ाता है । ज़ुबान खींच लेंगे इसकी ।"  गुहार तो अब भगवान नहीं सुनता फिर नंद जी तो ठहरे इंसान वो भला कैसे सुन लेते । नंद जी की कड़वी बातों का गुस्सा कमज़ोर पड़ चुके दरवाज़े को सहना पड़ा था । पड़ोसी भी नंद जी का दरवाज़ा पटके जाने से समझ गए थे कि आज फिर बाप बेटे ने महाभारत का अंतिम अध्याय जो लिखा नहीं गया था उसका पाठ शुरू किया है । इस महाभारत की सबको आदत हो गई थी । 
जवान हो रहे बेटे में हर पिता अपना दोस्त ढूंढता है । मगर कितनी भी दोस्ती कर ले रहता तो वो बाप ही है तो भला अपना खानदानी हक़ कैसे छोड़े, क्यों ना बेटे को बात बात पर चार छः श्लोक सुनाए । नंद जी भी अपने बाप होने के दोनो फर्ज़ समय समय पर अदा कर दिया करते थे । असल में नंद जी अपनी धर्म पत्नी को डांटते हुए कह रहे थे ना कि तुमारी छूट से बिगड़ा है वो असल में झूठ था, बेटा तो इनके अपने लाढ़ की वजह से डांट खा रहा था । अभी दो महीने पहले अपनी चौथी नौकरी छोड़ कर आया था और नौकरी छोड़ने की वजह भी नंद जी ही थे । अरे भाई जब तक लोहा चोट नहीं खाएगा तपेगा नहीं तब तक आकार में कैसे आएगा मगर यहाँ तो जब जब बेटा नई जगह गया और थोड़ा सा परेशान हो कर फोन किया नहीं कि इधर से नंद जी आदेश जारी कर देते थे "अरे लात मारो ऐसी नौकरी को, चले आओ घर तुम और कहीं देख लेंगे ।" अब  एक आध महीने नई जगह घूम कर ऐश मौज कर के फिर से घर लौटना भला किस जवान लौंडे को ना भाएगा वो भी जब पिता जी खुद बुला रहे हों । 
कल का पूरा दिन बीत गया फिर रात को खाने की थाली के आगे बैठे नंद जी ने बेमन से पहला निवाला उठाते हुए ना चाहते हुए भी पूछ ही लिया "खाना खाया उसने ?"
"नहीं, कल रात से ही नहीं खाया ।" माँ ने भी बुझे हुए स्वर में जवाब दे दिया ।
"क्या हो गया है तुमको, बुढ़ापे के साथ साथ तुम्हारा काम करने का भी मन नहीं करता ना । ये क्या सब्जी बनाई है ना मसाला सही है ना नमक । ले जाओ हमारा पेट भर गया ।" माँ तो जानती ही थीं कि पति देव को सब्जी क्यों नहीं अच्छी लग रही मगर बाप बेटे के बीच पिस कर खुद इतना थक जाती थीं माँ कि अब पति देव को खाने के लिए मानाओन करने कि हिम्मत ना जुटा पातीं । 
"खाले अब खाना और कितना मुंह फुलाएगा । गुस्सा करने के लिए भी ताक़त लगती है । खून जलाने के लिए खून बनाना पड़ेगा ना और खाने के बिना कहाँ से बनेगा खून । जानता तो है कि तुम दोनों लोग का तो रोज का है तो भला कब तक भुखा रहेगा ।" खाना तो खाना ही था, स्वाभिमान भी तभी तक खड़ा रहता है जब तक पेट भरा हो । भूख के आगे तो बड़े बड़े तानाशाहों ने घुटने टेक दिए तो भला एक दुखी बेटा कैसे ना हारता । 
"पापा खाए हैं ।"
"नहीं बेटा वो बाप हैं तुझ से कुछ ज़्यादा ज़िद्दी तो होंगे ही । सब्जी सही नहीं बनी का बहाना कर के खाना छोड़ के उठ गए ।"
"चलो तो पहिले उनको ही खिलाया जाए ।" अब काम बोलता तो बेटा बाप के सामने तनता भी मगर यहाँ तो काम ही नहीं था तो बोलेगा खाक इसीलिए उसे झुक जाना ही सही लगाता हर बार । वैसे भी बाप बेटे का रिश्ता कुछ ऐसा ही था कि "एक दूसरे की सहेंगे भी नहीं और बिना एक दूसरे के रहेंगे भी नहीं ।" माँ बेटे का अगला स्टाॅपेज नंद जी का कमरा था । हमेशा चलते रहने वाले टी वी को इन दोनों के झगड़े वाले दिन थोड़ा आराम मिल जाता था । नंद जी सुबह से साढ़े बारह बार पढ़ चुके अखबार की तेरहवीं मनाने में खुद को व्यस्त करने की कोशिश में लगे थे । कदमों की आहट सुन ऐसे अशांत मन को झूठी शांती का चोला ओढ़ा कर अखबार में ऐसे खो जाने का नाटक करने लगे जैसे सुबह से पहली बार उठाई हो । बेटा आया पैरों के पास बैठा मगर नंद जी ऐसे जैसे उन्हें दीन दुनिया की खबर ही नहीं । 
"खाना नहीं खाए आप ।" पैर दबाते हुए बेटे ने पूछा । नंद जी का कोई दुश्मन भी उनके पैर दबाने लगे तो शायद उसे भी माफ़ कर दें ये बात बेटा अच्छे से जानता था और हर बार उसके माफ़ी मांगने का तरीका यही होता था ।"
"तुम भी तो नहीं खाए ।"
"तो चलिए खा लिया जाए । माँ को भी सोना होगा । काम निपटा कर सो जाएगी ।" 
"हाँ माँ का बेटे को और बेटे को माँ का ही फिकर है सबसे जादा । हम तो ससुर कुछ हैं ही नहीं ।" हमेशा की तरह नंद जी का इमोसन आँख की पपनियों पर आँसू के रूप में टिक गया और बेटा भले ही नंद जी से बहस कर लेता मगर उनकी आँख में आँसू उसे कभी बर्दाश्त नहीं थे । 
"अरे पिता जी ऐसा मत कहिए । माँ में मेरी जान है तो आप में मेरी आत्मा है और आत्मा रोती है तो शरीर नर्क की सारी यातनाएं एक बार में ही भोग लेता है । और हाँ अब से हमारी बच्चों वाली बहस खत्म । परसों जा रहे हैं दिल्ली, हमको नौकरी मिल गया है और इस बार भागेंगे नहीं अब जिम्मेदारी समझेंगे और मन लगा के काम करेंगे ।" नंद जी के रूके हुए आंसू आखिर शहीदी को प्राप्त हो ही गए मगर अंदर ये पीड़ा के थे पर बाहर आते आते तक खुशी के हो गए । दोनों बाप बेटे ने खाना खाया और जिस तरकारी के लिए अपनी घर्मपत्नी पर भड़के थे उसी की तारीफ़ करते नहीं थक रहे थे अब । माँ ये सब देख चुपचाप मुस्कुरा रही थी । बेटा छोटा था तो उसे एक ही बच्चे को पालना पड़ता था मगर पति जैसे जैसे बुड़ापे की तरफ़ बढ़ रहे वैसे वैसे माँ दो बच्चों को सम्भालने लगी थी, ये तो शायद सभी माँओं के साथ होता है । 
बेटे के साथ वाली तो सुन ली बेटे के बाद वाली फिर कभी 😊 अच्छी लगे तो शेयर कर दें 
धीरज झा

COMMENTS

BLOGGER: 1
Loading...
Name

अन्य रचनाएँ,1,अलविदा,5,इश्क़ वाली कहानियां,14,कल्पनाएं,1,कविता,112,कहानियों का कोना,30,कहानी,121,किश्तों वाली कहानियाँ,5,किस्से गाँव के,14,ख़ास लोग,2,खुशियाँ,39,ख़्वाहिशें,2,गज़ल,31,चलते फिरते बस यूं ही,2,चिट्ठियाँ,22,जय जवान,11,तड़प मेरी तुम्हारे लिए,72,दु:ख,16,दुख,45,नमन,3,पापा के लिये,26,पुराने किस्से,3,प्रतिभा की दुनिया,2,फिल्म समीक्षा,3,बस यूं ही,27,बातें काम कीं,59,माँ,18,युवाओं की बात,1,रात के किस्से,6,लघु कहानी,8,लेख,149,वैश्विक,1,व्यंग,35,शायरी,30,सिनेमा,1,सिर्फ तुम्हारे लिये,63,हास्य कथा,1,
ltr
item
क़िस्सों का कोना : "नंद जी" एक कहानी पिता वाली 😊
"नंद जी" एक कहानी पिता वाली 😊
क़िस्सों का कोना
http://www.qissonkakona.com/2017/04/blog-post_45.html
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/2017/04/blog-post_45.html
true
3081115015472439889
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy