हर 'वो' जिससे सीखा उन सबको नमन

हर 'वो' जिससे सीखा उन सबको नमन   __________________________________________ "गुरु" लिखने बोलने में छोटा सा शबाद मगर इस शब्...

हर 'वो' जिससे सीखा उन सबको नमन  

__________________________________________

"गुरु" लिखने बोलने में छोटा सा शबाद मगर इस शब्द के मायने इतने बड़े हैं कि इसके बिना पूरा ब्रह्माण्ड ही अर्थहीन है । हर वो विशिष्ट व्यक्ति जिसका नाम हम बड़े अदब से लेते हैं उन सबने अपने गुरुओं से ही सीखा और उनके गुरुओं ने अपने गुरुओं से । ऐसे ही हर कोई किसी ना किसी से सीखता आया और हर सिखाने वाले ने अपनी पूरी क्षमता से अपने शिष्य को तराशा । 
आज गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर हर किसी ने अपने अपने गुरुओं के प्रति अपना आदर व प्रेम दर्शाया । मगर मैं सोच में पड़ा हूँ कि मैं किस गुरु को धन्यवाद कहूँ ? मेरी आज तक की ज़िंदगी में कौन ऐसा था जिसने मुझे कुछ अलग कुछ अनोखा सिखाया ? मगर मुझे ऐसा कोई एक चेहरा नज़र नहीं आता । लेने को मैं यहाँ किसी भी प्रतिष्ठित का नाम ले उन्हें अपना झूठ मूठ का गुरु बना कर, ढेर सारी तारीफ़ कर के उन्हें फुला दूँ मगर ये सही ना होगा । आज के दिन ही झूठ बोल दिया तो फिर गुरुपूर्णिमा का महत्व ही क्या रह गया । 
मेरे लिए किसी एक को गुरु कहना सही नहीं रहेगा क्योंकि शायद मैं इतना उलझा था कि किसी एक ने मुझे सुलझाने का ज़िम्मा ही नहीं लिया । मुझे ज़िंदगी के आज तक बिताए हर दिन कोई ना कोई नया गुरु मिला और हर मोड़ पर कोई ना कोई बिना मेरे कहे मुझे ज़िंदगी जीने का नया तरीका सिखा गया । 
सबसे पहले मैने अपने पिता से सीखा, अपनी धुन का पक्का होना, उन चार लोगों को जो हमेशा कुछ कहते हैं पूरी तरह नज़र अंदाज़ कर के जो मन सही माने वो करना आदि सब मुझे पापा से सीखने को मिला । 
हर परिस्थिती का डट कर सामना करना, हंसते हंसते त्याग करने की कला, हिम्मत ना हारना ये सब मैने माँ से सीखा और आज भी सीख रहा हूँ । 
हर हारे हुए इंसान से अपनी कमियों को स्विकार करना सीखा मैने, हर जीते हुए से सीखा कि यह जीत अंतिम नहीं । हर गिरये हुए से सीखा कि क्यों वो गिरा कहाँ उसे संभलना था । अपनी चोटों से सहने का हुनर सीखा । अपने दर्द से सीखा कि कैसे चुप रहा जाता है । 
वो जो मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ख्वाहिश है उससे मैने ये सीखा कि प्रेम कितना खूबसूरत है और उसे कैसे निभाया जाता है । उससे सीखा कि जो अपने अंदर है उसे निखार कर बाहर सबके सामने कैसे लाया जाता है ।
समस्याओं से घिर कर बेचैन हो जाने पर काली स्याह रात ने मुझे सिखाया कि शांत रहो सवेरा ज़रूर निकलेगा । बारिश में भीग रहे कुत्ते से सीखा कि इंसान बिना छत के भी ज़िंदा रहते हैं । अपने बच्चे की भूख की खातिर सबके आगे हाथ फैलाने वाली उस माँ से सीखा कि ज़िंदगी भले ही अपने शानदार कमरे से ही बेहतरीन सी लगती है मगर इसका असल रूप बड़ा।भयावह है पर सामना करना पड़ता है हर हाल में । 
कुछ लोगों के लिए मैने जी जान लगा कर काम किया, उनके प्रति पूरी 

ईमानदारी बरती मगर बदले में उन्होंने मेरा अच्छे से इस्तेमाल किया मगर मैं उनका भी शुक्रगुज़ार हूँ क्योंकि वो मुझे ये बता गये कि मुझ में भी ऐसा कुछ है जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है, मैं तो बेकार में ही खुद को निकम्मा समझता रहा । 
लिखना मैने उनसे सीखा जिन्होंने मेरे अहसासों को सुन कर उनकी हंसी उड़ायी । मैने उन्हें सुनाने से बेहतर कागज़ को अपना सारा हाल कह देना बेहतर समझा । मेरे कुछ अपनों ने मुझे सिखाया कि वास्तव में यहाँ अपना कोई होता ही नहीं । बुरे वक्त ने सिखाया कि जो हो सो तुम हो, अगर परेशानियाँ तुम्हारी हैं तो लड़ना भी तुम्हें ही होगा, दूसरों से उम्मीद लगाना छोड़ दो । 
और भी बहुतों हैं जिन्होंने हर रोज़ मुझे कुछ ना कुछ नया सिखाया । कुछ एक नाम इस आभासी दुनिया के भी हैं जिनसे बहुत कुछ तो नहीं मगर कुछ कुछ ज़रूर सीखा । आज गुरुपुर्णिमा के शुभअवसर पर मैं उन सभी को नमन करता हूँ जिन्होंने जाने अंजाने में मुझे कुछ ना कुछ सिखाया, भले ही वो बुरा सबक ही क्यों ना हो 😊 
सबके अंत में मैं अपनी आत्मा को नमन करता हूँ जिसने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया और सही सही ये बताया कि मुझे किससे क्या सीखना चाहिए और किससे क्या नहीं 😊 
धीरज झा

COMMENTS

Name

अन्य रचनाएँ,1,अलविदा,5,इश्क़ वाली कहानियां,15,कल्पनाएं,1,कविता,112,कहानियों का कोना,30,कहानी,124,किश्तों वाली कहानियाँ,5,किस्से गाँव के,14,ख़ास लोग,2,खुशियाँ,39,ख़्वाहिशें,2,गज़ल,31,चलते फिरते बस यूं ही,2,चिट्ठियाँ,22,जय जवान,11,तड़प मेरी तुम्हारे लिए,72,दु:ख,16,दुख,45,नमन,3,पापा के लिये,26,पुराने किस्से,3,प्रतिभा की दुनिया,2,फिल्म समीक्षा,3,बस यूं ही,27,बातें काम कीं,59,माँ,18,युवाओं की बात,1,रात के किस्से,6,लघु कहानी,8,लेख,149,वैश्विक,1,व्यंग,35,शायरी,30,सिनेमा,1,सिर्फ तुम्हारे लिये,63,हास्य कथा,1,
ltr
item
क़िस्सों का कोना : हर 'वो' जिससे सीखा उन सबको नमन
हर 'वो' जिससे सीखा उन सबको नमन
क़िस्सों का कोना
http://www.qissonkakona.com/2017/07/blog-post_9.html
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/
http://www.qissonkakona.com/2017/07/blog-post_9.html
true
3081115015472439889
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy