कोरोना को जीतने दो यार

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24 घंटे में 2 लाख, फिर 3 फिर 4, कोरोना लगातार अपनी रफ्तार बढ़ा रहा है । जानते हैं क्यों ? क्योंकि उसे जीतना है, इंसान के अंदर भरे ज़हर से । जिस दिन वो हमारे अंदर भरे ज़हर से आगे निकल जाएगा उसी दिन से उसकी रफ्तार धीमी होते होते एक दिन थम जाएगी । कोरोना जिद्दी है उसे पसंद नहीं कि कोई उससे भी ज़्यादा खतरनाक खौफनाक बेरहम और बेशर्म हो मगर इंसान के अंदर का ये ज़हर बार बार कोरोना को ललकार रहा है । 


हमारे अंदर का ये ज़हर इसे चुनौती देते हुए कह रहा है कि "अबे साले कल का आया हुआ लौंडा है तू, हमसे क्या मुकाबला तेरा । हमने नस्लें तबाह कर दीं, इंसान को इंसान के हाथों कटवाया, जलवाया, तड़पाया । इंसानियत को बर्बाद करने में भला तू हमसे क्या ही जीत पाएगा । ये इंसान हैं इन्हें हम कंट्रोल कर रहे हैं, बिना इनकी समझ में आए हम ना जाने कब से इनके दिमाग में बैठे हुए हैं और तू ये साल भर में ही हमसे आगे निकल जाना चाहता है ।"


कोरोना इस चुनौती को पा कर आग बबूला हो गया है । उसने इस ज़हर को मात देने के लिए भयावह मंज़र गढ़े । रिश्तों को एक दूसरे के लिए सांसें जुटाने को लेकर तड़पाया, बिलखाया, गिड़गिड़ाने पर मजबूर किया । कुछ हद तक सफल भी हुआ जब चंद नेकदिल इंसान एक दूसरे की मदद के लिए आगे आए । कोरोना ने सोचा ले भई ज़हर, हम तो जीत रहे हैं लेकिन अगले ही पल ज़हर ने फिर कमाल दिखाया । कोरोना को ही हथियार बना कर कोरोना को ही हरा दिया । 


बच्चे मां बाप की लाश अस्पतालों में छोड़े जा रहे हैं, खुद को सुख दुख का साथी बताने वाला समाज, रिश्तेदार, पड़ोसियों के होते हुए लोगों को अंतिम समय में चार कंधे नसीब नहीं हो रहे । एक साल का बच्चा अपनी मां के शव के पास दो दिन से भूख प्यास से निढ़ाल पड़ा है मगर कोई पड़ोसी उसके आगे एक बिस्कुट का पैकेट तक फेंकना ज़रूरी नहीं समझ रहा । इंसान के अंदर घुले इस ज़हर की ऐसी चालों से कोरोना हैरान है । वो फिर अपना ज़ोर लगाता है अगले दिन पिछले दिन से ज़्यादा लोगों को चपेट में लेता है उनकी जान लेता है लेकिन ये ज़हर कौन सा कच्चा खिलाड़ी है । ये फिर अपना रंग दिखाता है एक दूसरे से एक दूसरे की मौत पर ठहाके लगवाता है । 


कोरोना सोच में पड़ चुका है । वो बार बार सोच रहा है 'मौत पर ठहाके !' मौत पर ठहाके वही लगा सकता है जिसने किसी अपने को ना खोया हो, जिसे उस भयानक मंज़र का अंदाज़ा ना हो जो किसी की मौत के बाद उसके घर में पसरता, जिसने कभी ये महसूस ना किया हो कि जिस पर परिवार निर्भर है उसके एकदम से चले जाने पर भविष्य को लेकर कैसा डर समा जाता है पीछे बचे लोगों पर । जिस दौर में आप हर दूसरे इंसान के मुंह से उसके किसी अपने के जाने की खबर सुन कर मौत से कांप रहे हों उस दौर में किसी की मौत पर ठहाका लगाना वाकई में ये साबित करता है कि आपके अंदर का ज़हर इस वायरस से बहुत ज़्यादा खतरनाक है । 


असल में कोरोना अभी तक इंसान की फ़ितरत को लेकर उलझन में उलझा हुआ है । वो एक तरफ इंसान को दूसरे इंसान की जान ना बचा पाने पर लाचारी के बोझ तले दबा हुआ देखता है वहीं दूसरी तरफ देखता है कि इंसान ही इंसानियत के मौत की दुआ मांग रहा है । उसे किसी की मौत से ज़्यादा दुख चुनाव में अपने पसंदीदा प्रत्याशी के हार जाने का है । कोरोना हैरान हुआ ये देख कर कि इंसान मौत के तांडव को अनदेखा कर के इस चिंता में डूबा दिखा कि खेला होबे कि ना होबे । कोरोना बोल सकता तो ऐसे लोगों का मज़ाक बनाते हुए कहता अब इससे बड़ा खेला क्या होबे साहब, जब खेला के लिए आपकी जान ताक पर रख दी जाए । 


कमाल की बात है जो मध्यवर्गीय इंसान इस समय सबसे ज़्यादा प्रभावित है इस कोरोना से उसी को इसकी परवाह नहीं । कोरोना जान गया है कि हम हमेशा देर से जागते हैं और जब जागते हैं तब तक बहुत कुछ हाथ से छूट चुका होता है । उसने देखा कि पिछले साल हम खौफनाक दौर से गुजरे । उसे लगा कि इस बार के लिए हमने खास तैयारी की होगी लेकिन जब समय आया तब पता लगा कि हमने तैयारी खाक कि उल्टा इस महामारी के लिए रास्ता और आसान कर दिया । हमें लगा अब सब सही है, आज भी बहुतों को तब तक यही भ्रम है जब तक मौत की आशंका उसके आसपास चक्कर नहीं काट कर जा रही । 


इतनी सी बात समझने के लिए हमें कितनों को कुर्बान करना पड़ेगा कि हमारी और हमारे अपनों सुरक्षा सिर्फ़ हम ही कर सकते हैं । हम कब समझेंगे कि ये समय अपने अंदर के ज़हर को हावी होने देने का नहीं है । एक बार कोरोना को ये भ्रम होने दो कि वह इंसान के अंदर के ज़हर से ज़्यादा तेज है । एक बार उसे इंसानियत का डर दिखा दो । पक्की बात है वो अपने आप चला जाएगा । और अगर ऐसा नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं धीरे धीरे लोग तो जा ही रहे हैं । 


बाकी जो समझदार हैं, इस दौर की भयावहता को समझ रहे हैं, जान रहे हैं कि इस समय हमारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है उनसे विनती है कि अपना और अपनों का अच्छे से ख्याल रखें । 


विश्वास है महादेव सब अच्छा करेंगे 🙏


धीरज झा 

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