​ध्यान रहे आवाज़ एक हल्ला बन कर ही ना रह जाए

#ध्यान_रहे_आवाज़_एक_हल्ला_बन_कर_ही_ना_रह_जाए  पढ़ाई खत्म की तो उसके बाद कुछ करने का धुन सवार हुआ । एक दो जगह जाॅब भी ट्राई की मगर जाॅब हज़म ...

#ध्यान_रहे_आवाज़_एक_हल्ला_बन_कर_ही_ना_रह_जाए 
पढ़ाई खत्म की तो उसके बाद कुछ करने का धुन सवार हुआ । एक दो जगह जाॅब भी ट्राई की मगर जाॅब हज़म नहीं हुई क्योंकि कंप्यूटर जाॅब में मन नहीं लगता था और दूसरा कोई कुछ कहे तो बर्दाश्त नहीं होता, और तब बात और थी क्योंकि सब संभालने को पापा थे इसलिए जाॅब वाला प्लान ड्राॅप कर दिया । तमाम माथा पची के बाद पापा लंगड़े घोड़े पर दांव लगाने के लिए तैयार हो गये और मुझे कंप्यूटर शाॅप खोल दी । 
मिला जुला कर काम अच्छा था क्योंकि तब हर घर में कंप्यूटर इंजीनियर  नहीं मिलता था । मुझे काम मिल गया था और मेरे निठ्ठले दोस्तों को एक अड्डा । उन्हीं दिनों एक बार एक भईया जिनकी मोबाईल शाॅप थी का कंप्यूटर बंद हो गया । भईया पहले से भी जानते थे तो बोले "धीरज यार कैबिनेट उठा कर ला नहीं पाऊंगा क्योंकि मैं अकेला हूँ शाॅप पर तुम ऐसा कर सकते हो कि शाम को दुकान बढ़ाने के बाद मेरे साथ चलो मेरी शाॅप पर वहीं देख लेना ।" मैने भी हाँ कर दी । 
शाम को अपनी दुकान बढ़ाने के बाद भईया को फोन किया वो मुझे अपनी दुकान पर ले गये । आगे उन्होंने मोबाईल शाॅप बनाई थी जहाँ कुछ नये मोबाईल और असेसरीज़ थीं और उसके आगे ही उन्होंने एक केबिन बना रखा था जहाँ कंप्यूटर और मोबाईल रिपेयरिंग के कुछ टूल्स थे । भईया ने मुझे केबिन में बिठा दिया और मैं वहाँ कंप्यूटर चेक कर के जो दिक्कत थी उसे जांच कर ठीक करने में लग गया । पंद्रह मिनट बीते तो बाहर कुछ लड़के दिखे जो शायद बगल के जिम में वर्कआऊट करने आते थे । वो सब आपस में मोबाईल की तरफ दखते हुए बहुत हँस रहे थे । मैने पहले इग्नोर किया मगर जब रामायण के कुछ पात्रों जैसी आवाज़ कान में पड़ी तो मेरा ध्यान अपने आप उधर चला गया । थोड़ा ग़ौर करने के बाद मैने पाया कि वो एक क्लिप था जिसमें रामायण के किसी सीन में व्हाएस ऐडिटिंग कर के रामायण के पात्रों द्वारा गालियाँ बुलवा कर फनी विडियो बनाया था । 
मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो पाया मैं बाहर गया और पहले शांति से देखा कि ये चल क्या रहा है और देखने के बाद मैने उस लड़के जिसने फोन पकड़ा था उसके हाथ से फोन छीन लिया । अचानक फोन छीने जाने पर वो भड़क गया । अपनी तरफ़ से उसे जो जो सही लगा वो वो बोलता रहा और इतनी देर में मैने उसका फोन फारमेट कर के उसे वापिस दे दिया । जब उसने फोन देखा और उसने पाया कि फोन फार्मेट हो गया है तब उसके गुस्से का ठिकाना नहीं रहा । वो जब तक कोई प्रतिक्रिया करता तब तक मैने काऊंटर पड़े पेचकस को उठा लिया । मेरा मार पीट करने का कोई इरादा नहीं था मगर सामने वाला गुस्से में था क्या कर देता इसका मुझे अंदाज़ा भी नहीं था इसीलिए सिर्फ बचाव के लिए मैने पेचकस उठा लिया । इतने में भईया बाहर से आगये और उनमें से एक लड़का बगल के जिम से बाकी लड़कों और जिम कोच को भी ले आया । 
अब शहर मेरा था तो वहाँ थोड़ी जान पहचान मेरी भी तो थी इसी कारण जिम से आये लड़कों में लगभग आधे लड़के मेरी पहचान के थे । जिम कोच से भी मेरी अच्छी पहचान थी क्योंकि एक साल पहले कुछ महीनों के लिए मैने जिम ज्वाईन किया था । अब वो लड़का सबको बताने लगा कि इसने मेरा फोन छीन कर फारेट कर दिया । उन सबने मुझसे वजह पूछी तब मैने जिम के कोच से कहा "पाजी जिम में घुसते ही काऊंटर पर आपने बजरंगबली की फोटो क्यों लगाई है ।"
"अरे यार कैसा सवाल है? सब जानते हैं वो बल के देवता हैं, हर अखाड़े और जिम में उनकी तस्वीर मिल जाएगी ।"
"अगर कोई जिम में घुसते बजरंजबली की फोटो उतार कर जमीन पर फैंक दे तो क्या करेंगे ।"
"मैं ओस हराम दे दा सर पाड़ देना सी ।" 
"जब आप उनकी फोटो का ज़मीन पर फेंके जाना बर्दाश्त नहीं कर सकते तो भला मैं कैसे बर्दाश्त करता जब ये रामायण की बनी एक गंदी क्लिप चला रहा था जिसमें बजरंगबली गालियाँ बोल रहे थे और ये सब हंस रहे थे । पाजी मैं काम काज करने वाला बंदा हो गया हूँ अब ये पंगे वंगे करने का दिल नहीं करता वरना मैं इसका फोन नहीं फारमेट करता इसका सर खोल देता । जो जिम में आता है उसे शरीर बनाने के साथ अपना दिमाग बनाने के टिप्स भी दिया करो पाजी । जिसका रोज़ आशीर्वाद लेकर जिम में घुसते हैं उसी को गालियाँ दे के हंसते हैं ।"
सब की आँखें लड़के पर तन गई थीं और लड़के की आँखें झुक गई थीं । सबने उसका विरोध किया और जिम के कोच ने उससे माफी मंगवाई तब जा कर मन कुछ शांत हुआ । 
अब आप सोचेंगे मैने ये रामकथा आपको क्यों सुनाई तो वो इसलिये सुनाई क्योंकि आप भी जानते हैं आपके आसपास से लेकर आपके मोबाईल स्क्रीन तक हर जगह ऐसे चुटकुले और क्लिप घूमते रहते हैं जिस पर आप भी कभी कभी अपनी चमकदार बत्तीसी दिखा देते हैं । नरेश अग्रवाल जैसे नीच लोगों का मनोबल बस इसलिए बढ़ा है क्योंकि वो जानता है कि ऐसे जोक्स पर लोग पहले से हंसते आ रहे हैं तो भला मैं क्यों ना बोलूं । 
धर्म के नाम पर बस बवाल करने का ही जिम्मा नहीं है हमारा बल्कि उसकी सुरक्षा की ज़िमेदारी भी हमारी ही है और ये सुरक्षा कहीं जा कर नहीं बल्कि अपने आस पास ध्यान रख कर ही करनी है । 
सूअर गुंह में मुंह मारना तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक लोग सड़क किनारे हगना नहीं छोड़ेंगे । यहाँ पर गरिया रहे हैं गरियायिए क्योंकि फेसबुक वाॅल की शोभा के लिए भी तो कुछ होना चाहिए ना मगर उससे पहले इस बात का ज़्यादा ध्यान रखिए कि कहीं कोई हम में से ही हमारा ही मज़ाक तो नहीं उड़ा रहा । फेसबुक चलाने से तो निर्जीव फोन में भी गर्मी आ जाती है पर मज़ा तो तब है जब ये गर्मी सामने से दिखे । आवाज़ महज़ एक हल्ला नहीं बल्कि सुधार बने । 
बस इतना ही कहना था ।
राम राम 
धीरज झा

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