मेहनत का दाम (एक कहानी फ़ेसबुक की)

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चित्र साभार : यूट्यूब (Chloe art)


"कैसे हो भाई ?" माधव के फोन पर फ़ेसबुक मैसेज आया । 


"ठीक हैं भईया । आप बताइए ।" माधव ने जवाब दिया । 


"एकदम बढ़िया । अच्छा यार एक काम था ।" 


"जी भईया बताइए ।" 


"अरे यार तुम इतनी अच्छी चित्रकारी करते हो कि देख के मन गदगद हो जाता है ।"


"धन्यवाद भईया । आप सबकी दुआ है ।"


"अरे ये तुम्हारी मेहनत है भाई । अच्छा मैं क्या कह रहा था ना कि तुम्हारी भाभी का जन्मदिन आने वाला है इस महीने के आखिर में । चाह रहा था उसे कुछ ऐसा गिफ्ट दूं कि वो एक दम खुश हो जाए । फिर मुझे तुम्हारा ध्यान आया । मैंने सोचा जब भाई इतना बड़ा कलाकार है तो फिर गिफ्ट की क्या चिंता । तो भाई अपनी भाभी का एक बढ़िया सा चित्र बना दो यार।" इस मैसेज के बाद माधव कुछ देर तक सोचता रहा । 


"अरे भईया बिलकुल बना देंगे । यही तो काम है हमारा ।"


"बहुत बहुत धन्यवाद मेरे भाई ।"


"धन्यवाद कैसा भईया । काम है हमारा ।" काम है हमारा पर माधव ने दोबारा ज़ोर दिया लेकिन भईया समझ ही नहीं पा रहे थे । 


"ठीक है भाई बन जाए तो भेज देना हमको, हम पता दे देते हैं तुम्हें ।"


"हां भईया हम स्पीड पोस्ट कर देंगे । आप ना हमारे इसी नंबर पर 500 और साथ में स्पीड पोस्ट का खर्चा गूगल पे कर दीजिए ।" माधव ने काफी सोचने के बाद ये लिखा । इस मैसेज के कुछ समय बाद तक भईया का कोई रिप्लाई नहीं आया । 


"क्या यार भईया कहते हो और पैसे भी मांगते हो ? इतने समय से साथ जुड़े हैं । तुम्हारे प्रशंसक हैं इतने बड़े और तुम मुझसे पैसे के लिए बोल दिए ।"


"भईया आप बुरा मत मानिए । समय और मेहनत लगता है भईया । ड्यूटी से आने के बाद हमको बाकी सब काम छोड़ कर इसमें लगना होगा । ऊपर से आपको चाहिए भी जल्दी तो मेहनत ज्यादा लगेगी । बाक़ी कोई नाजायज नहीं मांग रहे भईया, ऐसे चित्र का बाजार में 2000 से कम नहीं लेते ।" माधव ने भईया को समझाते हुए कहा लेकिन भईया का तो दिल दुखा था । आखिर इस प्यारे से रिश्ते के बीच माधव पैसे को लाया कैसे । भईया के पास कोई कमी नहीं थी । एक बैठक में वो 5 हजार की शराब दोस्तों को पीला देते थे तो भला 500 रुपए कौन से ज्यादा थे उनके लिए मगर बात तो यहां दिल पर ठेस लगने की थी । कितनी उम्मीद से कहे थे भईया और ये माधव सब उम्मीद तोड़ दिया ।  


"भाई बाजार से ही बनवाना होता तो तुमको क्यों कहते । सोचा था कि बाजार से वो अपनापन थोड़े न मिलेगा । मगर तुमने तो यहां पराए वाली बात कर दी । ऐसा करो तुम अभी रहने दो फिर कभी बनवा लेंगे ।" इतना कह के भईया ऑफ़लाइन हो गए । माधव ने बहुत मैसेज किए मगर उनका जवाब नहीं आया । माधव को भी लगने लगा कि शायद उसने गलती कर दी । भईया से ऐसा नहीं कहना चाहिए थे । भईया ने कितनी बार उसकी पोस्ट शेयर कर के हजारों दोस्तों तक पहुंचाई थी । कितनी तारीफ करते थे वो माधव की लेकिन माधव ने क्या किया तो पैसे मांग लिए । 


इस हिसाब से यहां माधव को रुक जाना चाहिए था । और भला कितने लोगों का दिल दुखाता वो मगर उसे तो भईया के आगे ऐसा बोलने के बाद एक नया रास्ता दिख गया । उसने तो फ़ेसबुक पर पोस्ट तक कर दी । उसने अपनी कुछ बेहतरीन चित्रकारी के नमूने डालते हुए पोस्ट में लिखा कि अगर किसी को चित्र बनवाना हो तो संपर्क करे । एक चित्र के लिए 500 प्लस डिलीवरी चार्ज देना पड़ेगा । 


बहुतों के दिल दुखे ये जान कर कि माधव जो पहले अपनी चित्रकारी के बदले लाइक कमेंट और शेयर से संतुष्ट हो जाता था वो आज चित्र बनाने के पैसे मांग रहा है लेकिन वहीं कइयों ने उसे ऑर्डर भी दे दिए वो भी एडवांस पेमेंट के साथ । पहले तो ये आइडिया कुछ खास कामयाब होता नहीं दिखा लेकिन बाद में माधव के पास इतने ऑर्डर आ गए कि काम से लौटने के बाद उसके पास फुरसत ही नहीं बचती थी । वो हर समय चित्रकारी में ही लगा रहता था । अब तो उसने अपने काम से कुछ दिनों की छुट्टी तक ले ली थी ।


महीने भर उसने दम लगा कर काम किया फिर अचानक एक दिन उसने अपनी पोस्ट हटा ली और जो लोग उसे ऑर्डर देने को तैयार थे उन्हें भी कोई जवाब नहीं दिया । माधव एकदम से ही गायब हो गया था । कई लोगों के तो पैसे भी चले गए थे उसके पास लेकिन उन्हें अपना ऑर्डर नहीं मिला था । हालांकि ज़्यादा समय नहीं हुआ था लेकिन उसे गायब देख कुछ लोगों को ये भी लगा कि उसने फ़ेसबुक पर चित्रकारी घोटाला कर दिया है । उसे लेकर तरह तरह की बातें होने लगीं । कोई उसकी फिक्र कर रहा था, कोई उसे ठग बोल रहा था तो कोई उसे घमंडी कह रहा था । भईया तो उसकी शर ए आम लुंगी उतारने पर लगे हुए थे । हर किसी को वह एक ही बात बोल रहे थे “मैंने तो पहले ही कहा था कि ये लड़का एक नंबर का ठग है ।“ 


कुछ दिन ऐसे ही बीते, हफ्ते भर बाद माधव ऑनलाइन लौटा । उसने एक नई पोस्ट लिखी 


कुछ को दिल से आभार, कुछ से माफ़ी की दरकार  


“आप सब लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया । दिल से धन्यवाद है आप सबका । अगर आप सब ना होते तो शायद मैं अनाथ हो जाता । मैं एक मामूली सा मजदूर आदमी हूं जो परिस्थितियों के बीच फंस कर ना ज़्यादा पढ़ पाया और ना ज़्यादा कुछ सीख पाया । लेकिन कहते हैं ना सारे खेल रचने वाला वो ईश्वर है । उसी ने मुझ गरीब के हाथ में पेंसिल पकड़ा दी और कहा कि तू जो भी बनाएगा वो एक खूबसूरत चित्र में बदल जाएगा । मैं बचपन से ही बस हाथ चलाता रहा और चित्र बनते रहे । मगर उन चित्रों का कोई मोल नहीं था कभी लेकिन जब मैं यहां आप लोगों से जुड़ा तब आप सबने मुझे अहसास कराया कि मैं जो करता हूं वो बे मतलब नहीं है । आप सबने हिम्मत दी तभी मैं कम से कम किसी एक काम में तो अच्छा हो पाया । मेरे लिए आप सबकी वाह वाही और प्यार ही बहुत था ।   


पैसे से मैं भले ही गरीब हूं लेकिन मेरे पास मां के रूप में जो पूंजी है उसने मुझे हमेशा अमीर बनाए रखा । ईश्वर भले ही देने वाला होता है लेकिन आपके पास कोई दौलत है इसका अहसास मां ही करवाती है । मां के लिए उसके गरीब बच्चे भी राजा बेटा और राजकुमारी होते हैं, दुनिया जिसे कुरूप कहती है मां उसकी नज़रें उतरती नहीं थकती । इंसान के अंदर आत्मविश्वास का पहला बीज मां के दुलार द्वारा ही बोया जाता है । मेरे लिए मेरी मां हर दौलत से बड़ी है लेकिन जब मां की जान पर बन आई तब ये रुपये पैसे मेरा मज़ाक बनाने लगे । मुझसे कहने लगे कि अब तुझे पता चलेगा कि किसका मोल बड़ा है ।  


आपको पता है हमारे खानदान में कोई भी अपनी पूरी उम्र नहीं जी पाया आज तक । कोई भूख से, कोई बीमारी से तो कोई चिंता से मर गया । मेरे खुद के पिता जी इलाज के अभाव में ज़्यादा जी नहीं पाए । मां ने ही मुझे पाला पोसा । लेकिन ये पैसे रुपये की ताकत आज मुझसे मेरी मां को भी छीनने जा रही थी । फिर मुझे याद आए आप लोग । मैं चाहता तो आप में से कई ऐसे भाई बहन दोस्त हैं जिन्हें मदद के लिए कह सकता था और विश्वास है कि आप में से बहुत से लोग मुझे मना भी नहीं करते लेकिन आप सबने तो पहले ही मुझे रास्ता दिखा दिया था फिर भला मैं मदद क्यों मांगता । मां का ऑपरेशन जल्द से जल्द करवाना बहुत ज़रूरी था । लेकिन जितना मैं कामात हूं उतने में तो घर चलना मुश्किल है फिर भला ऑपरेशन कहां से हो पाता । तभी मैंने एक चांस लिया और आप सबको बताया कि मैं आपके चित्र बना दूंगा लेकिन बदले में पैसे लूंगा । हालांकि जब मैंने ऐसा सोचा तब मुझे विश्वास ही नहीं था कि इस तरीके से महीने भर में मैं ऑपरेशन के लायक पैसे जुटा पाऊंगा मगर आप सबने इसे मुमकिन कर दिया । 


मैं इस बात के लिए अभी भी शर्मिंदा हूं कि मुझे अपने इस परिवार से चित्र बनाने के बदले पैसे मांगने पड़े लेकिन मेरी मजबूरी थी । मैं आप सबके सामने हाथ फैलाता उससे अच्छा मुझे ये लगा कि जो हुनर मेरे पास है उससे मैं पैसे जमा कर लूं । दो दिन पहले मां का ऑपरेशन हुआ, इसी वजह से मैं कुछ दिन आप सबको यहां नहीं दिखा । आप सबकी दुआ से ऑपरेशन सफल रहा और डॉक्टर ने कहा है कि अब वो ठीक हैं । 


इस बीच जो सबसे बुरा हुआ वो ये कि मेरी जरूरत की वजह से जाने अनजाने में मैंने कई अपने लोगों का दिल दुखा दिया । मैं उन सब बड़े भाइयों, बहनों और दोस्तों से माफ़ी चाहता हूं जिन्हें चित्र बनाने के बदले मेरे पैसे मांगने पर बुरा लगा । जिनके पैसे मेरे पास आ गए हैं लेकिन चित्र नहीं मिले उन सबसे भी देरी के लिए माफ़ी चाहता हूं । उन्हें हफ्ते भर के भीतर सभी चित्र मिल जाएंगे ।   


मैं अपनी और मां की तरफ से आप सबका दिल से धन्यवाद करता हूं । आप सबका ये अहसान मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा । 


आप सबका दोस्त, भाई 


माधव 


माधव ने इस पोस्ट के साथ अपनी मां की तस्वीरें डालीं । हालांकि माधव ने किसी से पैसे नहीं ठगे थे बल्कि अपनी मेहनत से पैसे कमाए थे लेकिन फिर भी कुछ लोगों को अभी भी ये शक था कि वो सबको भावुक कर के अपना नया धंधा चमका रहा है लेकिन जब कुछ अच्छे लोग माधव की मां का पता लेने उसके घर गए और वहां से तस्वीरें डालीं तब जा कर सबको यकीन हुआ कि माधव सच बोल रहा था । इस होशियारी भरी दुनिया में एक चीज़ गायब हो चुकी है और वो है यकीन । आँखों पर लगा बुद्धिमानी का चश्मा कई बार मरते हुए इंसान की स्थिति को भी तब तक गंभीरता से नहीं लेता जब तक उसकी सांसें रुक कर उसके मरने की गवाही ना भर दें ।  


खैर लोग तो ऐसे ही हैं । लेकिन एक बात जो अच्छी हुई वो ये कि माधव इसके बाद फ़ेसबुक से लेकर रियल लाइफ तक में हीरो बन गया । उसके पोस्ट पर हजारों लोग पहुंचे, सबने उसकी जम कर तारीफ की, उसके साथ जुड़ना खुद का सौभाग्य बताया, उसे नए नए नामों की उपाधियाँ दीं । कुछ ने तो उसकी और मदद करने की कोशिश भी की लेकिन उसने सबको बड़े प्यार से मना कर दिया । 


“माधव, कैसे है मेरे भाई ? मां कैसी हैं अब ?” जो भईया शुरुआत में नाराज़ हुए थे और जगह जगह माधव की बुराई कर रहे थे उन्होंने उसके पोस्ट डालने के कुछ दिनों बाद मैसेज किया । 


“अरे नमस्कार भईया, एकदम अच्छे हैं और मां भी ठीक हैं अब । आप बताइए, आप कैसे हैं ?” माधव ने तुरंत रिप्लाई किया । 


“शर्मिंदा हूं मेरे भाई । मैं समझ ही नहीं पाया कि तुमने कुछ गलत नहीं किया था । हम सब ऐसे ही तो कमाते हैं । तुमने अगर अपनी मेहनत के पैसे मांगे तो क्या बुरा किया लेकिन मैं गंवार इंसान समझ ही नहीं पाया इस बात को । वादा करता हूं कि आज से किसी से भी मुफ़्त का काम करवाने की बात नहीं सोचूँगा । विश्वास है तू मुझे माफ कर देगा ।“


“कैसी बात करते हैं भईया । आप बड़े हैं आपको माफ़ी नहीं मांगनी चाहिए । वैसे भी जरूरत ना होती तो आपसे पैसे के लिए कहने के बारे में सोचता भी नहीं । गलती तो मैंने की है जिसे अब सुधारना चाहता हूं । भाभी का जन्मदिन तो बीत गया लेकिन उपहार के लिए कोई दिन थोड़े ना होता है । तो मैंने ना आप दोनों का एक चित्र बनाया है जो मेरी तरफ से आपको दोनों को एक छोटी सी भेंट है ।“ इसके साथ ही माधव ने उन्हें अपना बनाया हुआ चित्र भेज दिया । भईया उसे देख कर खुशी से पागल होने लगे ।


“ये कैमरे से खींची हुई तस्वीर से ज़्यादा सुंदर लग रहा है । लग रहा है जैसे ये तस्वीर अभी बोल उठेगी । यार मैं इस पर कितनी तारीफ करूं समझ नहीं पा रहा । किस तरह तेरा शुक्रिया करूं भाई ।“ माधव भईया का भेजा हुआ ये मैसेज पढ़ ही रहा था तभी उसके फोन पर मैसेज आया । उसके अकाउंट में अभी अभी 3000 रुपये आए थे । 


“ये आपने भेजे हैं भईया ? अगर हां तो मुझे नहीं चाहिए । इसकी जरूरत नहीं है । ये तस्वीर मेरी तरफ से आप दोनों को गिफ्ट है ।“ 


“भाई, मैं ये बात समझ गया हूं कि अगर अपना बच्चा कोई काम शुरू कर रहा है ना तो उससे मुफ़्त में करवाने के बदले उसे उसकी मेहनत का पूरा दाम दो । जब बच्चों को घर से ही शाबाशी नहीं मिलेगी तो बाहर वो क्या उम्मीद रखेंगे ।“ माधव ने बहुत मना किया मगर भईया नहीं माने । अंत में अपनी कसम दे कर उन्होंने माधव को चुप करा दिया । 


“ठीक है भईया, अब मैं कुछ बोल नहीं सकता लेकिन ये बहुत ज़्यादा हैं ।“


“भाई तू ने कहा था न कि मार्किट में 2000 रुपये लेते हैं । मैंने पता भी किया 2000 ही लेते हैं लेकिन जहां भी मैं गया वहां हर किसी के काम में कुछ ना कुछ कमी लगी मगर जो तू करता है ना उसमें कोई कमी नहीं होती क्योंकि तू प्यार मिलाता है अपने काम में । यही प्यार तुझे सबसे अलग बनाता है । और जो अलग है उसका दाम बाकियों से ज़्यादा होना ही चाहिए ।“ माधव को हार कर ये पैसे रखने ही पड़े । 


कुछ ही दिनों बाद 10वीं पास माधव को एक कंपनी ने अपने यहां काम दे दिया । उसे घर से ही काम करना था । सैलरी इतनी थी जितनी वह पहले अपने काम से 6 महीने में भी नहीं कमा पाता था । अब वो अपनी मां के लिए वो सब कर पा रहा था जिसके वो सपने देखा करता था । 


********************* 


माधव और उसकी चित्रकारी बस एक उदाहरण है । इनके जैसे हुनरमंद लोग हमारे आसपास भरे पड़े हैं । लोग इनकी तारीफ तो करते हैं लेकिन ये नहीं सोचते कि जो वे कर रहे हैं उसके लिए उनकी मेहनत, उनका समय, सब लगता है और ऐसे में अगर वे अपनी मेहनत का मूल्य मांगते हैं तो ना वे घमंडी हो रहे हैं और ना ही इसमें किसी का दिल दुखने जैसी कोई बात है । 


एक अनजान लेखक की किताब मार्केट में आती है, उसकी जम कर मार्केटिंग होती है । लोग जगह जगह उस किताब का नाम सुनते हैं, उसे दस जगह खोजते हैं, उसके प्रिंट रेट पर उसे खरीदते हैं जबकि उन्हें ये भी नहीं पता होता कि उस किताब में उनके मन लायक लिखा गया है भी कि नहीं । मगर वहीं कोई ऐसा लेखक जो उनसे सोशल मीडिया पर काफ़ी समय से जुड़ा है, वो किताब लिखता है तो अधिकतर लोग या तो उस किताब को इग्नोर कर देते हैं या फिर चाहते हैं कि उन्हें ये किताब मुफ़्त में पढ़ने को मिल जाए । क्यों ? क्योंकि वे लेखक के तथाकथित दोस्त हैं । अगर आप दोस्त हैं फिर तो आपको सबसे पहले पैसे देकर इस किताब को खरीदना चाहिए, अपने दोस्त की हिम्मत बढ़ानी चाहिए । जिन्हें किताबें पढ़ना पसंद नहीं या फिर अभी पैसे की तंगी के कारण खरीद नहीं पा रहे, या अभी समय नहीं पढ़ने का तो कोई बात नहीं लेकिन फिर ऐसे लोग मुफ़्त में किताब पाने की इच्छा भी क्यों रखते हैं ? 


सबसे प्यारे और ईमानदार लोग वही हैं जो कला का मूल्य चुका कर उसे देखते, पढ़ते और महसूस करते हैं । कलाकार अपना बहुत कुछ दांव पर लगाकर आप सबके लिए कुछ अच्छा करने निकला है । आप भी उसके साथ अच्छा ही कीजिए । नहीं कुछ कर सकते तो कम से कम उसके लिए मुश्किलें खड़ी मत कीजिए, उसका हौसला बढ़ाइए । यकीन मानिए यही लोग आपके जीवन को खूबसूरत बनाते हैं । 


धीरज झा  


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