About Dhiraj jha


मस्कार,


मैं धीरज झा । अपने 'क़िस्सों का कोना' ब्लॉग साइट पर आपका स्वागत करता हूं । 




मैं कौन हूं : मैं एक ऐसा इंसान हूं जो अपने विचारों से उपजी सोच की फसल को कटता हूं और शब्द रूपी अनाज में बदल कर अपने पाठकों के पढ़ने की भूख को शांत करने की कोशिश करता हूं । 


मेरा जन्म बिहार के सितामढ़ी जिले में हुआ और मैं पला बढ़ा पंजाब के होशियारपुर जिले में । मेरे पास कहानियों का अथाह संग्रह है । कुछ मैं लिख चुका हूं और बाक़ी मैं आने वाले समय में लिखने वाला हूं । कहानियां लिखने को लेकर मैं इतना आश्वस्त हूं कि मैं मानता हूं अगर मैं 100 साल तक जी सका और तब जब अपनी आखिरी लूंगा उस वक़्त भी मेरे दिमाग में कोई ना कोई कहानी होगी और मैं चाहूंगा कि इस कहानी को लिख कर ही दुनिया से विदा लूं । इसके अलावा मेरे पास हैं समसामायिक मुद्दों पर मेरे विचार जो शायद आपके विचारों से मेल खा सकते हैं । कुछ कविताएं जिनके शब्द मैं इधर उधर से बटोर कर ठीक उस तरह से सजाने की कोशिश करता हूं जिस तरह से एक बच्चा सजाता है अपने हाथों से बनाया गत्ते का घर ।


मेरे लिए पाठक : मेरे लिए पाठक मार्गदर्शक है । वो जो मुझे बनाता है, मुझे रास्ता दिखाता है । बताता है कि मैं कहां सही हूं और कहां गलत । शुरुआत की थी अपने सुकून के लिए लिख कर और अब लिखता हूं पाठकों के लिए । अगर कहूं कि अपने लिए लिखता हूं तो गलत होगा क्योंकि अपने लिए लिखा हुआ मेरी डायरी में होना चाहिए ना कि यहां आप सबके सामने । तो आप सभी से मैं हूं और आप सबकी मुझे हमेशा ज़रूरत है । स्नेह और साथ बनाए रखिए । 


कहानियां और मैं : कहानियां मेरे लिए मेरा संपूर्ण जीवन हैं । जो मैं अपने जीवन में जी नहीं पाया उन लम्हों को मैं कहानियों में जीता हूं । मेरे लिए कहानियां मेरी प्रेम पिपासा की पूरक भी हैं, सत्ता तक पहुंचने वाली मेरी आवाज़ भी हैं, किसी भूखे का दर्द और कमज़ोर की ताकत भी हैं । मैं वो कहानियां लिखना पसंद करता हूं जिनके बारे में अधिकतर लोग सोचना भूल जाते हैं । कहानियां लिखने की इसी ललक ने अभी तक मुझसे 1500 से ज़्यादा कहानियां लिखवा दी हैं । जिनमें लघु कथा से लेकर वेबसीरिज़ तक सब है । अभी मैं अपने उपन्यास पर काम कर रहा हूं । प्रतिलिपि पर मेरे पाठकों की संख्या 9 लाख के करीब हैं और यहां भी मेरी कहानियों को इनका खूब प्यार मिल रहा है । 


आजीविका के लिए क्या करता हूं : वैसे तो मैंने कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की है लेकिन ये इंजीनियरिंग मुझे रास ना आई । सालों पहले एक दिन मैं यूं ही बैठा सोच रहा था कि काश ऐसा होता कि मैं लिखता और मुझे लिखने के पैसे भी मिलते । मतलब शौक़ और आजीविका दोनों की पूर्ति एक साथ । कहते हैं दिन में जीभ पर एक बार मां सरस्वती बैठती हैं और तब जो मांगो पूरा होता है । उस समय शायद सरस्वती माता ही बैठी थीं मेरी जीभ पर तो तब से मैं लिख कर ही अपना गुजारा कर रहा हूं । नौकरी करने की कोशिश भी की । मार्केटिंग एजेंसी में कंटेंट राइटर से लेकर मीडिया संस्थान में सब एडिटर के पोस्ट तक पर रहा लेकिन फिर समझ आया कि ये सब मेरे बस का नहीं । तब से फ्रीलांस लेखन में सक्रिय हूं । फिलहाल Indiatimes.com हिंदी के लिए लिखने के साथ साथ कुछ नामी राजनीतिक चेहरों के लिए कंटेंट लिखता हूं । इसके अलावा जो समय बचता है उसमें अपने पाठकों के लिए अपनी कल्पनाओं को शब्दों में उतारता हूं । 


मैंने अभी तक क्या किया है :



2017 में प्रतिलिपि जैसी प्रतिष्ठित साइट से उस वर्ष के युवा लेखक का पुरस्कार सम्मान प्राप्त किया ।



लखनऊ पुस्तक मेले में लखनऊ की मेयर श्रीमती संयुक्ता भाटिया द्वारा स्नेह साहित्य नव पुष्प सम्मान - 2018 से सम्मानित हुआ,



पूर्वांचल साहित्य महोत्सव में सम्मानित किया गया । ये सब तो क्षणिक सम्मान था जो अब तस्वीरों में सज कर दीवारों पर टंगा है । जो मैंने काम की चीज़ की वो ये कि इंटरनेट के कई प्रतिष्ठित ब्लाॅग्स और स्तरीय पत्र - पत्रिकाओं के लिए लेख कहानियां लिखीं । 'सीट नं 48' व रूह का पैरहन नामक दो कहानी संग्रह लिखे । कई प्रतिष्ठित ब्लाॅग्स पर होने वाली कहानी लेखन प्रतियोगिताओं में विजेता घोषित किया गया । और इन सबसे मिला मुझे पाठकों का अपार स्नेह । 


निवेदन : जैसा कि मैं आप सबको बता चुका हूं कि मैं लिख कर ही अपनी आजीविका चलाता हूं तो अगर आप में से किसी को भी किसी रूप में मेरे शब्दों की ज़रूरत पड़े तो मुझे ज़रूर याद करें । लेख, विशेष तरह का कंटेंट, राजनीतिक कंटेंट, फिल्म, शार्ट फिल्म या वेब सीरिज़ के लिए कहानी या फिर आप अपनी जीवनी ही क्यों ना लिखवाना चाहें मैं हर तरह से आपकी सेवा में हाज़िर हूं । हां बस ये कहना चाहूंगा की हर चीज़ का मूल्य होता है, वो मूल्य जो मुझे आगे लिखने के लिए यहां बनाए रखेगा । तो मेरे पास निःशुल्क सिर्फ़ क़िस्सों का कोना ब्लॉग पर प्रकाशित कहानियां ही मिलेंगी । आशा करता हूं आप मेरी बात समझेंगे । 


किसी तरह की जानकारी के लिए आप मुझे : dhirujha24@gmail.com पर मेल कर सकते हैं । 


धन्यवाद 


आपका 


धीरज झा 



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