मन से आभारी हूँ इन उदासियों का

आ ज कल कुछ लिख नहीं पा रहा । शायद मेरे शब्द मेरी मायूसियों के बोझ तले दब गये हैं । ये कुछ नया नहीं, अक़सर मेरे साथ हो जाता है । पहले डर...

ज कल कुछ लिख नहीं पा रहा । शायद मेरे शब्द मेरी मायूसियों के बोझ तले दब गये हैं । ये कुछ नया नहीं, अक़सर मेरे साथ हो जाता है । पहले डर जाता था ये सोच कर की कहीं इसी तरह मेरे अंदर की वो आग बुझ ना जाए जिसे जलाने के लिए मैने अपनी अनगिनत छोटी छोटी खुशियों की आहूति दे दी । बहुत कुछ खो कर इस तरह से जलना सीखा है । मैं कभी नहीं चाहता कि मैं शांत हो जाऊं । मुझे शांत होना ऐसे लगता है जैसे मैं एक मुर्दा बन चुका हूँ । ऐसा मुर्दा जो सबकी गतिविधियों को देख सुन तो सकता है मगर अपनी तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता । मुझे मरने से ज़्यादा डर ज़िंदगी के रहते हुए मरने से लगता है ।

आप अपने मन से कुछ नहीं चुन सकते, आपको देखने, समझने और जानने के बाद नियती द्वारा आपके लायक काम के लिए आपको चुना जाता है । उसके बाद आपकी क्षमता और मेहनत ही ये साबित करती है कि नियती का आपको ले कर चुनाव सही था या गलत । संसार में हर किसी का सोचने समझने और काम करने का तरीका अलग अलग है । अक़सर लगभग समान तरीकों से काम करने वाले लोग किसी भिन्न तरीके से काम कर रहे इंसान की तरफ देखते हुए उसका उपहास करते हैं । उन्हें ये गलतफहमी हो जाती है कि उनका तरीका सही और सामने वाले का गलत है । मगर असल में ऐसा होता नहीं । ये संसार सबका है, यहाँ हर किसी को नियमों का पालन करते हुए अपना काम अपने तरीके से करने की पूरी आज़ादी है । 

जहाँ तक मैं मानता हूँ ज़िंदगी में मायूसी, दुःख, ठहराव और परेशानियों आदि का बड़ा महत्व है । इनके बिना इंसान सफल नहीं हो सकता । यहाँ कोई भी इंसान माँ के गर्भ से हर काम में पारंगत हो कर जन्म नहीं लेता । यहीं इसी संसार में उसे सब कुछ देख सुन समझ कर सीखना होता है । मगर वो इंसान जो किसी भी गुण को सिखते ही लगातार बिना रुकावट के अपनी सफलताओं की कामना करता है, मैं उसे सबसे बड़ा मूर्ख मानता हूँ । ऐसे लोग ज़्यादा दूर तक नहीं जा पाते । एक हार उनके अन्दर कुछ बेहतर करने की ललक को मार कर उन्हें अपाहिज बना देती है । ये हार सीधे उसके अभिमान पर हमला करती है और इस हमले से लड़खड़ाया अभिमान उसके अन्दर की हिम्मत को तोड़ देता है और हिम्मत के टूटते ही वो इंसान उस हाल में चला जाता है जहाँ से लड़ने के लिए फिर खड़ा हो पाना लगभग असम्भव सा हो जाता है ।

मैं अकेला चला था अपने सफ़र पर मेरा हमसफ़र दिन के उजाले में मेरे साथ नहीं चल सकता और बाक़ी किसी राहगीर को मेरी कोई फ़िक्र नहीं थी । मैंने अकेले ही चलने की ठानी, इस रास्ते पर कुछ दूर चलने के बाद ही मैं समझ गया था कि यहाँ कोई आपको आगे का रह तब तक नहीं बताएगा जब तक आपसे उसे कोई फायदा ना दिखे, मैं भी ढीठ था मैंने भी ठान ली किसी से रास्ता ही नहीं पूछूँगा । अकेला ही बढ़ता रहूँगा, गलत रस्ते जाऊंगा फिर लौट कर आऊंगा, वहां से जो सीखा उसके दम पर फिर अपने रस्ते पर बढूँगा, मैंने गलतियों को भी सर से लगाया क्योंकि सही क्या है इसका ज्ञान भी मुझे इन्हीं से हुआ । रास्ता लंबा है, थकना, मायूस होना, मन में लौट जाने के ख़याल आना, और डाल से किसी सूखे पत्ते की तरह थहरा कर एक जगह बैठ जाना आम बात थी । पहले ऐसा कुछ होते ही दर जाता था मन में ये सोच कर हर तरफ खौफ़ फ़ैल जाता था कि कहीं मैं हिम्मत हार गया, कहीं मुझसे अब और ना चला गया, कहीं मुझे लौटना पड़ा तो मैं क्या करूँगा, मेरे सरे सपनों का क्या होगा । मगर अब नहीं डरता अब मुझे समय समय पर ऐसी मायूसी और ठहराव अच्छा लगता है क्योंकि मुझे इस मायूसी में समय मिलता है सोचने का कि आखिर कमी कहाँ है, मुझे क्या बेहतर करना चाहिए खुद को और बेहतर बनाने के लिए । मैं पूरा समय देता हूँ अपनी उदासियों को जी भर कर फ़ैल कर अपने चेहरे पर सोने का, इतना कि वो आराम कर कर के इतना थक जाएँ कि उन्हें मेरे मन से अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़े । और फिर मैं उठता हूँ कुछ नया, कुछ अलग, कुछ ऐसा करने के लिए जो मुझे खुद को चैन और सुकून दे । जब तक अपना काम खुद के मन को ना भाए तब तक उसके दूसरों को पसंद आने का सोचना भी बेकार है । 

इस समय भी शब्द उदास हैं, मन मायूस और थका हुआ है, और मैं खुश हूँ क्योंकि ये ठहराव है कुछ नया सोचने के लिए पहले से कुछ बेहतर करने के लिए । बहुत बद्नसीबियों को झेलने के बाद ये अहसास हुआ कि सच में मैं बहुत खुशनसीब हूँ जो मुझे जीवन का हर रंग देखने और उसे जीने का मौका मिला, अब मुझे किसी भी परिस्थिति में फंसे किसी भी इन्सान की मनोदशा समझने और महसूस करने में ज़्यादा दिक्कत नहीं होती । कुछ कर ना सकूँ मगर कम से कम उसे महसूस कर के उसका भर रत्ती भर तो कम कर ही सकता हूँ ।

इतनी बड़ी दुनिया है इसमें अगर दो चार लोग ही मेरे लौट आने का इंतज़ार करें वही बहुत बड़ी बात है मेरे लिए और उन्हीं के लिए हर बार कुछ बेहतर हो कर लौटने की हिम्मत मिलती है । बस वो दो चार लोग मेरा इंतज़ार जरूर करें मैं जल्द ही लौट आऊंगा 

धीरज झा

Keywords : Hindi Article, Me My Self, I Will Come Back, Struggles, Love Sadness 

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क़िस्सों का कोना : मन से आभारी हूँ इन उदासियों का
मन से आभारी हूँ इन उदासियों का
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