उस दूसरे जहान पापा के नाम चौथी चिट्ठी

प्र णाम पा, देखते देखते दो साल गुज़र गए पा, मगर लगता तो ऐसे ही है जैसे सब अभी अभी हुआ हो । अभी अभी आप यहीं थे, हँसते हुए, हम सब की शरारतों...

प्रणाम पा,

देखते देखते दो साल गुज़र गए पा, मगर लगता तो ऐसे ही है जैसे सब अभी अभी हुआ हो । अभी अभी आप यहीं थे, हँसते हुए, हम सब की शरारतों से दुखी, पलंग की मुश्त से सर टिकाए कुछ सोचते हुए और अभी अभी आपको निर्जीव सा अपने सामने लेटा हुआ देख रहा हूँ । यादें सच में बहुत तेज़ होती हैं एक पल में कहाँ से कहाँ पहुंचा देती हैं ना ।

कल तीसरी दिवाली आपके बिना बिताई है । याद है पा दिवाली के दिन आपका देर से घर लौटना हुआ करता था और हम सब बार बार नीचे आ कर देखते कि पापा आये या नहीं । हाँ, ये बात अलग है कि तब आपके लिए नहीं बल्कि आप जो मिठाईयां और बाक़ी कुछ जो अच्छा खाने को लेट थे उसकी लालच में ललचाई आँखें आपको धुन्धती थीं । मगर अब जब ऑंखें रौशनी में डूबी खुबसूरत रात, रंग बिरंगे नए पहनावे और स्वादिष्ट पकवानों को दर किनार कर के सिर्फ आपका इंतज़ार करती हैं तब आप कहीं नज़र नहीं आते । 

हमेशा किसी ना किसी तरह आप हमारी बातों का केंद्र बन जाते हो । मैं और माँ अक्सर आपकी बुराइयों और अच्छाइयों की चर्चा करते रहते हैं । कैसे आप एक बार कोई सब्जी का स्वाद अपनी ज़ुबान को रटा कर बार बार माँ से वही सब्जी बनवाते और कहते कि “ना इसमें वो स्वाद नहीं जो परसों वाली सब्जी में था ।” माँ परेशान हो जाती थीं ये कह कर कि अब वो स्वाद ऐसा था ये भला कैसे पता लगेगा । और माँ को तंग कर के आप हंसा करते थे । कई बार आपको बच्चा बन जाते देखा है हमने । छोटी छोटी बातों के लिए ज़िद्द कर देना, बिना बात ही मुंह फुला लेना । और जब ज्ञान बाँटना तो ऐसा बाँटना कि वहां बैठे एक भी इंसान का ध्यान आपकी बातों से हटता ही नहीं था ।

आप साहित्य की पूरी किताब थे मेरे लिए, आपके पास हर तरह के किस्सों से ले कर कहानियों तक का भंडार था । कैसे आपको एक बार भूत दिख गया था ना मगर असल में वो भूत नहीं बल्कि तेज़ हवा के कारण लहरा रही बोर की सफ़ेद पल्ली थी जो अधेरे में किसी दानव जैसी लगती थी । आपके बचपन से अब तक के सभी किस्सों ने हमेशा कुछ न कुछ सिखाया ही था हमें । ज़िन्दगी का बड़ा गहरा अनुभव था आपके पास, अ से अकार पकड़ लिया करते थे । मुझे अब भी हंसी आती है उस बात को याद कर के जब घर में माँ की दवाई की एक बोतल टूट गयी थी और मेरे मुंह से निकल गया था कि इसकी महक बियर जैसी है । आपने झट से सवाल कर दिया था कि “तुमको कैसे पता बियर कि महक कैसी होती है ?” मैं ग़रीब बेमतलब ही फंस गया था जब तक मैंने कसम ना खाई आप मने ही नहीं कि ये बस मुझे ऐसे ही पता है, मेरा व्यक्तिगत कोई संबंध नहीं बियर से । 

आप पिता बने, ये दुनिया का नियम था, मगर आप हमारे पिता बने ये हमारा सौभाग्य था. उस वक़्त जब मैं उस उम्र की ओर बढ़ रहा था जहाँ पास कुछ ना होते हुए भी सबसे अधिक घमंड होता है । वो घमंड मेरे सर भी चढ़ा, एक वक़्त ऐसा भी आया जब मुझे लगा कि मुझे किसी की ज़रुरत नहीं । अगर संसार समंदर है तो मैं अपने जीवन की कश्ती खुद ही चला सकता हूँ । आपने मेरे हाल को समझा और खुद के कड़क मिजाज़ को नरम करते हुए बस किनारे पर खड़े मुझे देखते रहे । लेकिन किनारे पर खड़े हो कर भी आप हमेशा तैयार रहे कि जब कभी मेरी कश्ती डूबने लगी आप झट से पानी में कूद कर मुझ तक पहुंचे और मुझे नया जीवन दिया । सबसे बड़ी बात ये थी कि आप पिता हैं और मेरे लिए ये सब कर रहे हैं इस बात को आपने हम पर अहसान समझने की बजाए अपना कर्तव्य समझा । कभी ये चीज़ ज़ाहिर नहीं होने दी कि मैं तुम सबके लिए क्या कुछ करता हूँ और तुम्हे इसके बदले मेरे लिए क्या कुछ करना है । 
Pic Source Father
जब आप थे और मैं आपसे दूर था तब भी इतना ही तडपता था जितना आज आपके ना होने पर । मगर अब मन दुखी नहीं करता, बस आपको याद कर के मुस्कुरा लिया करता हूँ । हाँ दुःख है तो बस इसी बात का कि आपने बहुत कुछ किया मगर हमें करने का मौका नहीं दिया । जनता हूँ अगर अभी आप होते तो मन ही मन हम सब को देख कर खुश होते, शायद कहीं से देख कर हो भी रहे हों लेकिन हम तो आपको मुस्कुराता नहीं देख सकते ना ।

खैर भावुक नहीं करूँगा, आज के दिन ही आप चले गए थे छोड़ कर तो आम दिनों से कुछ ज़्यादा याद आगए इसीलिए आपको एक और चिट्ठी लिख दी । पता नहीं आप तक पहुंचे या ना पहुंचे मगर मैं तो अपने की बात पूरी कर लूं । बाक़ी यहाँ सब ठीक ही है बस छोटे की तबियत ज़रा सी बिगड़ी है लेकिन जल्द ही वो ठीक हो जायेगा । आप तो जानते हैं वो आपका बहादुर बेटा है । उसने सबको जीवन दिया तो भला उसे कुछ कैसे हो सकता है । जानते हैं पा आपके इस तरह चले जाने के सदमे से शायद हम सब उभर ना पते इतनी जल्दी मगर हम सबने हम सब में आपको तलाश लिया है इस लिए आपकी कमी उस हद तक नहीं महसूस होती ।

अगर चिट्ठी मिल जाए तो एक बार नींद में आ कर बता दीजिएगा । बाक़ी चिंता की कोई बात नहीं, यहाँ सब ठीक है आप बस अपना ख्याल रखिएगा ।

हम सब आपको बहुत प्यार करते हैं और हाँ कितना भी झूठ क्यों ना बोल लें मगर आप बहुत याद आते हो पा 

आपका अजीब सा बेटा

धीरज झा 

 Keywords : A Letter For Father, Hindi, Pita Ke Naam Ek Patr, Love, Miss U Dad

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क़िस्सों का कोना : उस दूसरे जहान पापा के नाम चौथी चिट्ठी
उस दूसरे जहान पापा के नाम चौथी चिट्ठी
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