​ये सिनेमा किस राह पर ले जा रहा है हमें

"दारू" जी हाँ वही दारू जिसके दिवाने तो ससुरे चूहे भी हैं । बिना शोर किए लाखों लीटर दारू डकार जाते हैं । दारू ऐसा शब्द जिसका नाममात...

"दारू" जी हाँ वही दारू जिसके दिवाने तो ससुरे चूहे भी हैं । बिना शोर किए लाखों लीटर दारू डकार जाते हैं । दारू ऐसा शब्द जिसका नाममात्र ही अनेक तरह की भावनाओं को जन्म देता है । किसी के मुँह में पानी किसी की आँख में गुस्सा, किसी का सबसे बड़ा साथी तो किसी का सबसे बड़ा दुश्मन । खुशी हो ग़म हो थकान हो अराम हो सबमें दारू प्रधान है । दारू आपको पसंद हो या ना हो मगर सत्य तो यही है कि सत्यानाश का दूसरा नाम दारू है । 
इसी सत्यानाशी दारू का नाम ओ निशान मिटाने की मुहीम छेड़ कर कितने राजनेताओं ने अपनी किस्मत पलट ली । दारूबंद दारूबंद करते करते ही सबसे पहले हमारे माननीय प्रधानमंत्री जो तब गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते हुए चर्चा में आए । इन्हीं की तर्ज पर बिहार के सुसाशन बाबू ने जनता का मन मोह लिया । जनता ने भी दारू की बुराई करने वाले नेताओं को अपने सर आँखों पर बिठाया । अब तो योगी जी पर भी यूपी की सरज़मीं को दारू विहीन करने का दवाब बन रहा है । पिछले आँकड़े देखते हुए अगर योगी जी यूपी में शराबबंदी कर देते हैं तो शायद पच्चीस साल के लिए अपनी सत्ता मजबूत कर ही लें । 
खैर राजनेताओं से ले कर देश की आम जनता किसी ना किसी रूप से शराब को खराब मान रही है । यहाँ तक की जब टी वी पर एडवर्टाईज़मेंट आती है तो शराब के ब्रांड के नाम पर फिल्मी सितारे सोडा और पानी पीते नज़र आते हैं मतलब खुले में वह दारू का नाम लेने और इसका प्रचार करने से कतराते हैं । 
मगर इन सबसे अलग आज की फिल्मनगरी दारू का खुलेआम प्रचार कर रही है । वैसे तो हमेशा से फिल्म जगत में शराब को प्रधान माना गया है मगर पुरानी फिल्मों में दारू को ऐसे दिखाया जाता था जिससे उसके नुकसान लोगों के सामने आ सकें । हीरो दारू पीता हुआ दिखाया जाता था तो बस अपने दिल का गुबार निकालने के लिए । तब दारू को उस हद तक ही दिखाया जाता था जितनी उसकी ज़रूरत होती थी । शराबी फिल्म में अमिताभ जी ने शराबी का अभितय किया तो अंत में उसका दुशप्रभाव भी दर्शकों को दिखा दिया । 
नमक हराम में अमिताभ जी ही गाना गाते हैं "थोड़ी सी जी पी ली है, चोरी तो नहीं की है" और ये गाना भी वो खुद को बुरा बताने के लिए गाया जाता है । मगर आज की फिल्मों के लचर गानों ने तो दारू का खुल कर प्रचार करना शुरू कर दिया है । ऐसे ही कुछ गाने आपके सामने रखते।हुए बताते हैं आपको कि किस तरह ये युवाओं में शराब का खुला प्रचार है
1:- शुट ऑऊट एट लोखंडवाला के गाने "ऐ गणपत चल दारू ला" ने शराब को एक रौब के रूप में सभी युवाओं के सामने रखा । 
2:- अगली पगली का गाना "मैं टल्ली हो गई" नवयुवतियों को शराब के प्रति लुभाती हुई लगती है ।
3:- "लल्ला लल्ला लोरी दूध की कटोरी" हमारी माएं हमें चैन की नींद सुलाने के लिए गाया करती थीं मगर अब शायद माँ के इस स्नेह से लोग ऊब गए हैं इसी लिए चैन से सोने का अलग तरीका खोजते हुए "लल्ला लल्ला लोरी दारू की कटोरी" गाना गुनगुना रहे हैं । 
4:- आप भले ही मज़े में इस गाने का आनंद ले रहे हों मगर आपको अफ़सोस करना चाहिए कि वो युवा जिसके कंधों पर देश का भार है वो "रोज़ रोज़ चार बोतल वोदका"  पी कर लड़खड़ाता फिर रहा है । 
5:- "हमका पीनी है पीनी है हमका पीनी है" अरे भाई पीनी है तो घर में बैठ कर पी लो, इस तरह लोगों को सुनाने का क्या मतलब है । 
6:- ज़माना सच में बहुत आगे बढ़ गया है । जहाँ हम कभी समोसा चाय पार्टी करने के लिए दस बार सोचते थे वहीं ऐसे गानों की बदौलत रोज़ "दारू पार्टी" का प्रोग्राम बनने लगता है । 
7:- जाॅनी जाॅनी सुनते ही बच्चे खिलखिला कर हँसने लगते थे । बच्चों के सीखने की पहली कड़ी होती थी यह पोएम मगर आज देख लीजिए "जाॅनी जाॅनी, हाँजी, तूने पी है ना जी" के साथ उस मासूम बच्चपन को भी शराबी बना दिया गया । 
8:- पहले का ज़माना था जब कोई शराब पी कर घर आता था तो छुपता छुपाता कि कहीं कोई देख ना ले मगर अब देखिए चिल्ला कर कह रहा है "हाँ मैं एल्कोहलिक हूँ" । कोई उसे समझाए कि भाई ये बिमारी है इसका इलाज करवाओ । चिल्लाने से ठीक नहीं होगा ।

किसी वक्त में सिनेमा समाज का आईना हुआ करता था और आज यही सिनेमा समाज पर असर डाल रहा है । एक देशभक्ति के जोश से भरी फिल्म हिट होती है तो आप देशभक्त हो जाते हैं । अगर औरतों पर हो रहे अत्याचार को बड़े पर्दे पर दिखाया जाता है तो आप तुरंत हरकत में आ जाते हैं । एक ऐतिहासिक फिल्म आती है तो आप पर इतिहास के पन्नों पर सूख चुका रंग फिर से हरियरा जाता है । तो फिर भला ये गाने कैसे ना समाज और खास कर युवावर्ग पर असर डालेंगे । 
मैने लिख दिया है अब इसका मज़ाक बनाना या इस पर गंभीरता से सोचना आपका काम है । मगर हाँ एक बात बता दूँ अगर आप इसे मज़ाक में ले रहे हैं तो कभी ध्यान से अपने बच्चे की गुनगुनाहट सुनिएगा जो कोई अच्छी कविता गुनगुनाने की बजाए "आंटी पुलिस बुला लेगी तो यार तेरा कर लेगा हैंडल" गा रहा होगा । तब शायद आपको समझ आ जाए कि आपकी उम्मीदें आपके बच्चे को ले कर किस हद तक खरी उतरेंगी ।
धीरज झा

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