परदेस में छठ व्रत (पहला भाग खरना)

सच्ची आस्था सच में चुंबक की तरह होती है, श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच ही लेती है । मुझे याद है जब करीब तेरह साल पहले माँ ने यहीं पंजाब मे...

सच्ची आस्था सच में चुंबक की तरह होती है, श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच ही लेती है । मुझे याद है जब करीब तेरह साल पहले माँ ने यहीं पंजाब में छठ व्रत शुरू किया था तब हमें बहुत ढूंढने के बाद शहर के बाहर एक ट्यूबेल का पता चला था जहाँ कुछ बिहारी बंधु छठ मनाया करते थे । पहले साल जब डंड देने पहुंचा घाट पर तो वहाँ आस पास के स्थानियों लोगों का अजीब नज़रों से घूरना बहुत खटका । उनके लिए छठ व्रत अजीब था । कुछ बोलते तो नहीं थे मगर उनकी सवालिया नज़रों में ये सवाल साफ दिख रहे थे कि आखिर हम कर क्या रहे हैं ?, ये कुछ औरतें पानी में घंटों तक क्यों खड़ी हैं ?, ये कुछ लोग नंगे बदन ज़मीन पर क्यों लोट रहे हैं ? ऐसे कई सवाल थे उनके पास जो उनके ना पूछने के बावजूद उनकी आँखों से झलक रहे होते थे ।

उनका इस तरह का रवैया एक हद तक सही भी था, कोई भी नयी चीज़ जो आँखों के सामने घट रही हो उसे देख कर कई तरह के सवाल मन में उठ ही जाते हैं । मगर समय के साथ साथ यहाँ के स्थानीय लोगों को अपने सवालों के जवाब अपने आप ही मिलते चले गए । छठ व्रत की आस्था ने उन्हें भी अपनी श्रद्धा के रंग में रंग लिया । आज ‘खरना’ है । हर साल की तरह माँ ने पूजा की । आस पड़ोस की सभी आंटी लोग इस पूजा में शामिल हुईं और बड़ी श्रद्धा से माथा टेक कर गुड़ से बनी खीर और रोटी को खरना प्रशाद के रूप में ग्रहण किया । 

बड़ा अच्छा लगता है ये देख कर कि व्रत के लिए गाँव जैसा माहौल ना होने के बावजूद भी लोगों ने अपनी परम्परा को जीवित रखा और वो हर संभव कोशिश की जिस से दूर शहर के छठ को गाँव का पारम्परिक रंग दिया जा सके । छठ व्रत ही नहीं बल्कि अपनी अपनी आस्था और परम्पराओं से जुड़ा वो हर पर्व इसी तरह के उत्साह के साथ मानते रहना चाहिए क्योंकि हमारी परम्पराएं हीं तो हमारी असल पहचान हैं । अपनी जड़ों से टूटा हुआ इंसान उस सूखे पत्ते की तरह हो जाता है जो भले ही टहनी की निगरानी से मुक्त हो गया हो लेकिन उसमे से वो हरियाली और वो चमक मर जाती है ।

आप सभी को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं । छठी मईया आप सबके दुखों का नाश करते हुए आपके जीवन को खुशियों से भर दें ।

धीरज झा  

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क़िस्सों का कोना : परदेस में छठ व्रत (पहला भाग खरना)
परदेस में छठ व्रत (पहला भाग खरना)
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