दो कांपती अवाज़ें (भाग – 5) यादों की उड़नतश्तरी

छ ठे पेग का नशा हरी को नींद की थपकियाँ दे रहा था और इधर सातवें पैग के साथ उसी नशे ने दिवाकर के लिए यादों की उड़नतश्तरी तैयार कर कर दी थी. ...

ठे पेग का नशा हरी को नींद की थपकियाँ दे रहा था और इधर सातवें पैग के साथ उसी नशे ने दिवाकर के लिए यादों की उड़नतश्तरी तैयार कर कर दी थी. पूरे कमरे में सिर्फ एक ही आवाज़ सुनी जा रास्ती थी और वो थी सुनैना का नाम, जो दिवाकर की सांसों की नमी में छन कर थोड़ी भारी हो गयी थी. हर बार सुनना का नाम फुसफुसाने के साथ दिवाकर की लडखडाती साँस एक अजीब सी आवाज़ बन कर गूंज रही थी जैसे कोई बड़े से खाली कमरे में कोई मीठा सा गीत गुनगुना रहा हो और वो गीत एक बार जुबान से निकलने के बाद बार बार दीवारों द्वारा दोबारा गुनगुनाया जा रहा हो.

अब समय हो गया था उस यादों की उड़नतश्तरी के उड़न भरने का. दिवाकर की जुबान से निकलने वाला सुनैना के नाम का जाप धीरे धीरे ऐसे तेज़ हो रहा था जैसे कोई हवाईजहाज का इंजन उड़न भरने से पहले अपनी सारी ताक़त इकट्ठी कर रहा हो. दिवाकर की ऑंखें दिवार पर टंगी हुई सुनैना की उस तस्वीर पर टिकी हुई थीं जिसमें सुनैना का आधा चेहरा पूरी मुस्कान के साथ दिख रहा था. दिवाकर तस्वीर को ऐसे देख रहा था जैसे यादों का सफ़र सुनैना की उसी एक आंख से हो कर गुज़ारना हो. और फिर धीरे धीरे दिवाकर की ज़ुबान से सुनैना के नाम की रट बंद होगयी. कमरा एक दम शांत हो गया ठीक उसी हैलीपैड की तरह जहाँ कुछ देर पहले हैलीकॉप्टर का इंजन गड़गड़ा रहा था. शायद यादों की उड़न तश्तरी उड़ चुकी थी.

ये कोई 5 साल पहले का वो सुनहरा सा दिन है जब ठंडी हवा ने सूरज की गर्मी के साथ समझौता कर के एक साथ बहने का फैसला किया था. धूप थोड़ी थोड़ी जला रही थी और कहीं छाँव में हवा थोड़ी सी सिहरन भी दे जाती थी. इधर से हवा का साथ दे रहा था सामने छलकता समन्दर. जगह थी मुंबई की जामा मस्ज़िद. अल्लाह से सौदा करने वालों की भीड़ लगी हुई थी. हर धार्मिक स्थल की तरह यहाँ भी श्रद्धालुओं के रूप में व्यापारी घूम रहे थे. सौदा था खुशियाँ दो और देग या चादर ले लो. अल्लाह अपनी जगह बैठे मुस्कुरा रहे थे, लोग धक्का मुक्की करते हुए दरबार की तरफ बढे चले जा रहे थे.

दिवाकर भी यहीं था, क्यों, किस लिए ? ये तो अभी मालूम नहीं, शायद घुमने आया हो या फिर ये भी सौदा करने ही आया हो, सही कारण पता नहीं लेकिन अहम बात ये है कि कहानी का नायक यहाँ है तो बात भी कुछ खास ही होने वाली होगी.

“ऐ भईया, कुछ पैसा दे दे.?” किसी ने उसके कुर्ते को पीछे से खिंचा. दिवाकर ने मुड़ कर देखा तो एक 14, 15 साल का लड़का जिसकी सफ़ेद कमीज़ से सफेदी का नाता कब का छुट गया था.

“ससुरे, तेरे जैसों को देखता हूँ तो गुस्सा आता है. चल भाग जा यहाँ से.” बड़ा कठोर मन था कहानी के नायक का, ऐसा सोचा तो नहीं था.

“अल्लाह तुम्हारी दुआ क़ुबूल करेगा भईया, कुछ पैसा दे दो भूख लगी है.”

“अच्छा, अल्लाह तेरे कहने पर दुआ पूरी कर देगा मेरी.”

“हाँ भईया, पक्का करेगा.”

“तो ऐसा कर तू पैसा मांगना छोड़ और जा दुआ कर अपने लिए, फिर खाना क्या नए कपड़े भी मिलेंगे, नया घर भी मिलेगा.”

“खुद के लिए की गयी दुआ नहीं सुनता वो, इसी लिए तो दूसरों की दुआ उस तक पहुंचता हूँ.”

“अच्छा चल मांग कि मुझे कोई ऐसी लड़की मिल जाए, जिसे देखते ही मुझे मोहब्बत हो जाए और फिर वो मोहब्बत ऐसी हो कि दुनिया कि सबसे बेहतरीन........”

“सॉरी सॉरी.” बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि एक मखमल जैसा अहसास दिवाकर के बाएं कंधे को छूते हुए निकल गया. दिवाकर के मुंह से एक भद्दी सी गाली निकलते निकलते एक अजीब सी मुस्कराहट में बदल गयी. वो ना चाहते हुए भी गिर पड़ा और उसके गिरने के बदले उसे मिली दो बार सॉरी और वो भी एक मीठी सी आवाज़ की चाशनी में सनी हुई सॉरी. कानों में घुली उस आवाज़ का स्वाद उसकी ज़ुबान से ले कर उसके दिल तक को महसूस हुआ.

“सच में बड़ा असर है तेरी दुआ में लड़के. इतनी जल्दी जवाब आगया.” दिवाकर धीरे से बुदबुदाया और लड़का ये भूल कर कि उसे दुखी दिखना है, खूब ज़ोर से हंसने लगा.

“भईया अब तो कुछ दे दो.” दिवाकर अपनी होश में लौटना नहीं चाहता था लेकिन उस लड़के की तड़पती आवाज़ ने उसका ध्यान भंग कर दिया.

“नहीं बेटे पैसे तो मैं ऐसे ना दूंगा. जनता है ऐसे पैसे ले ले कर तुझे हरम का खाने की आदत पड़ जाएगी. चल पहले तुझे खाना खिला दूँ फिर आगे का सोचते हैं.” दिवाकर उसे ले कर पास वाले होटल की ओर बढ़ा.

समन्दर किनारे टीन की शेड से ढाके उस होटल के आगे ही कच्छे बनियाइन में खड़े उस तंदूर सकने वाले ने लड़के को देखते ही हड़काया “सेल तू फिर आगया, हराम का खाने की आदत पद गयी है तुझे. भाग जा नहीं तो इसी तंदूर में भून दूंगा.” लड़का दुकान में घुसते घुसते ठिठक गया और दिवाकर की शक्ल देखने लगा.

“क्यों भाई ग्राहकों से ऐसे ही बात करते हो ?”

“अरे नहीं साहब हरामी है....”

“सही से बात करो ग्राहक है पैसे दे के खायेगा. जब हरम का खाने आये तब भले पकड़ के कूट देना. अभी ये जो कहता है इसे दो पैसे मैं दे रहा हूँ.” लड़के ने मटन कीमा पाव खाने की इच्छा जताई.

“असलम इसको दो किमा पाव ला कर दे रे.”

“ला कर कहे देगा, ये अन्दर बैठेगा, चल अन्दर कुर्सी पर बैठ.” लड़का भी मुस्कुराता हुआ अन्दर जा कर फ़ैल कर बैठ गया.

लड़के का खाना अब खत्म हो चूका था. उसके चेहरे की संतुष्टि बता रही थी कि उसने कितने दिनों बाद भर पेट खाया था.

“देखा मांगता है इसीलिए खाने से ज़्यादा गलियां पड़ती हैं, मैं ये ज्ञान नहीं पेलूँगा कि पढ़ने की उम्र है तेरी पढ़, मत पढ़ लेकिन कमा ज़रूर. हाथ फैलाएगा तो दुनिया पिछवाड़े पर लात देगी इसके सिवा और कुछ नहीं मिलेगा. ये थोड़े पैसे रख ले, कोई काम धंधा करना शुरू कर.” दिवाकर ने दो हज़ार रुपए लड़के के हाथ में रख दिए और वहां से निकलने लगा तभी उसका फोन बजा.

“अरे यहीं हूँ, तुम लोग सेल ना जाने कहाँ गायब हो गए हो, अच्छा रुको मैं आया.” दिवाकर होटल से निकला तभी सामने उसे अपने चरों दोस्त दिख गए.

“पता कितना सुकून मिलता है अन्दर, तुझे बोला था साथ चल मगर तू तो, अच्छा ला मेरा वोलेट दे.” चरों में से एक जो हरी ही था ने दिवाकर से नाराज़गी जताते हुए कहा.

“तुमको अन्दर सुकून मिला या नहीं पता नहीं मगर अपने को बहार दो दो सुकून मिल गए.”

“अबे सेल सुकून गया तेल लेने, बटुए में से दो हज़ार कहाँ गए ये बता.” हरी ने दिवाकर की बात काटते हुए गुस्से में कहा.

“उसी से तो सुकून खरीदा.” दिवाकर के साथ बाक़ी तीनों हँस पड़े लेकिन हरी का चेहरा हवा निकलते गुबारे की तरह पिचक गया.

“अबे मर मत, मेरा कैश ख़तम था. इसीलिए ले लिये. ए टी एम से निकलवा कर देता...”दिवाकर की बात पूरी होने से पहले ही फी से किसी ने उसका कुरता खिंचा. दिवाकर ने पलट कर देखा तो वही लड़का था.

“भईया, ये नहीं चाहिए.” लड़के ने दो हज़ार उसे लौटते हुए कहा.

“फिर क्या चाहिए तुझे?”

“भईया यहाँ रह कर भीख मांगने के सिवा कुछ नहीं कर सकता. और भीख का पईसा भी उतना ही मिलता है जितना मैं खा सकूँ बाक़ी सब छीन लेते हैं. भईया मेरे को यहाँ से बहार निकल दो. यहाँ मैं ऐसे ही मर जाऊंगा.” दिवाकर उसकी बैटन से भावुक होगया....

आगे उस लड़के के लिए दिवाकर ने क्या सोचा है इसके बारे में वक़्त ही हमें बताएगा...कहानी के साथ बने रहिए....सफ़र हर तरह के रंगों से भरा पड़ा है, जैसे जैसी सफ़र आगे बढेगा कहानी और रोमाचक होगी....

धीरज झा 

Keywords : Heart Touching Hindi Love Story, Story Series, Episode 5th, Stop Child Begging, Kind Heart, Love At First Sight 

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क़िस्सों का कोना : दो कांपती अवाज़ें (भाग – 5) यादों की उड़नतश्तरी
दो कांपती अवाज़ें (भाग – 5) यादों की उड़नतश्तरी
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