​मातृदिवस (मदर्स डे ) विशेष (स्पैश्ल)

​मातृदिवस (मदर्स डे ) विशेष (स्पैश्ल) "माँ" क्या कहें इस छोटे शब्द माँ के बारे में, इस छोटे से शब्द का गुणगान करने के लिए हर भाषा ...

​मातृदिवस (मदर्स डे ) विशेष (स्पैश्ल)
"माँ" क्या कहें इस छोटे शब्द माँ के बारे में, इस छोटे से शब्द का गुणगान करने के लिए हर भाषा के शब्द कोष से चुने गए बड़े बड़े भारी भरकम शब्द भी कम पड़ जाते हैं । मगर आज मदर्स डे पर माँ के लिए कुछ तो लिखना बनता है, इसीलिए अपनी एक कहानी के माध्यम से दुनिया की हर माँ को नमन कर रहा हूँ 
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तू सबसे अनमोल दौलत है मेरी 
"खों खों" भयानक बिमारी के प्रकोप से अनुराग बच तो गया था मगर ये धूल मिट्टी अब थोड़ी भी बर्दाश्त नहीं कर पाता था । मगर क्या करे अब घर में बैठे रहने से भी तो काम नहीं चलेगा । बेरोज़गार सरनेम लगा कर लोगों के ताने सुनने से अच्छा थी थोड़ी सी खांसी । नई नई जगहें , हवा पानी का बदलना और धूल मिट्टी अनुराग की सोई हुई खांसी को जगा देती थीं और ये खांसी माँ के सोए हुए डर को ।
"खांसी ज़्यादा है ?" अनुराग ने बड़ी कोशिश की थी कि माँ जागे ना मगर माँ तो माँ है बच्चे का हल्का सा दर्द उसे बेहोशी से उठा कर बेचैन कर दे ये तो हल्की सी नींद थी । 
"नहीं माँ बस ऐसे ही है । ठीक हो जाएगी ।" अनुराग ने माँ को बहलाने की नाकानम सी कोशिश की मगर अनुराग शायद ये भूल गया था कि बहलाया उन्हें जाता है जो देख रहे हों महसूस करने वालों को आप नहीं बहला सकते ।
"हाँ ये ऐसे ही जो खाँसी होती है वो तीन बजे रात तक नहीं जगाती । कल से कह रही हूँ सिरप पी ले और नहीं आराम होता तो डाॅक्टर को दिखा ले मगर तू है कि मेरी एक नहीं सुनता ।" 
"अरे माँ आप सो जाओ कुछ नहीं है सब ठीक है । मैं तो बस पानी पीने आया था।" माँ की आवाज़ धीरे धीरे बड़बड़ाने में बदल गई और अनुराग अपने कमरे में चला गया । उसे पता था वो जितनी देर वो खड़ा रहेगा उतनी देर माँ परेशान होगी । 
नींद से तो उसकी वैसे भी बड़ी दुश्मनी थी ऊपर से ये खांसी दम लेने का नाम ही नहीं ले रही थी । माँ के पास से आए हुए उसे पौना घन्टा हो गया था और इस बीच खांसी ने एक मिनट भी आराम नहीं किया, लगातार अपना कमाल दिखाती रही । 
"ये है तेरी "ऐसे ही है" वाली खांसी ना ? सांस तुझ से ली नहीं जा रही और कहता है बस ऐसे ही है ।" माँ दरवाज़े के बाहर से ही फिक्र और गुस्से की मिली जुली बोली को प्यार की चाशनी में डुबा कर परोस रही थी । दरवाज़ा खोला तो सामने माँ काढ़ा लिए खड़ी थी । 
"माँ इतनी रात है क्यों तकलीफ़ की आपने । ठीक हो जाएगी अपने खों खों ।" 
"हाँ ऐसे ठीक होगी ना । तेरा डर मानती है ना ये खांसी तूने कहा और ये ठीक हो जाएगी । चुपचाप काढ़ा पी ले और सुबह डाॅक्टर को दिखा ले । तू भूल जाता है मगर मुझ से तेरी उन दिनों की तड़प नहीं भुलाई जाती । बहुत डर लगता है ।" उसने जब तक काढ़ा पिया माँ वहीं खड़ी सर सहलाती रही । और फिर अपने बड़े हो चुके छोटे से बच्चे को थपक्कियाँ दे दे कर सुला कर लौटी ।
सुबह वो जब उठा तो देख कर हैरान था कि पूजा वाले कमरे में दीप नहीं जल रहा था । माँ तो अभी तक पूजा कर के चाय बना रही होती हैं फिर आज क्या हुआ ? माँ माँ करता हुआ जब कमरे में पहुंचा तो देखा कि माँ सोई हुई थीं । बच्चों पर प्यार लुटाने वाली माँ जब कभी चैन से सोती है तो उसका चेहरा बच्चों से भी ज़्यादा मासूम दिखता है । वो कभी कभी जब बहुत बेचैन हो जाता था तब माँ के चेहरे पर बिखरी इस मासूमियत को चोरी चोरी देखा करता था । आज भी वो माँ के उस सुकून से भरे चेहरे को देखते हुए उनके पास पहुंचा और माँ के पैर दबाने लगा । बेटे के हाथों की छुअन से माँ जाग गई मगर थोड़ी देर कुछ बोली नहीं । 
"अब खाँसी कैसी है ?"
"खाँसी तो ठीक है मगर आप मुझे ठीक नहीं लग रहीं ।"
"अरे नहीं बेटा बस आज उठने का मन नहीं किया इसलिए सोई रह गई ।"
"हाँ वो तो आपकी आँखों में फैली हुई थकान देख कर अंदाज़ा लग ही रहा है कि कितना ठीक हैं आप । सच बताइए आप पूरी रात सोई नहीं ना ?" माँ उसके सवाल को अनसुना कर के उठ रही थीं, मगर उसने हाथ पकड़ कर भैठा लिया माँ को । 
"बताईए आप जागी हैं ना पूरी रात ?"
"हाँ नींद नहीं आई । तू सो गया था उसके एक घंटे बाद कमरे में आई । कोशिश की सो जाऊं मगर जब आँख लगती तो ऐसा महसूस होता कि तू बुला रहा है मगर मैं जब जब गई तब तब तू चैन से सो रहा था । कुछ देर पहले ही नींद आई थी । सोचा उठ ही जाऊं अब, सवेर तो हो ही गई है मगर नींद आ गई । रुक मैं नाशता बना देती हूँ तू फ्रैश हो जा । फिर डाॅक्टर को दिखा आना ।" अनुराग की आँखों में आँसू घास पर पड़ी ओस की तरह चमक रहे थे । 
"माँ, क्यों मेरी छोटी छोटी तकलीफ़ के लिए खुद को इतना तंग करती हो ?" अनुराग एक शब्द और बोलता तो रो पड़ता इसीलिए बस इतना ही बोल पाया । 
"जानता है ! तेरे पैदा होने से पहले बहुत अकेली हो गई थी मैं । बच्चपन में माँ बाप छोड़ गए, मौसी के घर उनके बच्चों से बचे खाने कपड़ों और मौसी के छुपे हुए थोड़े से स्नेह के सहारे जैसे तैसे बड़ी हुई, ना चाहते हुए भी प्यार होगया, मगर इस प्यार को किसी ने मंज़ूर नहीं किया । मैं अनाथ थी और तेरे पिता जी अमीर की संतान थे । तेरे दादा जी ने साफ़ इंकार कर दिया । बात उड़ी तो मौसा जी और आस पड़ोस ताने बरसाने लगा जो बर्दाश्त से बाहर थे । तेरे पिता जी ने अपने पिता से मुंह मोड़ कर मुझसे शादी कर ली । एक पल को लगा की शायद इन्हीं खुशियों के लिए आज तक ज़िंदा थी मगर भूल गई कि मेरी किस्मत में पाना नहीं बस खोना है । शादी के बाद दो साल के भीतर ही तेरे पिता जी ने सारी खुशियाँ हमारे छोटे से आशियाने में सजा दीं । और फिर एक दिन मौत खो ले गई उन्हीं । टूट गई थी मैं खुद को मिटा लेने का मन बना लिया था कि पता लगा तू मेरे अंदर सांस ले रहा है । मुझे खुश होना चाहिए था ये सोच कर कि मुझे एक माँ बनने का सबसे बड़ा गौरव प्राप्त होने जा रहा है मगर मैं खुश हो नहीं पा रही थी । डर था कि कैसे पालूंगी तुझे, कैसे अकेली लड़ूंगी दुनिया से रोज़ सोचती कि तुझे अपने जैसा अनाथ बनाने से अच्छा तुझे अपने अंदर समेटे हुए ही मौत की नींद सो जाती हूँ मगर मैं जब जब ऐसा सोचती तेरी मेरे अंदर से उठ रही हलचल मानों ये कह रही होती कि माँ बस कुछ वक्त और मैं तुझे ज़्यादा दिन अकेला नहीं रहने दूंगा । और ये तेरी हलचल मुझे हर बार रोक लेती । तुझे जब जन्म दिया तब बेइंतेहाँ दर्द था । शरीर कमज़ोर पड़ गया था । बचने की उम्मीद बहुत कम थी । तब मैने खुद की खुद से चल रही लड़ाई को महसूस किया, मुझे अब जीना था, तेरे लिए लड़ी मैं मौत से और आखिर मैं जीत गई । तू मेरी गोद में था, रोते हुए मानो कह रहा हो "ले माँ मैं आ गया । अब तू अकेली नहीं है । उस दिन तू नहीं मेरे जीने की उम्मीद मेरे लड़ते रहने की हिम्मत पैदा हुई थी । 
उसके बाद मुझे ये डर सताने लगा कि कहीं सब की तरह मुझ अभागिन को तू भी ना छोड़ जाए । मगर मैने ठान ली थी कि मैं अब तेरे लिए किसी से भी लड़ जाऊंगी मगर तुझे कहीं दूर ना जाने दूंगी खुद से । जब जब तू रोया मैं रात रात सो ना पाई । जब तू बीमार पड़ा मैने ईश्वर को खुली चुनौती दी और उसे कहा कि हे ईश्वर तू महान हो सकता।है मगर मैं भी कमज़ोर नहीं । तू ने सब छीना मैने देखा मगर ये मेरा इकलौता सहारा है इसे कुछ हुआ तो तू उस दिन जानेगा कि तेरी बनाई सबसे 'कोमल कृति एक औरत' जब अपने मन को दुखा कर रोती है तो उसकी बद्दुआ से भगवान भी नहीं बच पाता । मैं अपने आंसुओं से तेरे स्वर्ग में बाढ़ ला दूंगी याद रखना ।' और शायद भगवान डर गए थे और तुझे आधे रस्ते से वापिस भेज दिया । तू मेरी कुल दौलत है बेटा जिसे मैने खून पसीने और अपने दूध के दम पर कमाया है, इसके लुटने की ज़रा सी आहट मेरी नींदें गायब कर देती है ।" अनुराग आँसुओं से भरी अपनी आँखों से माँ का धुंधला चेहरा निहार रहा था । उसने माँ के हाथ चूम लिए और माँ को ज़ोर से गले लगाया । 
उसे लगा माँ बहुत ज़्यादा भावुक हो गई है इसलिए सुबुकते हुए माँ के कान में बोला "भावुक होते ही पूरी फिल्मी अवतार में आजाती हैं आप मेरी नीरूपा राॅय ।" माँ के आँसुओं से भीगे चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान दौड़ पड़ी जो भागते भागते प्यारी सी हंसी में बदल गई । 
माँ ने अनुराग के पीठ पर हल्का सा मारते हुए कहा "बहुत बदमाश हो गया है तू । चल अब जाने दे नाशता बना दूं तेरे लिए ।" 
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भगवान की सबसे सुंदर कृति इस माँ नाम की जादूगरनियों को मातृदिवस की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं एवम सादर नमन 
धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : ​मातृदिवस (मदर्स डे ) विशेष (स्पैश्ल)
​मातृदिवस (मदर्स डे ) विशेष (स्पैश्ल)
क़िस्सों का कोना
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