नन्हीं चिड़िया

​#नन्हीं_चिड़िया  (डाक्टर्स डे स्पेश्ल कहानी ) "अरे मर जाएगा वो, कितना छोटा है । देख चल भी नहीं पा रहा ।" बच्चे को खंरोच लगने पर मा...

​#नन्हीं_चिड़िया 
(डाक्टर्स डे स्पेश्ल कहानी )
"अरे मर जाएगा वो, कितना छोटा है । देख चल भी नहीं पा रहा ।" बच्चे को खंरोच लगने पर माँ जैसे तड़पती है वैसे ही तड़पा था वो अंडे से अभी अभी निकले चिड़िया के बच्चे को देख कर । उसकी गुलाबी चमड़ी को अपनी नन्हीं ऊगलियों से सहलाते हुए बार बार रो पड़ता था । भुवन ने बार बार समझाया था कि "अरे मर गया वो, देख सांस भी नहीं ले रहा ।" मगर संकेत मानने को तैयार नहीं था । 
एक माँ के बाद एक बच्चे से ज़्यादा अच्छी तरह मातृत्व को कौन समझ सकता है । उसने ताज़ा ताज़ा माँ के स्नेह को महसूस किया होता है, माँ की ममता को जिया होता है । शायद इसीलिए बच्चे भगवान का रूप माने जाते हैं । भुवन के बार बार कहने के बाद उसे यकीन हुआ था कि अब वो नन्हीं जान जो अभी तक चिड़िया बनी भी नहीं थी पंख लगा कर दूसरे जहान में उड़ गई । 
मोहल्ले के बच्चों को इक्कट्ठा कर करे बड़े ज़ोर शोर से उसका जनाज़ा निकाला था संकेत ने । उसने अपने दादा जी से हुना था कि बच्चे जब भगवान के पास चले जाते हैं तो उनके शरीर को जलाने की जगह दफ़ना दिया जाता है और उस पर एक पेड़ रोप दिया जाता है जिससे वो बच्चा उस पेड़ में ज़िंदा रहते हुए उसके साथ बढ़ता रहे । संकेत ने भी भुवन के बगीचे में उसे दफ़नाने की व्यवस्था की और अपनी मासूम और पवित्र आँखों से गंगाजल समान दो बूंद आँसुओं से उस नन्हीं सी जान को अंतिम स्नान कराया और फिर उसे दफ़ना कर एक आम की कलम रोप दी  । 
उस दिन के बाद संकेत के दिमाग में ये बात बैठ गई कि वो अगर डाॅक्टर होता तो उस नन्हीं चिड़िया की जान बचा लेता । उसने ठान लिया था कि वो डाॅक्टर ही बनेगा । बहुत चिढ़ाया करता था उसे जब वो कहता था डाॅक्टर बनूंगा । 
भुवन उसे चिढ़ाया भी करता था ये कह कर कि "अबे भोंदू सतरह का पहाड़ा तुझे आता नहीं और सपने तेरे डाॅक्टर बनने के हैं ।" भुवन का हर बार चिढ़ाना उसके संकल्प को और पक्का कर देता था । 
समय पंख लगा कर उड़ने लगा, वक्त की रेल नाॅनस्टाॅप दौड़ती रही । दसवीं के बाद संकेत का परिवार दिल्ली शिफ्ट कर गया । भुवन अपने थिएटर आर्टिस्ट बनने के सपने को साकार करने में जुट गया । साल के दो चार विशेष दिनों पर दोनों की बात फोन से हो जाया करती थी । मगर जब से भुवन ने मुंबई का रुख किया तब से मुंबई ने उसे इतनी भी फुर्सत नहीं दी कि वह अपनी भी खोज खबर रख सके । इस बीच बस एक बार संकेत का फोन आया था जो उसने भुवन को अपनी शादी का न्यौता देने के लिए किया था । मगर मुंबई तो किसी के दुख में शरीक ना होने दे तो भला खुशी में शामिल होने की मंज़ूरी कैसे देती । भुवन जाना चाहता था संकेत की शादी में मगर बहुत दिनों से इंतज़ार कर रहे एक खास दिन का संकेत की शादी के दिन ही से मेल खा जाने की वजह से भुवन चाह कर भी ना जा पाया था । 
आज तेरह साल बाद भुवन किसी काम से दिल्ली आया है । तेरह साल में अपने अपने सपने को पाने की व्यस्तता के बीच दोनों की दोस्ती इतनी भी कमज़ोर नहीं हुई कि एक शहर में होने पर कुछ देर मिलें भी ना । कम समय होने के बावजूद भी दोनों ने मिलने का मन बना लिया था । 
समय कम था इसीलिए भुवन ने संकेत से उसके हाॅस्पिटल में मिलने की ज़िद्द की । संकेत ने बहुत मना किया मगर भुवन को सच में ज़रूरी काम था । भुवन को संकेत ने अपने हाॅस्पिटल का पता दे दिया और भुवन वहाँ पहुंच गया । 
"डाॅ संकेत पुरोहित" नेम प्लेट लगे केबिन के दरवाज़े पर भुवन ने दस्तक दी । अंदर से "कम इन" की आवाज़ आने पर भुवन ने केबिन में प्रवेश किया । भुवन को देखते ही संकेत अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ । दोनों मुस्कुराते हुए गले मिले और अपनी तेरह साल की दूरी को ऐसे खत्म कर दिया जैसे अभी तेरह घंटे ही हुए हों । 
"तो आखिर ज़िद्द पूरी कर ही तू ने ।" संकेत के टेबल पर रखे उसके विज़टिंग कार्डस में से एक कार्ड उठा कर उसे देखते हुए मुस्कुरा कर भुवन ने कहा ।
"हाँ यार, शायद खुद ना भी कर पाता मगर तेरे तानों ने तो पूरा मन पक्का कर दिया था । और मैं अपनी भूख प्यास सब भूल कर इसी में लग गया । नतीजा ये निकला कि आज सपना सच बन गया है ।" अपने चश्मे के पीछे छुपी उन मासूम आँखों में आज एक बार फिर वो नन्हीं चिड़िया पंख लगाये उड़ रही थी । 
बहुत सी इधर उधर की बातें करते हुए भुवन अब अपने पुराने मंस्तीखोरी वाले रंग में आगया था और इसी मस्ती से उसने संकेत से पूछा "तू सच मुच का डाॅक्टर बन गया है या फिर बस डोनेश्न के बल पर पास हो कर सबकी जेब...." भुवन की बात पूरी होने से पहले चपड़ासी चाय के साथ समौसे और जलेबी की प्लेट ले आया था । संकेत को याद था कि भुवन को समौसे जलेबी इतना पसंद था कि उसके लिए वो संकेत की सारी पाॅकेटमनी खर्च करा देता था । 
केबिन का दरवाज़ा खुलते ही चपड़ासी के साथ ही एक बड़ी तेज़ रोने की आवाज़ भी अंदर तक आई थी । आवाज़ सुनते ही संकेत भूल गया कि भुवन वहाँ मौजूद भी है ।
"क्या हुआ नागेश ?" 
"कुछ नहीं सर, एक औरत है उसके बच्चे के सर में गहरी चोट लग गयी है । खून काफी बह रहा था । आप बैठिए वहाँ रिधिमा मैम देख रही हैं ।" कप में चाय डालते हुए नागेश ने सारी बात संकेत को बताई । 
"भुवन एक्सक्यूज़ मी प्लीज़, आई जस्ट कम विद इन टू मिनटस्" नागेश की बच्चे वाली बात के सिवा बाकी बातों को नज़रअंदाज़ करते हुए संकेत इतना कह कर बाहर की तरफ भागा । उसने भुवन के "ओके नो प्राब्लम" कहने का इंतज़ार भी नहीं किया । 
ऐमरजेंसी वार्ड में कुछ देर बात चीत के बाद एक दम सन्नाटा पसर गया । इधर बस आवाज़ थी तो उस बच्चे की माँ की रह रह कर उठ रही सिस्कियों की । लगभग आधे घंटे बाद संकेत अपने केबिन में लौट आया । ऐमरजेंसी में अभी भी कुछ चल रहा था । 
संकेत ने भुवन से मुस्कुरा कर कहा "आई एम साॅरी यार । जाना पड़ा ।" 
"ओह, इट्स योर ड्यूटी यार । बच्चा अब ठीक है ?" 
"हाँ ठीक हो जाएगा डाॅक्टर लोग इलाज में लगे हैं ।" 
"तो तू क्यों आगया । मैं इंतज़ार कर लेता ना ।" 
"अरे नहीं, मैं इलाज नहीं कर रहा था । ये तो डाॅक्टर रिधिमि का केस है ।"
"तो तू क्यों.....।" भुवन का सवाल अधूरा ही रह गया क्योंकि केबिन में एक लेडी डाॅक्टर जो शायद डाॅ रीधिमा थी का प्रवेश हुआ था ।
"ही इज़ आऊट ऑफ डेंजर संकेत ।"
"ईश्वर का शुक्र है । गुड जाॅब रिधिमा ।" 
"सब तुम्हारी वजह से ही हो पाया है वरना मैं तो एक दम बेबस सी हो गयी थी । पता नहीं कैसे तुम हर बार ऐसे मरीज़ों के पास पहुंच जाते हो । खैर तुम बात करो, मैं चलती हूँ । हाँ और जूस पी लेना प्लीज़, नहीं तो कमज़ोरी महसूस होती रहेगी ।" संकेत मुस्कुरा दिया और रिधिमा चली गई ।
"तुझे कमज़ोरी क्यों महसूस होगी ?" 
"अरे कुछ नहीं यार, उस बच्चे का बहुत खून बह गया था और उसे जव्दी से जल्दी उसके ग्रुप का ब्लॅड चढ़ाना बहुत ज़रूरी था नहीं तो कुछ भी हो जाता । मगर दुर्भाग्य से उसका ब्लड ग्रुप हाॅस्पिटल में उपलब्ध नहीं था और बाहर से मंगाने में वक्त लगता जो उस ब्चे के पास नहीं था । मैने जब जा कर रिपोर्ट देखी तो पाया कि उस बच्चे का और मेरा ग्रुप सेम है । बस मैने अपना खून उसे दे दिया । अब वो ठीक है ।" भुवन बिना पलकें झपकाए उसे देखे जा रहा था ।
"जानता है दोस्त, मुझे ये तो यकीन था कि तू ज़िद्दी है और अपनी ज़िद्द पूरी कर के मानेगा । मगर ये नहीं पता था कि तू डाॅक्टर के साथ साथ भगवान भी बन जाएगा ।" भुवन अपनी भावुक्ता को रोक ना सका ।
"अरे नहीं यार इंसान बन जाऊं उतना ही बहुत है । डाॅक्टर को लोग भगवान कहते हैं मगर मैं मानता हूँ डाॅक्टर भगवान नहीं बस सच्चा इंसान बन जाए तो कितनी जाने बचा सकता है । तुझे शायद वो नन्हीं चिड़िया याद हो । उसे मरता हुआ देख कर मेरे मन में टीस उठी थी कि मैं किस तरह का इंसान हूँ जो इसे बचाने के लिए कुछ ना कर पाया । मैने उस दिन तय कर लिया था कि मैं डाॅक्टर बनूंगा क्योंकि एक डाॅक्टर ही है जिसे इंसानियत को बचाने के लिए कुछ ज़्यादा नहीं करना पड़ता बस अपना कर्तव्य ही तो पूरी निष्ठा से निभाना होता है । मैं शुक्रगुज़ार हूँ उस नन्हीं चिड़िया का जिसने छाते जाते मेरे नन्हें मन को उसके जीवन का लक्ष्य बतला दिया ।" भुवन की आँखें संकेत के सम्मान में बहने वाले अपने आँसुओं को रोक ना पाईं । 
अब भुवन के जाने का वक्त हो गया था । संकेत उसे बाहर तक छोड़ने आया । भुवन संकेत से गये मुला और उसका हाथ अपने हाथों में ले कर कहा "भगवान मत बनना, अहंकार आ जाएगा । बस एक डाॅक्टर ही बने रहना, एक सच्चा डाॅक्टर ओ असल में एक सच्चा इंसान होता है । गर्व है तुझ पर मेरे भाई ।" 
संकेत ने मुस्कुराते हुए सर हिलाया और भुवन को हाथ हिला कर अलविदा किया । भुवन आज आया तो था अपने बच्चपन के दोस्त से मिलने मगर जा रहा था एक सच्चे डाॅक्टर से मिल कर । 
********************************************

डाॅक्टर्स डे पर उन सभी डाॅक्टर्स को दिल से नमन जो सच में एक डाॅक्टर हैं और इंसान होने का मतलब अच्छे से जानते हैं 🙏🙏🙏🙏
धीरज झा

COMMENTS

Name

अन्य रचनाएँ,1,अलविदा,5,इश्क़ वाली कहानियां,15,कल्पनाएं,1,कविता,112,कहानियों का कोना,30,कहानी,124,किश्तों वाली कहानियाँ,5,किस्से गाँव के,14,ख़ास लोग,2,खुशियाँ,39,ख़्वाहिशें,2,गज़ल,31,चलते फिरते बस यूं ही,2,चिट्ठियाँ,22,जय जवान,11,तड़प मेरी तुम्हारे लिए,72,दु:ख,16,दुख,45,नमन,3,पापा के लिये,26,पुराने किस्से,3,प्रतिभा की दुनिया,2,फिल्म समीक्षा,3,बस यूं ही,27,बातें काम कीं,59,माँ,18,युवाओं की बात,1,रात के किस्से,6,लघु कहानी,8,लेख,149,वैश्विक,1,व्यंग,35,शायरी,30,सिनेमा,1,सिर्फ तुम्हारे लिये,63,हास्य कथा,1,
ltr
item
क़िस्सों का कोना : नन्हीं चिड़िया
नन्हीं चिड़िया
क़िस्सों का कोना
http://www.qissonkakona.com/2017/07/blog-post.html
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/2017/07/blog-post.html
true
3081115015472439889
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy