दु:खी कहानी का मुस्कुराता अंत (युवाओं की कहानी)

​#संडे_स्पैश्ल दु:खी कहानी का मुस्कुराता अंत (युवाओं की कहानी) आज सब कुछ वैसे ही था आम दिनों की तरह ही, जैसे कि वक्त के बदलते रहने की फिदरत ...

​#संडे_स्पैश्ल
दु:खी कहानी का मुस्कुराता अंत (युवाओं की कहानी)
आज सब कुछ वैसे ही था आम दिनों की तरह ही, जैसे कि वक्त के बदलते रहने की फिदरत को चुनौती दी जा रही हो। पार्क में बारी बारी से नन्हें बच्चों का आना वैसा ही था, पार्क के ठीक बाहर उस आईसक्रीम वाले की घुटनों से घिस चुकी पैंट का रंग हमेशा की तरह हरा ही था और उसके पास ट्यूश्न से लौट रहे बच्चों का जमा होना वैसे ही था । घूंघराले वालों वाला वो प्यारा सा बच्चा हमेशा की तरह अपनी माँ को वैसे ही पीछे पीछे दौड़ा रहा था जैसे उसने ठान लिया हो कि अब वो मम्मी के अनफिट ड्रेसों को फिटिंग में ला कर ही छोड़ेगा । मेरे पड़ोस का वो अरूण आज भी हमेशा की तरह पेड़ की ओट से सिंह साहब की बेटी को छुप छुप के देखे जा रहा था और सिंह साहब की बेटी भी हमेशा की तरह उसे देखते हुए भी अंदेखा कर दूसरी ओर मुंह घुमा कर हंस रही थी । हाए ये लड़कियां ! उम्र भले कोई हो मगर अंदाज़ सबका एक जैसा । 
खैर ये हरे रंग से पुती हुई सीट पर चुनाव में आनत जब्त हो चुके नेता की तरह  गुमसुम बैठा ये लड़का भला क्यों इन सब बातों में दिलचस्पी लेगा । इसका तो दिल टूटा है । भले ही इन सबके लिए ये शाम हमेशा की तरह ही खुशनुमा सी हो मगर इसके लिए तो ये फांसी से एक दिन पहले के दिन जैसा है । 
अभी भी इसे वैसे ही रोना चाहिए जैसे ये चार दिनों और साढ़े तीन रातों से रो रहा है । आज ही थोड़ा बाहर निकला है ये सोच कर की थोड़ा मन बदलेगा । होता भी है हद से ज़्यादा खुशी या हद से ज़्यादा ग़म थोड़ा तो विराम मांगते ही हैं एक जैसा मौसम भले ही बहार का क्यों ना हो ज़िंदगी को दस साल से पेंट ना हुई हो दिवार जैसा अधरंगा कर देता है । इसलिए मौसम बदलते रहने चाहिए । ये भी अपने ग़मों के मौसम में थोड़ा बदलाव लाने आया था जिससे ग़म ज़्यादा दिनों तक संजो के रख सके । ग़मों में ज़्यादा दिन रहता तो ऊब जाता फिर भला अपने महबूब की शादी पर चीखें मार कर कैसे रो पाता । जी हाँ बेचारे की छः साल पांच महीने सतरह दिन और कुछ घंटों की मोहब्बत आज मजबूरी का सदियों से बजता चला आ रहा घिसा पिटा रिकार्ड सुना कर चली गई । हाँ ये अहसान ज़रूर कर गई की हम अच्छे दोस्त बने रह सकते हैं । हद है भई दूध को जला जला कर बनाया गया खोआ भला फिर से दूध कैसे बन सकता है । खैर पुरानी मोहब्बत है वो भी शिद्दत वाली बुरा भी नहीं बोला जा सकता । 
खैर मन बहला लेने दो लड़के को । घर जा कर तो रोना ही है । लड़का इधर उधर देखने लगा । घुंघराले बालों वाले प्यारे से बच्चे को उसकी मम्मी ने एक लम्बी दौड़ धूप के बाद आखिर पकड़ ही लिया । मेरे पड़ोसी उस अरूण ने आखिर सिंह साहब की रंग बिरंगी गालियों की परवाह किए बिना उनकी लड़की के पास बैठने की हिम्मत कर ही ली । मतलब मिलाजुला कर यहाँ का हर दृश्य लड़के को थोड़ा बहुत बहला रहा था । मगर आशिक़ को ज़्यादा देर खुशी तभी तक नसीब होती है जब तक दिलफेंक रहता है सच्चे आशिक़ के ओहदे के साथ ज़्यादा खुश रहना आशिक़ी के नियमों का उलंघन माना जाता है । अगली बंच पर खिलखिलाते एक जोड़े को देख लड़के की थोड़ा खुश होने की सारी मेहनत बेकार गई । 
उस जोड़े को देख कर उसे ऐसा महसूस होने लगा कि दुनिया में सब खुश हैं सिवाय उसके । उसने अब यह मान लिया था कि ईश्वर के घर से पूरे जहान की मनहूसीयत वही लिखा लाया । इंसान भी बड़े अजीब किस्म का प्राणी है उसे अपना दुःख दुनिया के हर दुःख से बड़ा लगता है । खुद की ऊंगली कट जाए तो बेहोशी छाने लगती है और किसी का सर कट जाए तो मुंह से आह तक नहीं निकलती । जैसे कि इस लड़के को ही देखिए इसे अभी अपने दिल टूटने का इतना दुःख था कि इसे अपने दुःख के आगे पार्क के गेट पर खड़े उस बच्चे का दुःख भी कम लग रहा था जिसने ऐसी कमीज़ पहनी थी जिसे देख कर लग रहा था कर्ण के कवच की तरह वह भी यह कमीज पैंट पहन कर ही जन्मा था और उसके बाद यह उतारा ही नहीं, लड़के को उस बच्चे की आँखों में वो दर्द भी कम लग रहा था जो वो बच्चा अपने हम उम्र बच्चों को अच्छे कपड़े अच्छे बाल और सबसे ज़्यादा उन्हें अपने माँ बाप के साथ खेलता देख कर उठ रहा था, लड़के को तो उसकी पीठ पर लदे बोरे का भार भी महसूस नहीं हो रहा था जिसमें इतना कचरा लदा था जो संसद भवन में बैठक कर रहे नेताओं के दिमाग़ से भी ज़्यादा था । खैर हमको उस बच्चे से क्या लेना कौन सा हमारा सगे वाला है । आप लड़के का किस्सा सुनिए । 
लो मैने जब तक उस बदहाल बच्चे की कथा सुनाई तब तक उस लड़के के सामने बैठे प्रेमी जोड़े में से प्रेमिका गायब हो गई । लड़के ने सोचा कि इस प्रेमी जोड़े की हिम्मत कैसे हुई मेरे सामने ऐसे खुश होने की ! क्या इन्हें नहीं दिखता मैं दुःखी हूं । थोड़ी देर खिसियाने के बाद लड़का शकुनी मामा वाली मुस्कान बिखेर कर मन ही मन सोचने लगा "सही है बेटे अभी हंस ले कुछ दिनों में तेरा भी मेरे वाला हाल ही होगा । फिर तू रोना और मैं हास्य कविताएं सुन कर ज़बरदस्ती लोट पोट हो कर हसूंगा ।" फिर कुछ देर बाद लड़के के मन में ना जाने क्या सूझी कि उसने तय कर लिया चल कर ज़रा उस प्रेम को समझाया जाए कि मत जल इस ठंडी आग में क्योंकि अभी तो ये सुकून और खुशी दे रही है मगर कुछ वक्त बाद यह इतनी ठंडी हो जाएगी कि तू इसकी ठंड से ही जलन महसूस करने लगेगा ठीक वैसे ही जैसे बर्फ की सिली पर कुछ देर हाथ रखे रहने से हाथ जलते हैं ।
"सुनो भाई !"

"कौन मैं ?"

"हाँ तुम ही ।"

सामने बैंच पर बैठा प्रेमी मुस्कुराता हुआ लड़के के पास आया और बोला "हाँ भाई बोलो ।"

"ये जो तुम कर रहे हो ना इसका अंजाम बड़ा भयानक होगा । समजा देता हूँ ।" लड़के के समझाने का तरीका अगर श्री कृष्ण ने ऊपर बैठे कहीं देखा होगा तो उन्होंने मन ही मन मुस्कुरा कर कहा होगा यह लड़का तो मुझ से भी ज़्यादा प्रभावशाली उपदेशक है । 
"मैं समझा नहीं भाई क्या कहना चाहते हैं आप !" लड़का तो कृष्ण जी से बड़ा उपदेशक लग रहा था मगर प्रमी में अर्जुन वाले गुण नहीं थे ना इसलिए वो समझा ही नहीं । 
"हाँ अभी तुम प्यार में पागल जो हो तुम्हें कुछ समझ कहाँ आएगा । देखो दोस्त मेरा दिल ताज़ा ताज़ा टूटा है और मैं नहीं चाहता किसी और का भी टूटे इसी लिए कम शब्दों में बता रहा हूँ कि आज तो तुम अपनी प्रेमिका के साथ हंस बोल कर खुश हो रहे हो मगर कल को जब इसी ने तुम्हे लात मारी और कहा कि मुझे माफ़ करना मैं मेरी शादी कहीं और फिक्स हो कर दी गई है और मैं अपने घर वालों के अगेंस्ट नहीं जा सकती । तुम मुझे भूल जाओ । तब तुम हंसना भूल जाओगे । इसीलिए अभी से समझा रहा हूं ।" प्रमी उसकी बातें सुन कर ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे वो लड़के की बेचैनी का मज़ा ले रहा हो । 
"भाई एक बात बताऊं ?" प्रेमी ने मुस्कुराते हुए पूछा 
"हाँ जल्दी बोलो मुझे रोने का मन हो रहा है घर जाकर रोना भी है ।" लड़के ने बड़ी मुश्किल से आंसू रोकते हुए कहा ।"
"भाई वो ऐसा कह चुकी है । अगले महीने उसकी शादी है ।" इतना सुनते ही पर्दे के पीछे से मधुर मगर दर्द से भरा हुआ संगीत बजने लगा और प्रेमी की ये बात सुन कर अब ज्ञान देने वाला वो लड़का ज्ञान पाने का इच्छुक हो गया ।
"भाई यार फिर भी तुम खुश हो और उसके साथ हंस कर बातें कैसे कर रहे थे ।" (अब ज़रा गंभीर हो जाईए, सामने वाला लड़का गहरी बात कहने वाला है । )
"देखो भाई ! हमने एक होने की बहुत कोशिश की मगर उसके घर वाले नहीं माने । अब होना ये चाहिए था कि हम दोनों के ऊपर इनकमटैक्स का छापा पड़ने से पल में मालामाल से कंगाल हो गए सेठ की तरह मातम का रंग छा जाना चाहिए था । उसे रो रो कर आँखों के नीचे काले घेरे बना लेने चाहिए थे और मुझे शराब सिगरेट पी पी कर लीवर जला लेना चाहिए था । और कुछ दिन ऐसा हुआ भी । फिर एक दिन मैने सोचा कि यार जिस लड़की से मैं इतना प्यार करता हूँ उसे भला ऐसे मायूस कैसे होने दे सकता हूँ । वो भी तो मेरे से उतना ही प्यार करती है जितना मैं उससे । उसकी गलती बस इतनी है कि वो प्यार में इतनी अंधी ना हो सकी कि अपने उस पिता की खुशियों को नज़रअंदाज़ कर के मेरे साथ भाग कर घर बसा सके जिसने पैदा होने फे अब तक उसे हर खुशी दी । मैने सोचा कि अब कुछ दिन का साथ बचा है क्यों ना ये कुछ दिन ऐसी यादों से भर दिए जाएं जिस से जब भी वो इन यादों में खोए तो आंसुओं के बाद भी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट हो । यही सोच कर मैने उसे फोन किया मिलने बुलाया और हम खूब घूमे खूब बातें कीं और इसी तरह तब तक करते रहेंगे जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती । जानता हूँ ग़मों के उजाड़ चेहरे पर झूठी खुशी की चादर ज़्तादा देर नहीं टिक सकती, मगर जितनी देर टिगेगी कम से कम मुस्कुराहटों भरी यादें तो सजाएंगी । अब भी हम उतना ही रोते हैं उसी तरह नियती को कोसते हैं मगर सबके बाद भी हम खुश रहने का दिखावा करते हैं  ।" उसकी सारी बातें सुनने के बाद लड़के का मुंह उस चाभी वाले उस बंदर की तरह लग रहा था जिसमें चाभी ना भरे होने पर वो एक टक एक ही तरफ़ देखता रहता है । सामने वाला लड़का अपनी बात कह कर मुस्कुराता हुआ चल दिया । 
लड़के को कुछ वक्त लगा उसकी बातें दिमाग में सैट करने के लिए फिर एकदम से जेब से फोन निकाला और एक नंबर मिला कर बोला "कल बाहुबली 2 देखने चलोगी । इकट्ठे जानेंगे कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा । (उधर से शायद कहा गया, तुम पागल हो गए हो क्या ? अचानक ये फिल्म देखने की कैसे सूझी ) बस ऐसे ही सूझ गई । और हाँ अब प्रेमी की तरह नहीं एक दोस्त की तरह ले जाऊंगा । बस तुम्हे खुशियाँ देनी हैं बहुत सारी खुशियाँ । आओगी ना प्लीज़ ।" उधर से कुछ वक्त तक कोई जवाब नहीं आया । शायद मुस्कुराने में व्यथ थीं मैम। फिर बोली "हाँ मेरी जान ज़रूर आऊंगी और हम प्रेमी की तरह ही चलेंगे । इतने समझदार प्रेमी को दोस्त बनने की ज़रूरत नहीं ।" 
फोन कट गया लड़के ने दो मिनट पार्क में देखा फीर चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट सजा कर उठ खड़ा हुआ । शायद अब उसे यहाँ का नज़ारा पहले के दिनों जैसा सुखद लग रहा था । पार्क से बाहर आते हुए उसने कूड़ा उठाए बच्चे के सर पर हाथ फेरा और बोला "चल तुझे आईसक्रीम खिलाता हूं ।" 
कहानी का अंत सबसे खूबसूरत था, क्योंकि बाकी बच्चों को देख कर तरस रहे उस कूड़े का झोला उठाए बच्चे के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट थी । असल मायनों में यह है एक दुःखी कहानी का मुस्कुराता हुआ अंत ।
धीरज झा

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