​वो मुस्कुरा दिया (काल्पनिक कहानी )

#वो_मुस्कुरा_दिया (काल्पनिक कहानी ) "ऐ साले भाग यहाँ से, दोबारा दिखा तो टांगें तोड़ दूंगा ।" राम किसन हलवाई ने गल्ले पर बैठै बैठे द...

#वो_मुस्कुरा_दिया (काल्पनिक कहानी )
"ऐ साले भाग यहाँ से, दोबारा दिखा तो टांगें तोड़ दूंगा ।" राम किसन हलवाई ने गल्ले पर बैठै बैठे दिन में चौथी बार उसे धमकाते हुए एक समौसा चला कर मारा होगा । आगे से वह भी वो समौसा चुप चाप उठा कर राम किसन के दुकान की सामने वाली पुलिया पर जा बैठता और समौसे का ऑप्रेशन कर के उसके अंदर का आलू चुन चुन कर खा लेता और ऊपर की पपड़ी उसके द्वारा समौसे के आप्रेशन के दौरान उस पर पैनी नज़र रखे चितकबरे कुत्ते को खिला देता । 
रामकिसन उसे आदत नहीं लगाना चाहता था इसीलिए प्रयार से नहीं बोलता था और उसे भूखा उससे देखा नहीं जाता इसीलिए वह गालियों के साथ साथ एक समौसा उसकी तरफ फैंक देता । तकरीबन चार साल कुछ महीनों से यह खेल चल रहा था । जबसे वो आया था उसके हाथ में एक झोला था जो अब कई जगहों से फट चुका था । झोले में दो जोड़ी कपड़े जिन्होंने जगह जगह से अपनी आज़ादी के लिए मुहीम छेड़ दी थी और एक फोटो जो किसी लड़की की थी । ना जाने किसकी थी मगर वो दिन में एक बार उस फोटो को ज़रूर देखता और और उस पर दो थपकियाँ मार कर उसे चूम लेता फिर उसे झोले में रख लेता ।  
काॅलर तक बंद बटन वाली नीली शर्ट जो अब बहुत ग़ौर से देखने पर नीली नज़र आती थी और एक सफेद पैंट जिसकी सफेदी को गुज़रे ज़माना हो गया था पहन कर रखता । सर्दियों में जब उसकी ठिठुर कर मरने वाली हालत हो गई थी तब रामकिसन ने चार मोटी गालियों के साथ एक कंबल उसे मुफ्त दिया था । उसकी घनी दाढ़ी में उसकी भूरी आँखें कोयले की खान में कच्चे हीरे सी चमकती थीं । कोई नहीं जानता था वो कौन था कहाँ से आया था । असल में वो रामकिसन और उस चितकबरे कुत्ते को छोड़ कर और किसी के लिए वहाँ था ही नहीं । 
वो लोगों के लिए वक्त बिताने का अच्छा साधन था । जो भी रामकिसन की दुकान पर चाय पीने आता वो हिंदू मुस्लिम, देश के बिगड़ रहे हालात, नारीवाद, कब्ज की समस्या, किसका लौंडा हाथ से बेहाथ हो रहा है और किसकी लौंडिया उसका नाम बदनाम करने वाली है आदि विषयों पर गहन चर्चा के साथ इसकी चर्चा भी एक बार ज़रूर कर ही देता । किसी का मानना यह था कि यह बंगलादेशी जासूस है, कोई उसकी दाढ़ी को देख उसे पाकिस्तान का जासूस ठहरा देता, ऐक ने तो हद ही कर दी जब उसे देश के खुफिया विभाग का मुखिया बना दिया । मगर उस पर लगाई जाने वाली अटकलें सबकी चाय की गिलास के साथ खत्म हो जातीं और अगली बार फिर शुरू से शुरू होतीं । मगर वो इन सबसे अंजान अपनी धुन में मस्त रहता । 
"रामकिसन, बता रहे हैं तुमको तुम फंसोगे किसी दिन । ये साला संपोला नहीं मुझे ये काला नाग लगता है डंसेगा ।" लल्लन ने चाय का आंखरी घूंट भर कर टूटी छननी से चाय की पत्ती मुंह में आजाने की वजह से अजीब सा मुंह बना कर उधार चाय के बदले अपनी बहुमुल्य राय रामकिसन को देते हुए कहा ।
"तो हम कौन सा इसे पाले हैं । हमको क्या पता कौन है कहाँ से आया है ।"  जांघों तक उठी हुई लुंगी वाली टांग को आगे तक फैला कर उबल रहे दूध में झरनी मारते हुए रामकिसन ने अपनी सलाह दी । 
"रहता तो तुम्हारी दुकान के पास ही है ना ? सोता भी तो यहीं है । यह साले इंसान नहीं धरती के बोझ होते.... ।" लल्लन की बात आधे में ही रह गयी इतने में सामने शोर सुनाई दिया ।
"काहे का शोर है लल्लन भाई ?" 
"अरे कुछ नहीं वो विधायकवा के लौंडे होंगे । इन छिनरों का तो रोज़ का हो गया है । किसी भी आती जाती लईकी को छेड़ देते हैं । परसो एक को कोतवाली के पास ही छेड़ दिये और बाद में पता चला लईकिया गायब हो गयी । सबको पता है इन्सीं का काम होगा मगर कोन जाए साँप के बिल में हाथ डालने । हम कहते हैं इतना ही जबानी उबलता है तो ससुरे कोना खोजें कोई । ये सबके सामने तमासा पसारने का का जरूरत है ।" चाय के बाद खईनी पर ताल मारते हुए लल्लन ने अपनी बात कही ।
"अरे देखना चाहिए, कोई अपनी लईकी ना हो । इन सालों का मन बड़ा बहक...." 
"चुप चाप अपना धंधा करो जादा नागिरी मत झाड़ो बरना कल से विधयकवा जीना मुहाल कर देगा ।" रामकिसन को डांटते हुए लल्लन ने चुप करा दिया । शोर अब एक लड़की की चीख़ चिल्लाहटों में बदल गया था । रामकिसन अब बर्दाश्त ना कर पाया और जैसे ही उधर जाने को उठा वैसे ही एक भयानक चीख़ के साथ कुछ देर के लिए माहौल एकदम शांत हो गया । 
रामकिसन जल्दी से भीड़ के पास पहुंचा तो देखा कि एक लड़की सिसक रही है और नीचे कोई तड़प रहा है जिसके सर पर अभी अभी किसी भारी चीज़ से वार किया गया है और वो खून से सनी भारी चीज़ यानी लोहे की राॅड हाथ में लिये वो सामने खड़ा है । शायद उसने अचानक से उस लौंडे के सर पर वार किया था जो उस लड़की के साथ ज़बरदस्ती कर रहा था । जब भीड़ को कुछ समझ आया तो भीड़ में अफरातरी मच गई । लल्लन भी तमाशा देखने पहुंच गया और लल्लन को देखता वो लड़की लल्न से लिपट गई । लल्लन ने देखा तो वो उसी की बेटी थी । लल्लन अवाक था । 
वो जो साँप दिख रहा था लल्लन को उसने उसकी बेटी को बचा लिया था । विधायक के लड़के की जान गई थी इसीलिए पुलिस को वहाँ पहुंचने में वक्त ना लगा । थोड़ी ही देर में वो जो अभी तक सबके लिए किसी ना किसी गिरोह कि ऐजेंट था वो हथकड़ियों में गिरफ्तार था । 
पुलिस ने उसे जीप में बिठाया । वो बड़े आराम से जीप में बैठ गया और अपने झोले से तस्वीर निकाल कर उसे ग़ौर से देखने लगा । इन चार सालों में वो पहली बार मुस्कुराया था । आज उसने उस तस्वीर पर थप्पड़ नहीं बरसाये बस उसे बड़े सुकून से देखे जा रहा था । 
रामकिसन की रोती आँखें उसकी हरकतों को ताक रही थीं । उसने उसे आज से पहले इतना संतुष्ट कभी नहीं देखा था । जाते जाते उसने अपनी भूरी आँखों से एक बार रामकिस्न को देखा और मुस्कुरा दिया । पुलिस की जीप उस बोझ को अपने साथ ले खयी और ज़िम्मेदार लोग तमाशा देख कर अपने अपने घर चले गये । 
धीरज झा

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क़िस्सों का कोना : ​वो मुस्कुरा दिया (काल्पनिक कहानी )
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