आपको भी आज़ादी नहीं मिली क्या ? (स्वतंत्रता दिवस विशेष)

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और कितनी आज़ादी चाहिए यार ? जहां मन वहां टांग उठा के हल्के हो रहे हो । सामने लिखा है कुत्ते के पूत यहां मत ... फिर भी जानबूझ कर वहीं हल्का होना है इन्हें । ऐसे लगता है जैसे इनके खुले में पेशाब के लिए ही देश आज़ाद कराया गया है । 

बेखौफ़ हो कर बिना टिकट ट्रेनों (जब चालती थीं) में चढ़ रहे जैसे पप्पा की ट्रेन हो । बिना टिकट चढ़ भी रहे और किसी कमज़ोर को हड़का कर उसकी सीट पर बैठ के मुंह से जुलाब कर रहे कि "रेल मंत्रालय सही से काम नहीं करता । देख रहे कितनी लेट है ट्रेन ।" तेरे जैसे को ट्रेन झेल रही है इसके बदले तो तुझे दो दिन लेट भी पहुंचाए तब भी सही है । ऐसे लोग भी आज़ादी खोज रहे हैं । देखो फोकट में हड़पी हुई सीट के नीचे होगी आज़ादी ।

एक ससुर को देखा सड़क पर चलते हुए दरिद्र की तरह खा रहा है और कह रहा है "शहर में इतनी गंदगी हो गई है कि सांस लेने में भी दिक्कत होती है ।" ये उसकी आखिरी बाइट थी । इतना कहते हुए जिस सिल्वर कागज में खाना लिपटा हुआ था उसे वहीं सड़क पर फेंक दिया । इन्हें पकड़ के कूड़े के ढेर पर फेंक दिया जाए और कहा जाए यहां ढूँढ आज़ादी । 

भारत की छाती पर खड़े हो कर भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वाले भी कहते हैं आज़ादी नहीं मिली । आज भी अपनी संकुचित मानसिकता के गुलाम बने हुए लोग आज़ादी खोज रहे हैं । जो अपनी नज़रों को आज तक स्त्रियों के अंगों से  आज़ाद ना करा पाए वो भी आज़ादी खोज रहे हैं । देश को अपने घर का लालटेन समझ कर जो हर रोज़ इसे जलाने निकल जाते हैं उन्हें भी लगता है कि वे गुलाम है । भाई गुलाम होते तो कब का लटक गये होते । 

ऐसी हरकतों और ऐसी सोच के साथ भी जितनी आज़ादी तुम्हें यहां मिली है उतनी और कहीं ना मिल पाती । दिक्कत यही तो है कि जहां से गुलामी की जंजीरें तोड़नी हैं वहां कोई ध्यान नहीं देता लेकिन आज़ादी के नारे सबको लगाने हैं । 

एक दिन के लिए हम अपना फोन नहीं छोड़ सकते, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं वो एक दिन के लिए अपने एकाउंट से दूरी नहीं बना सकते, हम अपनी एक ऐसी आदत से छूट नहीं सकते जो बुरी है लेकिन कभी हमने इस गुलामी के बारे में नहीं सोचा । कभी नहीं देखा कि कैसे हम इस जाल में हर रोज़ उलझते जा रहे हैं । अपनी गुलामी में जीते हुए हम आज़ादी की मांग कर रहे हैं । कहते हैं देश के हालात बिगड़ गये, तो इसे बिगाड़ा किसने ? हम सोशल मीडिया वीरों ने, हमारे द्वारा फैलाई गई एक एक अफवाह ने । 

जो देशभक्ति की बात करते हैं वे खुद से पूछें कि क्या वे साल के हर दिन हर घंटे हर मिनट देश के प्रति समर्पित हैं ? आपको क्या लगता है, देशभक्ति क्या है ? जय हिन्द, वन्देमातरम, भारत माता की जय कहना ? तिरंगे को सलाम करना ? बस इतना ही ? इसके सिवा कुछ भी नहीं ? नहीं इसके आलावा बहुत कुछ है देशभक्ति, ये तो केवल देश का अभिवादन, उसकी वंदना, उसका सम्मान है । 

मां बाप हों या बड़े बुजुर्ग उन्हें प्रणाम कर देने भर से ही आप उनके प्रति अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो जाते हैं हम । हमें ध्यान देना होता है कि पिता जी आज कल खाना सही से क्यों नहीं खा रहे, माँ को आज कल सांस ज्यादा क्यों चढ़ने लगी है। पिता जी सालों से दो जोड़ी शर्ट पैंट और दो जोड़ी कुरते पायजामे में ही हैं उनके लिए कुछ नए कपडे सिलवाने हैं, पहली सैलरी मिली है मां को साड़ी दिलवानी है। रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ पल निकाल कर उनकी छोटी छोटी जरूरतों का ध्यान रखना ही उनके प्रति हमारा स्नेह है।

बस इसी तरह देश के प्रति प्रेम और भक्ति महज नारों और जयकारों भर नहीं है। देशभक्ति का मतलब है व्यस्त जिंदगी से कुछ वक़्त निकाल कर देश का ध्यान रखना। अरे यार देशभक्ति कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है बस यूं ही चलते फिरते देशभक्ति निभाई जा सकती है । इतना लोड क्यों लेना, इतनी बड़ी तहरीरें क्यों ? रास्ते में चल रहे हैं, मस्ती में टहल रहे हैं। देखा कोई खाली लिफाफा, कोई बोतल कुछ भी पड़ा है उसे कचरे के ढेर का पहला कचरा बनने से पहले डस्टबीन में डाल देना है। कोई इंसान मदद को पुकार रहा है उसके आगे मदद का हाथ बढ़ा कर क्षमता अनुसार मदद कर देनी है, कोई अपनी बात कह रहा है वो भले ही आपको पसंद न हो मगर उसे अपनी बात रखने देना है। इंसान बने रहना है। बस हो गया यही सब तो है रोज की देशभक्ति।

जिस तरह हम हर रोज जन्मदिन नहीं मानते, उस तरह से घर नहीं सजाते उसी तरह हम हर दिन को 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह नहीं मना सकते। लेकिन देशभक्ति हर समय बनी रहनी चाहिए। सरहद पर खड़े सैनिक खास हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि देश केवल उन्हीं से है और देश की सारी जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं के कन्धों पर है। याद रखिये पहरे केवल भरी हुई तिजोरियों पर लगाए जाते हैं। यदि हम देश के भीतर का माहौल ही सही न रख पाए तो भला उनके सरहदों की रखवाली के लिए जान जोखिम में डालने के मायने क्या रह जाएंगे।

यहां हर बात जो देश की है वो आपसे जुड़ी है, घूम कर आज नहीं तो कल आप तक पहुंचेगी ही। वो बात आप तक पहुंचे उससे पहले आप कम से कम अपने हिस्से की जिम्मेदारी तो निभा ही सकते हैं। कल को आपके मन में ये मलाल नहीं रहेगा कि आपने इस बात के लिए कंधे उचका कर कह दिया था “हमें क्या ?”

अपने समर्थन और विरोध को हमेशा देश से दूर रखिए । हम आजाद हैं इस बात का हमें गर्व होना चाहिए। कुछ व्यस्थाओं के बिगड़ने को हम गुलामी नहीं कह सकते। और जितनी गुलामी है वो हमारी अपनी मर्जी, हमारे अपने लालच के कारण है। जब कोई बटाईदार किसी खेत को बटइये में लेता है तो एक तरह से वो उस जमीन पर गुलाम होता है। सारी मेहनत उसकी होती है मगर फिर भी उसे उस जमीन के बदले आधी फसल बाँट कर देनी पड़ती है। आजादी का मतलब अगर जानना है तो उस बटाईदार से जानिए जो उसी जमीन को अपने मेहनत से जोड़े पैसों से खरीद लेता है। अब वो जमीन उसकी है, अब वो उस पर सोना उगाता है या उसे बंजर कर देता है ये उस पर है। जमीन अब उसको मिल चुकी है। हमें भी 73 साल पहले हमारी जमीन मिल चुकी है। अब इसे हराभरा रखें या जलता रहने दें ये हम पर है।

आजाद होना है तो राजनीति के बंधनों से आजाद हो जाइए। आजाद होना है तो समाज के खोखले रिवाजों से आजाद हो के दिखाइए। आपको आजादी चाहिए तो उन चार लोगों से खुद को आजाद कराइए जो आपके किसी भी फैसले में अपने कुछ न कुछ कहने का डर आपके मन पर बना देते हैं। अगर आजादी ही चाहिए तो उस सोच से आजादी पाइए जिसके कारण आपने आज भी अपनी सोच में नारी को गुलाम कर रखा है । आज़ाद होना है तो उस सोच से आज़ाद करिए खुद को जहां आपको हर पुरुष में एक राक्षस एक हैवान दिखता है । इस तरह की हर सोच से आज़ाद होना ही आज़ादी है । 

आजादी का दिन मनाने का मतलब ये नहीं कि हम उस दिन पर सवाल उठाएं। जिस आजादी के लिए लोगों ने खून को पानी की तरह बहा दिया, जेल की सजा काटी, गोरों की मार खायी उस आजादी पर सवाल उठाने की हमारी औकात नहीं। हमें तो बस उस आजाद मुल्क को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करते रहना है। किसी से सवाल करने से पहले खुद से सवाल करना जरूरी है। जवाब मिल गया तो आजादी भी मिल जाएगी।

याद रखिए घर में दिक्कतें आएं तो हम उन्हें सुलझाने की कोशिश करते हैं, घर नहीं छोड़ देते। वैसे ही ये देश हमारा है, हमें मसलों को सुलझाना है, इसे बेहतर बनाना है। आइये हम सब इस दिन मिल कर ये प्रण करें कि हम जहां खड़े हैं, जहां तक हमारी पहुंच है हम वहीं से अपना देश प्रेम जाहिर करेंगे। और वो भी साल में मात्र दो दिन नहीं बल्कि जब तक हम इस आजाद मुल्क की आजाद फिजा में सांस ले रहे हैं तब तक।

      आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐💐

      आप सब को आजादी का दिन मुबारक, जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳

धीरज झा

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