याद रहे कोई भी धर्म या नफ़रत इंसान की ज़िंदगी से बड़ा नहीं

​याद रहे कोई भी धर्म या नफ़रत इंसान की ज़िंदगी से बड़ा नहीं  सुना है अलवर में गौतस्कर बता कर एक पशु व्यापारी की हत्या कर दी गई । कुछ लोग खुश ...

​याद रहे कोई भी धर्म या नफ़रत इंसान की ज़िंदगी से बड़ा नहीं 
सुना है अलवर में गौतस्कर बता कर एक पशु व्यापारी की हत्या कर दी गई । कुछ लोग खुश हैं कि गौ वध करने वालों की संख्या से एक कम हुआ, कुछ लोगों के लिए ये शर्मनाक हादसा है । जिनके शर्मिंदा होने वाले पोस्ट आ रहे हैं उनसे खुशी की लहर वाला खेमा सवाल दाग रहा है कि क्या डाॅ नारंग का भीड़ द्वारा हत्या किया जाना सही था ? भई सवाल भी जायज है । मगर जायज नाजायज की बात से परे मैं एक बात पूछना चाहूँगा "क्या जब डाॅ नारंग की हत्या हुई तब पूरा मुस्लिम समाज खुश था ? अगर आप सच्चे मुस्लिम हैं तो ये बता दें कि अगर आप वहाँ होते और कोई आपके सामने दम तोड़ रहा होता आपको उसका नाम भी ना पता होता तो क्या आपकी आँख में उसकी मौत को ले कर एक आँसू भी ना आता ? अगर आप ईमान के पक्के हैं तो सच बताईए क्या आप बेकसूर डाॅ नारंग के हथियारों को कभी माफ़ कर पाएंगे ? 
दूसरी तरफ़ जो हिन्दू पहलू खान का मरना सही बता रहा है वो एक मिनट मरने वाले का नाम भूल जाए और गीता को ध्यान में रख कर उसकी कसम खा कर कहे कि क्या आप इस तरह भीड़ में किसी को शर ए आम पीट पीट कर मार देने का समर्थन करते ? क्या आप वहाँ होते तो इंसानियत के नाते उसकी मदद करने की ना सोचते ? क्या आप उन हत्यारों का साथ देते ? नहीं जनाब आप में से कोई ऐसा नहीं करता । क्योंकि आप कमाने खाने वाले लोग हैं । आपका परिवार है और आपको अपने परिवार के लिए ही सही मगर अपनी फिक्र है और अगर आपको अपनी फिक्र है तो दूसरे के जान की कीमत भी आप अच्छे से समझते हैं । बात बस इस नाम की है कि वो नारंग था वो अखलाक था और ये पहलू है । सियासत ने जो नफरत आपके मन में भरी है  उसने तो शेक्सपियर को भी झूठा साबित कर दिया । आपके लिए तो नाम में ही सब कुछ रखा है । 
ये सभी हत्याएं चाहे वो हिंदू की हो या मुस्लमान की ये सब भीड़ ने की है उस भीड़ ने जो सियासत के रंग में रंगी हुई होती है आम जनता कभी ऐसा नहीं करती उसे तो अपनी परेशानियों से फुर्सत नहीं । आप सब इसी सियासत के मारे हुए हैं वरना असर ज़िंदगी में किसी की जान की अहमीयत आप दोनों को पता है । आप एक भीड़ को किसी भी धर्म का नाम दे कर उस पूरे धर्म को उस घटना का दोषी ठहरा देते हैं जबकि आपको भी पता है यहाँ इतनी हत्याएं आपके आस पास ही हो गई हैं सब आपके विरोधी कहे जाने वाले धर्म के लोगों ने तो की नही हैं । यहाँ तो एक छत के नीचे दो भाईयों में एक संत तो दूसरा हैवान निकल आता है फिर अगर धर्मों में कुछ हैवान बन गए तो उस धर्म का क्या कसूर । 
अगर आपको अपने धर्म की इतनी परवाह है तो नफ़रत से अच्छा है अपनी आने वाली नस्लों को सुधारिए उन्हें इंसान बनाइए । भीड़ का हिस्सा मत बनिए खुद से सोचिए नहीं तो यहाँ हर रोज़ आपके और आपके धर्म के नाम पर डाॅ नारंग और पहलू खाँ जैसी हत्याएं की जाएंगी और एक दिन आप देखेंगी आपने अपने ही घर को उजाड़ दिया । कोई सेकुलर वाली बात नहीं कर रहा मैं बस एक इंसान वाली बात कह रहा हूँ । हिंदू हूँ और उस नाते कुछ लुहेड़ों की करनी के कारण किसी धर्म को बदनाम होते नहीं देख सकता चाहे वो किसी का हो । आप भी अगर सच्चे मुस्लमान होंगे तो तो ऐसा कभी नहीं चाहेंगे । 
कोई भी धर्म कोई भी नफ़रत इंसान की ज़िंदगी से ज़्यादा कीमती नहीं हो सकती क्योंकि जिसके नाम पर आप कोई किसी की ज़िंदगी छीन लेता है वह ज़िंदगी मेरे भगवान और आपके अल्लाह की सबसे प्यारी और नायाब कारीगरी है ।बाकि अपनी अपनी सोच है यहाँ बेटा बाप की सुनने के लिए बाध्य नहीं तो भला मेरी क्या औकात जो कहूँ कि मेरी बात ज़रूर मानिए । हाँ पर यदि आप ऐसी ही सोच के तले रहना चाहते हैं तो सड़क पर ध्यान से निकलें क्या पता कब कौन सी भीड़ मिल जाए आपको और भीड़ का क्या पता बिना पूछे ही आपको परलोक पहुंचा दे ।
धीरज झा

COMMENTS

Name

अन्य रचनाएँ,1,अलविदा,5,इश्क़ वाली कहानियां,15,कल्पनाएं,1,कविता,114,कहानियों का कोना,30,कहानी,124,किश्तों वाली कहानियाँ,5,किस्से गाँव के,14,ख़ास लोग,7,खुशियाँ,39,खेल कहानियां,4,ख़्वाहिशें,2,गज़ल,31,चलते फिरते बस यूं ही,2,चिट्ठियाँ,22,जय जवान,11,तड़प मेरी तुम्हारे लिए,72,दु:ख,61,नमन,4,पापा के लिये,27,पुराने किस्से,3,प्रतिभा की दुनिया,2,फिल्म समीक्षा,3,बस यूं ही,27,बातें काम कीं,60,बिहारनामा,2,माँ,18,युवाओं की बात,2,रात के किस्से,6,लघु कहानी,8,लेख,151,वैश्विक,1,व्यंग्य,35,शायरी,30,सिनेमा,1,सिर्फ तुम्हारे लिये,63,हास्य कथा,1,
ltr
item
क़िस्सों का कोना : याद रहे कोई भी धर्म या नफ़रत इंसान की ज़िंदगी से बड़ा नहीं
याद रहे कोई भी धर्म या नफ़रत इंसान की ज़िंदगी से बड़ा नहीं
क़िस्सों का कोना
http://www.qissonkakona.com/2017/04/blog-post_8.html
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/2017/04/blog-post_8.html
true
3081115015472439889
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy