ऋद्धि की मौत (कहानी)

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"अब क्या गिरा दिया ?" किचन से आई ज़ोर की आवाज़ सुनकर मां चौंक गई थी । 

"कुछ नहीं ।" ऋद्धि ने इनदिनों के अपने जाने पहचाने अंदाज़ में रूखा सा जवाब दिया । 

"पता नहीं क्या हो गया है इस लड़की को, ना किसी से सही से बात करती है, ना इसका किसी काम में मन लगता है ।" मां इन दिनों ये बात दिन में लगभग दसियों बार बोलती है । 

'पता नहीं क्या हो गया है इस लड़की को !' ये सुनते ही ऋद्धि का मन भर आता है । वो हर बार यही सोचती कि क्या मां को नहीं पता उसे क्या हुआ है ? मां हर बार बर्तन टूटने पर इतना चिल्लाती है, यहां तो उसके सपने टूट रहे हैं । क्या उन्हें नहीं पता सपने टूटने का दर्द हड्डियां टूटने से भी ज़्यादा होता है । ऐसे में उसे तो चिल्ला चिल्ला कर पूरा घर सर पर उठा लेना चाहिए लेकिन वो तो संस्कारों की जंजीरों में बंधी है, चिल्ला भी नहीं सकती । ऐसे में उसका चिड़चिड़ा हो जाना कौन सी बड़ी बात है । 

रिश्तों की डोर होती है लेकिन जब यही डोर इंसान को हद में बांधने लगे तो ये डोर जंजीर बन जाती है । ऋद्धि इन दिनों ऐसी ही जंजीरों से जकड़ी हुई थी । 

"इनका तो पूछो ही मत मां, ना जाने क्या क्या सोचती रहती हैं आज कल । सही से जवाब तक नहीं देती ।" छोटी बहन ने मां की बात को और मजबूत कर दिया था । 

ऋद्धि किचन में खड़ी सब सुनती है । मन ही मन सोचती है कि सही जवाब तो दिया था जब किसी अनजान की फोटो दिखा कर पूछा गया कि "देखो लड़का कैसा है ?" तब दिया था सही से जवाब । कहा तो था "अच्छा नहीं है । मुझे नहीं करनी इससे या ऐसे किसी भी अनजान से शादी ।" 

तब इस सही से जवाब के बदले क्या मिला था ?  डांट, मां पापा की तरफ से खुद को खत्म कर लेने की धमकियां, जो शख्स इतना प्यार करता है ऋद्धि को उसे 10 गालियां ! तब से ही ऋद्धि ने सही जवाब देना छोड़ दिया । अब वो सिर्फ़ गलत जवाब ही देती है । 

सब कहते हैं वो अब प्यार से नहीं बोलती । क्यों बोले प्यार से ? जब इस प्यार को कोई समझने वाला ही नहीं तो फिर क्यों दे वो इस प्यार को अहमियत । अब तो वो उससे भी प्यार से बात करना भूल गई है जिसकी ज़िंदगी को उसने प्यार से भर दिया था । उसे अब प्यार शब्द ही झूठा और खोखला लगने लगा है । उसे लगता है ये सब बस बहलाने के तरीके हैं । 

जिस रात चांद अकेला ही आसमान में बादलों के पीछे अपनी मयूसी छिपाए फिर रहा था उसी रात तो ऋद्धि ने शाश्वत से कहा था "जब लोग आंखें बंद करते होंगे तो उन्हें अपने भविष्य के बारे में कुछ दिखता होगा, अपना लक्ष्य, अपनी सफलता लेकिन मैं अब आंखें बंद करती हूं तो सिर्फ़ अंधेरा दिखता है । अब तो आप भी नहीं दिखते । ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी का कोई लक्ष्य ही नहीं रह गया ।" 

छोटा या बड़ा, लक्ष्य तो हर इंसान का होता है । लक्ष्य का ना होना सांसों के चलते हुए इंसान के धीरे धीरे मरने की पहचान है । ऋद्धि भी मर रही थी । सांसें थम जाने पर जब कोई मरता है तो लोग रोते हैं लेकिन उसकी चलती सांसें में हो रही मौत पर लोग जश्न की तैयारी कर रहे थे । 

"लो मुंह मीठा करो । बात पक्की हो गई ।" पापा ने मां के हाथ में उसी मिठाई का डिब्बा रखा था जिसके स्वाद में ऋद्धि सब भूल जाया करती थी । मगर आज ये मिठाई ज़हर लग रही थी उसे । 

"भगवान का लाख लाख धन्यवाद । बहुत बड़ा काम हुआ । कब से लगे हुए थे ।" मां ने अपने अंदर की सारी खुशी समेटते हुए कहा था । 

ऋद्धि सब सुन रही थी । उसे ये बात हैरान कर रही थी कि आखिर कैसे उसकी मां और पापा सच जानते हुए इतना खुश हो सकते हैं ? क्या वो बस एक 'काम' है ? जिसे किसी भी हाल में निपटा देना है ? ईश्वर को धन्यवाद दे कर क्यों इस मामले से जोड़ा जा रहा है । क्या ईश्वर सिर्फ़ उनकी बात ही सुनते हैं ? उसकी उन 645 मन्नतों का क्या जो उसने पिछले 8 साल में शाश्वत का होने के लिए मांगी हैं ? क्या ईश्वर ने ये दुनिया इसीलिए बनाई कि एक दिन ऋद्धि और शाश्वत को अलग कर सके ? 

ऋद्धि के पास इतने सवाल हैं जिनकी गिनती करना तारों को गिन पाने से भी मुश्किल है । उसके सवालों के घेरे में भगवान से लेकर समाज तक सब हैं लेकिन उसे जवाब दे पाने की हिम्मत किसी में नहीं । 

"हां सच में भगवान का लाख लाख शुक्र है जो उन्होंने इतना अच्छा रिश्ता ढूंढ दिया हमारी बिटिया के लिए । वो खुश रहेगी ।" पापा ने भगवान का शुक्रिया करने की बजाए बातों-बातों में अपनी पीठ थपथपाई थी । एक पिता की सबसे बड़ी जीत यही तो है । अपनी बेटी के लिए एक सुयोग्य वर (नौकरी, सम्पत्ति, गाड़ी, घर के अधार पर) खोज लेना । 

पापा की बात सुन कर ऋद्धि यकीन नहीं कर पा रही कि ये उसके वही पिता हैं जिन्होंने बचपन में कई बार उसके बिना कहे ही उसके मन की बातें पढ़ लीं और उसकी इच्छाओं को बिना कहे ही पूरा किया । आज वही पापा उसके कहने पर भी उसके मन का हाल नहीं समझ पा रहे । उसके चेहरे पर उदासी की पड़ चुकी परत को भी अनदेखा कर रहे हैं । उसने ज़्यादा कुछ मांगा ही कहां था, बस अपनी ज़िंदगी का एक अहम फैसला लेने की आज़ादी ही तो मांगी थी । वो भी इस शर्त पर कि आप एक बार शाश्वत से मिलकर उसे परख लीजिए और फिर जो फैसला करेंगे उसे माना जाएगा । मगर उन्होंने तो जाति और समाज के बहाने से इस बात को जड़ से ही काट दिया । पापा उग्र स्वभाव के होते तो शाश्वत को मारने की धमकी देते मगर वो शांत और शालीन हैं इसलिए उन्होंने ऐसी कोई भी बात करने पर खुद को मारने की धमकी दे दी । 

शाश्वत के लिए धमकी मिलती तो शायद ऋद्धि लड़ लेती मगर पिता ने खुद के बारे में ही ऐसा बोल दिया तो वो क्या करती । 

ऋद्धि के साथ जो सबसे अच्छी बात रही वो ये कि शाश्वत उसके साथ अंत होने की संभावना तक खड़ा है । शाश्वत के पक्ष के लोग उसे तरह तरह की सलाह देते रहे, कुछ ने तो ऋद्धि के प्यार पर भी उंगली उठाते हुए ये कह दिया कि "वो प्यार करती तो तुम्हारे साथ भाग जाती ।" शाश्वत भागने के नाम पर चिढ़ जाता है । जिस खुशी के लिए दूसरों को दुखी कर के भागना पड़े उस खुशी के मायने ही क्या ? वो सोचता कि सबसे भाग लेंगे लेकिन खुद से भाग कर कहां जाएंगे दोनों ? वो ऋद्धि के लिए सबसे लड़ता रहा क्योंकि वो जानता था उसने क्या कुछ किया है और क्या कुछ सह रही है । 

सपने टूट चुके थे, लोग ऋद्धि की अंदरूनी मौत का जश्न मना चुके थे । शाश्वत की ऋद्धि किसी और के संग विदा कर दी गई थी । शाश्वत के एक वादे से बंधी ऋद्धि अपने देह का बोझ उठाए जा रही थी । 

"मेरी गुड़िया कितनी सयानी हो गई है । तुझे कहा था ना समय के साथ सब भूल जाता है । आज देख जिसके साथ शादी के लिए तू मना कर रही थी उसके साथ कितनी खुश है तू ।" ऋद्धि की धसी हुई आंखों, बुझे हुए चेहरे, कमज़ोर पड़ चुके शरीर और चेहरे पर पुती उदासी को अनदेखा करते हुए मां ने खुद से ये तय कर लिया था कि उनकी बात सही थी । ऋद्धि बस मां के चेहरे को एक टक देखे जा रही थी और मन ही मन शाश्वत को उस वादे के लिए कोस रही थी जिसकी वजह से उसे जीना पड़ रहा है । उसके जीने के कारण ही उसकी मां को ये भ्रम है कि वो सही थी । 

शायद इसी तरह लोग मान लेते हैं कि वक्त के साथ सब सही हो जाता है । सब इसी भ्रम में जीते आ रहे हैं । मगर वे ये कभी समझ नहीं पाए कि जो गलत हो चुका है उसे कभी सही नहीं किया जा सकता । शायद ताऊम्र गलत को सही साबित करने की परंपरा को ही जीवन कहा जाता है । ऋद्धि और शाश्वत की तरह हर रोज़ कई लोग मरते हैं लेकिन उनकी मौतें सिवाय उनके और किसी को नहीं दिखतीं । 

फोटो सभार - Pinterest 

धीरज झा

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Qisson Ka Kona | Kisson Ka Kona: ऋद्धि की मौत (कहानी)
ऋद्धि की मौत (कहानी)
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