​#पूरे_भारत_का_बिहार

​#पूरे_भारत_का_बिहार  "हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा, बस यार पेट दुखने लगा बस करो । और कितने जोक्स सुनाओगे यार ।"...

​#पूरे_भारत_का_बिहार 
"हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा, बस यार पेट दुखने लगा बस करो । और कितने जोक्स सुनाओगे यार ।" मनमीत के एक और नए बिहारी जोक पर पेट पकड़ कर हंसते हुए यशपाल ने उससे कहा 
"बिहारी होते ही जोकर हैं । इनके काम ही ऐसे हैं इसीलिए तो मज़ाक बन कर रह गए हैं । अब ये बिहार बोर्ड के कारनामें देख लो । क्या खाक पढ़ेंगे यहाँ के बच्चे । दूसरे राज्यों में जा कर मजदूरी ही करेंगे । अब ऐसे नमूनों पर जोक ना बने तो क्या हो ।" मनमीत ने बिहारियों के प्रति ज़हर उगलते हुए कहा ।
इतने में पास की टेबल पर बैठा लड़का उठा लिसे ज्वाईन किए बस हफ्ता भर ही हुआ था और मनमीत से बोला "सर आपने वो भारत के सबसे महान मूर्खों वाला आर्टिकल तैयार करने के लिए कहा था ना, वो मैने तैयार कर लिया है । आप एक बार थीम सुन लेते तो मैं आर्टिकल फाईनल कर देता और कल यह छप जाता ।"
"वाह राघव तुम तो बड़े होशियार हो, इतनी जल्दी तैयार भी कर लिया । चलो सुनाओ फिर मैं एक बार फाईनल रीडिंग भी ले लूंगा ।" 
"जी मैने भारत के आज तक के सबसे मूर्ख लोगों की सूचि तैयार की है । उनमें ये नाम सबसे ऊपर आते हैं । और भी बहुत से हैं मगर पहले इनकी मुर्खता का वर्णन कर लेंगे फिर आगे बढ़ेंगे ।

अशोक

आर्यभट

चन्द्रगुप्त मौर्य

चाणक्य

वीर कुँवर सिंह

राजेन्द्र प्रसाद

कर्पूरी ठाकुर

जगन्नाथ मिश्र

जय प्रकाश नारायण

अनिरुद्ध जगन्नाथ मौरिसस के राष्ट्रपति

राजेन्द्र प्रसाद

परमानंद झा" 
ये सभी नाम सुनते ही मनमीत बौखला गया । मुँह लाल पीला कर के बोला "राघव तुम।हमारा अखबार बंद करवाओगे क्या ? तुम्हारा दिमाग खराब है ? तुम जानते भी हो तुम किन लोगों को मूर्ख कह रहे हो ?"
"हाँ सर अच्छे से जानता हूँ । ये सभी मूर्ख ही तो हैं । इनमें से कोई सम्राट है, तो किसी ने अपनी बुद्धि से दुश्मन राज्य को तहस नहस कर दिया, कोई इस दुर्भाग्यशाली देश का प्रथम राष्ट्रपति है तो कई विदेश में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का पद संभाले हुए हैं, कोई भारतीय राजनीति के स्तंभों में से एक है तो कोई ऐसा जिसे गणित को ही जन्म दे दिया । मगर सबके सब मूर्ख क्योंकि सबके सब बिहारी हैं । सर भला इन्हें किसने कहा था तुम बिहार में जन्मों । क्या इन्हें नहीं पता था कि भविष्य में बिहार एक ऐसा मूर्ख राज्य कहा जाने वाला है जहाँ के अधिकांश मूर्ख आई ए एस,आई पी एस, आई आई टी एन, साहित्य से सिनेमा जगत तक की रीढ़ की हड्डी ही पैदा होंगे मगर इन सब को मूर्ख बिहारी कहा जाएगा, गरियाया जाएगा सिर्फ और सिर्फ यहाँ की गंदी राजनीति और उसकी लचर व्यवस्था के कारण । हाँ सर बिहारी बड़ा मूर्ख है जो खुद को इस देश का हिस्सा मान कर परेशानियों से लड़ता हुआ इस देश के लिए ही कुछ बहुत बेहतर करने का सपना अपनी आँखों में सजाए बैठा है ।" चारों तरफ सन्नाटा है, संपादक  महोदय के साथ साथ बाकी का स्टाॅफ भी राघव की बातें सुन कर अवाक है । 
राघव दो मिनट रुक कर फिर बोलना शुरू करता है "जानते हैं सर हमारे देश की समस्या क्या है ? हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारा देश कहने को तो एक देश है मगर असल में यह बंट चुका है राज्यों के आधार पर बोल चाल वेषभूशा के आधार पर राजनीति के आधार पर । लोग जान रहे हैं कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था बुरी है तो क्या उनका फर्ज़ नहीं बनता उस खराब व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाई जाए ? क्या बिहार बाकियों के उस महान देश का हिस्सा नहीं है जिसके राष्ट्र गान पर पर सब सीना चौड़ा कर के खड़े हो जाते हैं, जिसके एक क्रिकेट की टीम का समर्थन आप ऐसे करते हैं जैसे वह फौजी हों । जिस फौज के सम्मान के लिए हम अखबार में रोज़ एक नया लेख लिखते हैं बिहार रेजिमेंट 1941से उस फौज की सेना का अभिन्न अंग है । क्या आपको नहीं लगता लोग बार बार बिहार और बिहारियों का मज़ाक उड़ा कर उन्हें इस देश का हिस्सा मानने से मना कर रहे हैं ।"
"कोई चाह कर भी इसे खुद से अलग नहीं कर सकता । बिहार के किसान, फौजी, उद्योगपतियों,विद्यार्थियों आदि से लेकर बिहार के मज़दूरों तक का इस देश के लिए उतना ही योगदान है जितना बाकी के राज्यों का । लोग बिहार को मज़ाक बनाने की बजाए वहाँ की खराब व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठा कर एक सच्चे भारतीय का कर्तव्य निभाएं तो ज़्यादा बेहतर रहेगा । बस यही था मेरा आर्टिकल और हाँ मैं हूँ राघव ग्राम बिसनपुर जिला सीतामढ़ी राज्य बिहार देश भारत और मेरी आप पिछले सात दिनों से मेरी काबलीयत की वजह से मेरी पीठ थपथपा रहे हैं ।" बोलते हुए राघव के चेहरे की मुस्कुराहट एक पल के लिए भी गायब नहीं हुई । 
"राघव यही आर्टिकल छपवा दो और हाँ शिर्षक देना "पूरे भारत का बिहार" । मनमीत की आँखों में क्षमाभाव थे मगर थे तो वह सीनियर ही इसीलिए उसे प्रकट नहीं कर सकते थे इसलिए बस इतना कह कर रह गए । राघव की मुस्कान और गहरी हो गई ।
धीरज झा

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