बित्तना चोर

​#बित्तना_चोर (कहानी) किसी काम को करने का असल आनंद तब ही आता है जब उसे इस तरह किया जाये कि उसे फिर आप से बेहतर कोई भी ना कर सके । काम कोई भी...

​#बित्तना_चोर (कहानी)
किसी काम को करने का असल आनंद तब ही आता है जब उसे इस तरह किया जाये कि उसे फिर आप से बेहतर कोई भी ना कर सके । काम कोई भी हो उसके प्रति आपकी सच्ची लगन ही आपको उस काम में महारथ दिलाती है ।  
भले ही काम गली में झाड़ू लगाने का ही क्यों ना हो मगर उसे भी इतनी इमानदारी से किया गया हो कि हर गुज़रने वाला पूछने पर मजबूर हो जाये कि यहाँ कि सफाई कौन करता है ? 
पाँच फुट से डेढ़ इंच कम के बित्तना को भी अपनी काम में महारथ हासिल थी । छोटे कद और चौड़ी देह वाला बित्तन जो काम करता था उसके लिये उसे पूरा इलाका जानता था । हालांकि उसका काम कानून की नज़र में अपराध था पर उससे क्या फर्क पड़ता है, हुनर तो हुनर ही है ले ही चोरी का ही क्यों ना हो । बित्तना अपने ज़माने में अपने इलाके का जाना माना चोर था । किस्मत जब एक दम से दुश्मन हो जाती या कोई अपना खास ही उसकी खबर पुलिस को दे देता तभी पुलिस उसे पकड़ने में कामयाब हो पाती वरना आज तक रंगे हाथों उसे कोई नहीं पकड़ पाया था । 
चोरी की बढ़ती वारदातों को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन कुछ ज़्यादा ही चौकन्ना हो गया था । बित्तना भी अब बढ़ती उम्र के साथ थोड़ा शांत हो गया था । चौरी करने का अब उसका मन भी नहीं करता था । चोरी से जमा कुछ पैसों से उसने बज़ार पर एक छोटी सी चाय की दुकान खोल ली थी जो अच्छी खासी चल पड़ी थी । दुकान के अच्छे चलने के दो कारण थे, पहला तो ये कि वह अपनी चाय में बाकी दुकानदारों के मुकाबले दूध थोड़ा ज़्यादा डालता और दूसरा कि उसके पास ग्राहकों को सुनापे के लिए ढेर सारे किस्से होते । अब चाय के साथ साथ कभी कभी गर्मा गर्म किस्सा मिल जाये तो हर्ज ही क्या । 
पूरा बाज़ार जानता था कि बित्तना हाथ की सफाई में माहिर था । इसलिए नये नये चोर उसके सुनाए किस्सों से चोरी के गुण सीखने भी आजाते थे । आज भी दुकान पर अच्छी खासी भीड़ थी । बित्तना अपनी नन्हीं मगर मोटी मोटी ऊंगलियों में केतली फंसाये हुए गिलास में चाय डाल रहा था । दुकान पर एक को छोड़ कर बाकी सभी चेहरे वही थे जो हमेशा देखने को मिलते । यह नया चेहरा था हरिराम हौलदार का । हरिराम हौलधार खुद को बहुत शातिर और समझदार पुलिसवाला मानता था । 
बित्तना के किस्से जब उससे हज़म ना हुए तो वह खड़ा हो कर बोल पड़ा "रे बित्तन सुने हैं हाथ की सफाई में बड़ा माहिर रहा है तू ।"
"अरे नहीं सरकार, ई का कह रहे हैं । आप सब माई बाप लोग के सामने हम जईसा चोर चुहाड़ का हाथ की सफाई करेगा ।" अपने काम में मग्न बित्तना ने गंदे से गमछे से अपना चौड़ा माथा पोंछते हुआ, हौलदार की बात को हंसी में उड़ाने की कोशिश करते हुए कहा ।
"अरे नहीं रे बित्तना हम तो सुने हैं तू निच्चा के दू गो में से एगो गोटी निकाल ले अऊर आदमी को खबर भी न लगे ।" अबकी बित्तना के साथ बाकि के ग्राहक भी हौलदार की इस बात ठहाका लगा के हंस दिए ।
"हंस नऽ रे बित्तना । आजु तोहरा पर काल मंडरा रहा है । बहुत दिन से तोहरा गुनगान सुन रहे हैं । अब तू साबित कर कि तू बड़का चोर है नाही त हम तुमको झूठा केस में अंदर डाल देंगे ।" बित्तना के माथे का पसीना एक दम से ऊरे शरीर को भिगोंए लगा । 
"सरकार हम भला कईसे साबित करें ?"
"तु इहाँ सबके सामने हमरा जेब काट के बता फिर जानेंगे तू बड़का चोर है आ फिर उसके बाद इनाम भी देंगे ।" हौलदार अपनी मुंछों को ताव देते हुए बोला । 
हाथ जोड़े हुए बितना हौलदार की ओर बढ़ते हुए बोला "सरकार हमरा के एतना मजाल कईसे होगा कि आपका जेब काट सके ।"
"बेटा जेब त काटना ही पड़ेगा नहीं तऽ सजा भुगतने को तईयार हो जाओ आ दूसरा बेईज्जती होगा ऊ अलग ।" 
एक दो बार बित्तना ने और कहा कि भला वो एक पुलिस वाले की जेब कैसे काट सकता है । 
मगर जब हौलदार अपनी बात पर अड़ा रहा तो बित्तना थोड़ा बुरा सा मुंह बना कर बोला "सरकार हम तब से इसलिए मा कर रहे थे कि हम नहीं चाहते थे आपका बेईज्जती हो । मगर आप तो मानने को तईयारे नहीं हैं । बताईए जेबी में बस तीन गो चरन्नी रखे हैं उसका खाक चोरी करें और चोरी कर भी लिए तो उसमें से आप हमको केतना ईनाम दे देंगे, आपके पास तऽ खुदे चाय के कप के लिए भी पूरा पईसा नहीं है ।"
बित्तना की बात सुनते ही सबके मुंह खुले के खुले रह गये । हौलदार साहेब के हाथ तो अपने आप ऐसे जुड़ गये जैसे सामने साक्षात प्रभु ने दर्शन दे दिए हों । अंत में लजाते हुए हौलदार बोले "भाई बितना , हम तो तुम्हारी आबलीयत पहिलहीं जानते थे अभी तऽ बस चेक कर रहे थे कि क्या पता अब हाथ में उतना सफाई ना बचा हो । मगर अभिओ ओतने सफाई है जेतना पहिले था । और हाँ ऊ जल्दी में हम अपना बटुआ घरे भूल आए नही तो पचास सौ रूपईया तो हमेसा रहता है पास में ।"
हौलदार की बात पर बितना की हंसी छूट गई । थोड़ी देर में हंसी को रोकते हुए बोला "हौलदार बाबू, छोड़ने का मतलब भूल जाना कभी नहीं होता है । बाकि एक कप आऊरो चाय पी के जाईएगा । ई हमरा तरफ से मुफ्ते में रहेगा ।"
धीरज झा

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