करवाचौथ व्रत

आ ज करवाचौथ का व्रत है, सबको पता है कि हिंदू मान्यता में महिलाओं के लिए इस व्रत का कितना महत्व है । मगर जब से सोशल मीडिया का युग आया है...


ज करवाचौथ का व्रत है, सबको पता है कि हिंदू मान्यता में महिलाओं के लिए इस व्रत का कितना महत्व है । मगर जब से सोशल मीडिया का युग आया है तब से इस व्रत को ले कर काफ़ी आलोचनाएँ होने लगी हैं । सिर्फ पत्नियाँ ही पतियों कि लंबी उम्र के लिए व्रत क्यों करें ? ऐसे सवालों के बिना तो अब ये व्रत पूरा भी कहाँ होता है । सोचने वाली बात भी है कि बेटा हो, भाई हो, या फिर पति हो सबको लंबी उम्र दिलाने का ठेका महिलाएं ही क्यों लें ? क्यों वो अपने शरीर को कष्ट दे कर किसी और के लंबी उम्र की दुआएं मांगे ?

मगर एक बात ये भी सोचने वाली है कि क्या महिलाओं को ये सभी व्रत करने के लिए विवष किया जाता है ? क्या उनके सामने उनके पति ये शर्त रखते है कि अगर तुमने करवा चौथ ना किया तो हमारा रिश्ता खत्म ? मुझे तो नहीं लगता ऐसा होता है, तो अगर महिलाओं कि अपनी मर्ज़ी है तो फिर इस व्रत के लिए इतना हो हल्ला क्यों ?

सबसे पहली बात ये देखी जाये कि जितने भी व्रत हैं जो पति या बेटे के लिए रखे जाते हैं उसे करने के लिए हिंदू धर्म की सभी महिलाएं बाध्य हों ऐसा कोई भी नियम नहीं है । जैसे कि करवा चौथ बिहार में नहीं मनाया जाता था, मेरी माँ ने खुद ये व्रत पंजाब आने के बाद शुरू किया । अब गाँव में भी चाची, भाभी और आस पास की सभी सुहागिन महिलाएं ख़ुशी ख़ुशी ये व्रत करती हैं । छठ व्रत जो, जितिया व्रत, तीज का व्रत ये किसी एक प्रदेश से चल कर धीरे धीरे पूरे देश में प्रचलित होने लगा । इसे देख कर आप ये तो कभी नहीं कह सकते कि ये सब ज़बरदस्ती थोपा गया है ।

महिलाएं भावुक होती हैं, इनका मन किसी भी तरह कि आस्था से जल्दी जुड़ जाता है । भले ही पुरुषों के मुकाबले उनका शारीरिक बल कम हो मगर मानसिक बल पुरुषों से ज्यादा होता है । उन्हें बस अपने घर परिवार के सुख शांति की चिंता होती है । बस इसी कारण वो ख़ुशी ख़ुशी ये सरे व्रत कर लेती हैं । ऐसा भी नहीं कि इन सभी व्रतों के पुन्य प्रताप से उनके बेटे और पति अजर अमर हो जाते हैं । मृत्यु तो सबके भाग्य में लिखी गयी है ।

मेरी माँ ने अठाईस साल ये व्रत किया मगर पापा फिर भी असमय ही हमें छोड़ कर चले गए । मगर अब भी माँ वो सरे व्रत करती है जो बेटों की लंबी उम्र के लिए किया जाता है । ये थोपा हुआ नियम नहीं है, ये बस महिलाओं की आस्था है, एक तरह से उनका विश्वास है, उनकी अपनी ख़ुशी है । 

जैसे पति या पिता घर चलने को अपना कर्तव्य मानता है ठीक वैसे ही हिंदू मान्यता में विश्वाश रहने वाली महिलाएं इन व्रतों के माध्यम से घर के हर सदस्य के दीर्घायु होने की कामना करना अपना कर्तव्य मानती है । जिनसे ये व्रत नहीं होते वो आराम से छोड़ सकती हैं, भला कोई बंदिश थोड़े ना है । हाँ अगर उन्हें ये डर है कि आस पास के लोग क्या कहेंगे तो ये उनकी कमी है । आप जिस चीज़ को बदलना चाहती हैं उसके लिए किसी और का मुंह क्यों देखना । मगर हाँ ये सोच बस अपने तक राखी जाये तो अच्चा है, जिन महिलाओं ने बड़े ही विश्वास के साथ ऐसे व्रत करने की हिम्मत की है उनकी हिम्मत ना तोड़ी जाए ।


बाक़ी ऐसा भी नहीं कि करवाचौथ व्रत सिर्फ महिलाओं के भूखे प्यासे रहने तक ही सीमित है, इसमें पुरुषों के प्रति भी कुछ दायित्व बनता है । अगर आपकी पत्नी आपके लिए इतना कठिन व्रत कर रही हैं तो आपका ये फ़र्ज़ है की आज के दिन का अधिकांश समय आप उनके नाम करें । बहुत से छोटे छोटे काम होते हैं आप उनमे हाथ बंटा सकते हैं । आपका अगर ऑफिस जाना बहुत ज़रूरी है तो आप ऑफिस से दो चार बार फ़ोन कर के पत्नी जी का हाल समाचार पूछ लें उसी में उनको बल मिल जाएगा । आपकी पत्नी इस दिन आपसे बस स्नेह और अपने लिए थोड़ी सी चिंता मात्र ही चाहती है । आखिरकार आप ही तो उनकी हिम्मत हैं ।


बाक़ी अंत में अपनी प्राणप्यारी से एक बात ज़रूर कहना चाहूँगा कि ये सब जो मैंने लिखा है ना ये बस ऐसे ही है तुम इन सब पर ध्यान मत देना और बड़का बिंदी वाली आंटी जी की बात मानते हुए हाथ में नारीवाद का झंडा ले कर मुझे साफ़ मन कर देना कि हम ना रहेंगे भूखे प्यासे । सही भी है यार मेरी लंबी उम्र के लिए तुम काहे भूखी मरोगी । और इसी बहाने तुम्हारी नयी साड़ी, जीएसटी की सबसे ज्यादा मार झेल रहे मेकअप प्रोडकट्स, मेहँदी लगाने, मेरे द्वारा दिए जाने वाले उपहार जैसी कई चीजों का खर्चा भी तो बचेगा । ऐसा नही हो जाये ना कि तुम हमारी लंबी उम्र के लिए व्रत रखती रहो और हमारी जेब तंग होती जाए । तो सही रहेगा कि तुम ये व्रत ना ही करना । अरे मज़ाक था पगली, करो करो तुम व्रत करो हम दिल खोल कर खर्चा करेंगे । प्यार किया तो खर्चे से डरना क्या ।

सभी को करवा चौथ व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं । ईश्वर आप सब को ये व्रत करने के लिए भूख प्यास की इच्छा से लड़ने की शक्ति दें ।


धीरज झा 

Keywords : Hindi Story, Love Story, Karwachuth, Fasting, My Life My Choice 

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